उत्तर कोरिया संकट के बीच अमरीकी चेतावनी

अमरीकी विदेश मंत्री
इमेज कैप्शन, कैरी ने उत्तर कोरिया को कड़ा संदेश दिया है

अमरीका ने कहा है कि वो उत्तर कोरिया की तरफ से किसी तरह का खतरा पैदा होने की स्थिति न सिर्फ खुद को बल्कि अपने सहयोगी देशों दक्षिण कोरिया और जापान की हर हाल में रक्षा करेगा.

अमरीकी विदेश मंत्री जॉन कैरी ने दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री युन ब्युंग-से के साथ मुलाकात में ये बात कही.

इसी साल फरवरी में तीसरी बार परमाणु परीक्षण करने के बाद उत्तर कोरिया की तरफ से कई ऐसे कदम उठाए गए हैं जिनसे कोरियाई प्रायद्वीप में लगातार तनाव बढ़ रहा है.

खास तौर पर उत्तर कोरिया अपने परमाणु परीक्षण के बाद खुद पर लगाए गए संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों और अमरीका व दक्षिण कोरिया से साझा सैन्य अभ्यास से नाराज है.

गहराता संकट

अमरीकी विदेश मंत्री कैरी ने उत्तर कोरिया की तरफ से हालिया भड़काऊ बयानों को "अस्वीकार्य" बताया.

उन्होंने कहा, “जो काम (उत्तर कोरिया के नेता) किम जोंग उन कर रहे हैं, वो भड़काऊ है. ये खतरनाक है और अमरीका कभी स्वीकार नहीं करेगा कि उत्तर कोरिया परमाणु राष्ट्र बने और मैं फिर से कहता हूं कि हम खुद को और अपने साथी कोरिया और जापान की रक्षा के लिए हर मुमकिन कदम उठाएंगे. हम ऐसा करने के लिए तैयार हैं और मैं समझता हूं कि उत्तर कोरिया इस बात को समझता है.”

इससे पहले अमरीकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने कहा कि दो मिसाइल विनाशकों को क्षेत्र में तैनात किया गया है, "जो हमारे सहयोगी या हमारे क्षेत्र के लिए खतरा बनने वाली किसी भी मिसाइल से निपटेगा."

मंगलवार को उत्तर कोरिया ने घोषणा की कि वो अपने मुख्य योंगब्योन परमाणु परिसर को फिर से शुरू करने की योजना बना रहा है. कैरी ने कहा कि ये कदम बहुत ही भड़काऊ और गंभीर होगा.

उत्तर कोरियाई रुख

इससे पहले संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने कहा कि ये संकट "बहुत ही दूर तक जा पहुंचा है" और उन्होंने उत्तर कोरिया से तुरंत बातचीत शुरू करने की मांग की.

उत्तर कोरिया के लोग मानते हैं पश्चिमी देश उनके देश को परमाणु ऊर्जा हासिल करने से रोकना चाहते हैं. उन्हें अपने नेता किम जोंग उन की इस बात में पूरा विश्वास है कि परमाणु शक्ति से उनके देश में शांति और समृद्धि बढ़ेगी.

लेकिन अमरीकी व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जे कार्नी का कहना है कि अगर उत्तर कोरिया योंगब्योन के परमाणु परिसर को बहाल करता है तो ये फिर इस बात का संकेत होगा कि वो अपनी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों का पूरा नहीं कर रहा है.

उत्तर कोरिया ने एक समझौते के तहत इस परमाणु परिसर में काम बंद कर दिया था लेकिन वो अब इस समझौते का उल्लंघन करने की तरफ बढ़ रहा है.