क्या नए पोप का चुनाव 'हैक' हो सकता है?

ऐसे वक्त में जब ईसाई धर्म गुरुओं का एक खास वर्ग नए पोप के चुनाव की तैयारियों में जुटा हुआ है. कई लोग इस बात को लेकर कौतूहल में हैं कि <link type="page"> <caption> नए पोप के चुनाव</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/02/130228_pope_final_day_ss.shtml" platform="highweb"/> </link> का तरीका क्या है और इसे ‘हैक’ करना कितना मुश्किल है?
नए पोप के चुनाव के तौर-तरीके परंपराओं पर आधारित रखे गए हैं.
<link type="page"> <caption> जॉन पॉल द्वितीय</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/02/130227_pope_farewell_aa.shtml" platform="highweb"/> </link> ने साल 1996 में इसे आखिरी बार संहिताबद्ध किया था और <link type="page"> <caption> बेनेडिक्ट 16वें</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/02/130227_pope_last_speech_vr.shtml" platform="highweb"/> </link> ने उसे लगभग बिना किसी छेड़-छाड़ के बरकरार रखा.
नियमों के तहत 80 साल से कम उम्र के कार्डिनल ही नए पोप के चुनाव में मत दे सकते हैं और 117 वोटों के पड़ने की उम्मीद की जा रही है. यह चुनाव <link type="page"> <caption> चैम्बरलिन चर्च</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/02/130227_pope_retirement_vr.shtml" platform="highweb"/> </link> के मार्गदर्शन में सिस्टीन चैपल में होता है.
मतदान में <link type="page"> <caption> कागज के मत पत्रों</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/02/130214_pope_retirement_seclusion_ss.shtml" platform="highweb"/> </link> का इस्तेमाल किया जाता है और इसकी गिनती भी हाथों से की जाती है.
चरणबद्ध चुनाव
मतदान गुप्त होता है लेकिन इसके अलावा कुछ भी छुपा नहीं रहता है.

प्रत्येक कार्डिनल को कम से कम दो या तीन पेपर बैलट दिया जाता है ताकि किसी गलती की सूरत में सुधार किया जा सके. उसके बाद इन प्रमुख धर्मगुरुओं में से नौ लोगों का <link type="page"> <caption> निर्वाचन पदाधिकारियों</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/02/130217_pope_dp.shtml" platform="highweb"/> </link> के तौर पर चयन भी किया जाता है.
इनमें तीन मतगणना करने के लिए होते हैं, तीन इस मतगणना का पुनरीक्षण करते हैं और बचे हुए तीन लोगों की जिम्मेदारी स्वास्थ्य वजहों से चैपल आ पाने में असमर्थ लोगों का मत इकठ्ठा करने की होती है.
बैलेट पेपर का इस्तेमाल
हर कार्डिनल नए पोप के बारे में अपनी पसंद एक आयताकार बैलट पेपर पर हाथ से लिखकर जाहिर करेंगे और इस बात का हर मुमकिन ख्याल रखेंगे कि उनकी लिखावट की पहचान न की जा सके.
निर्वाचन पदाधिकारी के तौर पर चयनित धर्मगुरुओं को भी ऐसा करना होगा.
जब सभी कार्डिनल अपनी पसंद जाहिर कर देंगे तो छंटनी का चरण शुरू हो जाएगा. सारे मतपत्रों के इकठ्ठा हो जाने के बाद छंटनी के काम में लगे निर्वाचन पदाधिकारी उसे अच्छी तरह से मिलाएंगे.
फिर उन मतपत्रों की गिनती की जाएगी और अगर कुल मतपत्रों की संख्या सही नहीं पाई गई तो उन्हें जला दिया जाएगा और सारी प्रक्रिया फिर से दोहराई जाएगी.
मतगणना

