श्रीलंका: मानवाधिकार मामलों पर एमनेस्टी का रुख़ नरम

मानवाधिकार
इमेज कैप्शन, श्रीलंका में पिछले कुछ सालों में तमिल नागरिकों पर अत्याचार के मामले सामने आए हैं

मानवाधिकार के लिए काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल के भारत स्थित प्रतिनिधि ने श्रीलंका में रह रहे तमिलों के हालात पर कुछ टिप्पणियां की हैं.

एमनेस्टी इंटरनेश्नल के भारतीय प्रतिनिधि जी. अनंत पद्मनाभन के अनुसार, '' <link type="page"><caption> श्रीलंका</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/03/130319_dmk_srilanka_da.shtml" platform="highweb"/></link> मुद्दे पर अमरीका द्वारा तैयार किया गया दूसरा मसौदा काफी हल्का है.''

पद्ममनाभन के अनुसार इस मसौदे में ऐसा बहुत कुछ है जो संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग के 21वें चैप्टर में उल्लेख किए गए कई सबूतों को नरम करके दिखाने की कोशिश है.

यही नहीं, इसमें श्रीलंका में मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने जो चिंता जताई थी उसको भी कम करके दिखाया गया है.

इस प्रस्ताव में एक बार फिर श्रीलंका सरकार को एक विश्वासपरक और स्वतंत्र जांच करवाने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है. हालांकि इससे पहले भी श्रीलंका सरकार इस दिशा में लगभग चार साल पहले से काम कर रही है.

प्रस्ताव में इस बात को भी बेहद निराशाजनक माना गया है कि इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच की मांग नहीं की गई है.

कूटनीतिक विजय

ये एक तरह से भारत और श्रीलंका के कूटनीतिक अभियान की जीत है, क्योंकि इसमें श्रीलंका में मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों को उतना गंभीर नहीं माना गया जितना कि दावा किया जा रहा था.

इस प्रस्ताव में एक बार फिर श्रीलंका सरकार को किसी भी अन्य देश की तरह देखा गया है, जिस पर अपने क्षेत्र में रह रहे हर नागरिक के अधिकारों की रक्षा करने की ज़िम्मेदारी है.

इस संशोधित मसौदे में श्रीलंका सरकार द्वारा देश के उत्तरी प्रांत में सितंबर 2013 में प्रांतीय समिति के लिए चुनाव कराए जाने की घोषणा का स्वागत किया है.

इन सभी बातों से स्पष्ट तौर पर संशोधित प्रस्ताव में भारतीय असर को देखा जा सकता है, जो आगे के रुख़ को तय करता है.

इस मसौदे के लहज़े से ये साफ है कि श्रीलंका में <link type="page"><caption> मानवाधिकार उल्लंघन</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/02/130226_srilanka_hrt_dp.shtml" platform="highweb"/></link> और श्रीलंकाई तमिलों को लेकर जो भी विवाद खड़े हो रहे हैं उनके निराकरण की पूरी ज़िम्मेदारी श्रीलंका सरकार पर होगी.

समर्थन वापसी

इस बीच इसी मुद्दे पर तमिलनाडु की डीएमके पार्टी ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया है.

तमिल
इमेज कैप्शन, डीएमके पार्टी इस मामले पर अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग कर रही है.

डीएमके ने भारत सरकार से मांग की थी कि वो इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र पर अंतरराष्ट्रीय जांच करवाने का दबाव बनाए और साथ ही भारतीय संसद में भी इस पर एक प्रस्ताव लाए.

एसोसिएटेड प्रेस में छपी ख़बर के अनुसार वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने संयुक्त राष्ट्र में इससे संबंधित प्रस्ताव लाने के मामले में कहा है कि इसके लिए संसद में सभी पार्टियों का एक मत होना ज़रूरी है, जिसके लिए कोशिशें शुरु हो गई हैं.

डीएमके ने अमरीका द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव को कमज़ोर करने का आरोप भी लगाया है और कहा है कि भारत <link type="page"><caption> श्रीलंका</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/03/130319_dmk_srilanka_da.shtml" platform="highweb"/></link> में रह रहे तमिलों के खिलाफ़ काम कर रहा है.

एपी में छपी ख़बर के अनुसार, डीएमके नेता करुणानिधि ने कहा है कि अगर मौजूदा सरकार केंद्र में बनी रहती है तो ये श्रीलंका के तमिलों के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है.

हालांकि बाद में उन्होंने अपनी मांगें माने जाने की स्थिति में सरकार को समर्थन देने की भी बात कही है.