मतों की गिनती के लिए हर मतपत्र को खोला जाएगा और फिर छंटनी करने वाला अधिकारी उन्हें पढ़ेगा.
फिर इस ब्यौरे को लिखा जाता है और यह सब कुछ मतदान में भाग लेने वाले धर्मगुरुओं की मौजूदगी में किया जाएगा.
प्रत्येक व्यक्ति को मिले मत का ब्यौरा अलग से एक कागज पर लिखा जाता है और जिन मतपत्रों पर एक से ज्यादा नाम लिखे होते हैं, उन्हें अमान्य करार दे दिया जाता है.
संभवतः वे मतपत्र भी अमान्य करार दे दिए जाते हैं जिन पर किन्हीं का नाम नहीं लिखा होता है या जो स्पष्ट तौर पर नहीं लिखे जाते हैं. इसके बाद के चरण में निर्वाचन पदाधिकारी मतों की गिनती के आधार पर विजेता के बारे में तय करते हैं.
पुनरीक्षण के काम में लगे निर्वाचन पदाधिकारी इस पूरी प्रक्रिया की पुष्टि करते हैं. और इसके बाद मतपत्र जला दिए जाते हैं.
नए पोप का चयन
अगर धुआं सफेद उठे तो इसका मतलब यह निकाला जाता है कि नए पोप का चुनाव कर लिया गया है और यदि धुएं का रंग काला हुआ तो मतलब हुआ कि नहीं.
काले धुएं के लिए मतपत्रों पर पानी या एक खास तरह का रसायन छिड़का जाता है.

पूरी प्रक्रिया लगभग अभेद्य रखी गई है और संभवतः सबसे बड़ा खतरा आत्मसंतुष्टि का ही है.
पहले मत के समय पंरपरागत तौर पर जो चीजें हमें खूबसूरत लगती हैं जरूरी नहीं है कि 20वें मत के समय भी वही एहसास रहे.
यह उबाऊ भी हो सकती है और समय बचाने का लालच भी हो सकता और अगर कार्डिनल इस लालच में आए तो पूरी चुनाव प्रक्रिया अभेद्य नहीं रह जाएगी.
नए पोप के निर्वाचन के लिए दो-तिहाई से एक ज्यादा मतों की जरूरत होती है.
पोप बेनेडिक्ट ने इसमें बदलाव किया था. परंपरागत रूप से दो-तिहाई मत मिल जाने पर नया पोप निर्वाचित मान लिया जाता था लेकिन पोप जॉन पॉल द्वितीय ने इसे बदलकर साधारण बहुमत पूरा करने का नियम बना दिया था.
बेनेडिक्ट ने इसी प्रावधान को बदला था.
क्या यह ‘हैक’ हो सकता है?
तो कितना मुश्किल है पोप का चुनाव हैक करना?
पहला यह कि पोप के निर्वाचन की पूरी प्रक्रिया ही हाथों से निपटाई जाती है जिससे इसे किसी तरह के तकनीकी हमलों से कोई खतरा नहीं होता है.
मतदान प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में इसकी निगरानी के लिए एक से ज्यादा लोग शामिल होते हैं.
दूसरा यह कि मतदान में भाग लेने वाले धर्मगुरुओं का समूह बहुत छोटा होता है.
इस वजह से किसी बाहरी आदमी के इसमें दखल देने की कोई गुंजाइश नहीं बचती.
जिस चर्च में यह जमावड़ा इकट्ठा होता है उसे मतदान से पहले बंद कर दिया जाता है.

मतदान में भाग लेने वाले धर्मगुरुओं के सामने एक दूसरे का क्रियाकलाप पारदर्शी होता है.
उनके मतपत्र दिखाई देते हैं और यह सुनिश्चित किया जाता है कि प्रत्येक कार्डिनल एक ही वोट दे सके और सभी कार्डिनल एक दूसरे को जानते हैं जिससे कि किसी तरह की धोखाधड़ी की संभावना लगभग नहीं के बराबर ही रहती है.
मतपत्रों में फेर-बदेल?
संभवतः मतपत्रों की छंटनी के काम में लगे धर्मगुरु मतों के साथ किसी किस्म का फेर-बदल करने को लेकर सबसे बेहतर स्थिति में होते हैं.
लेकिन मतपत्रों के आकार में बड़ा होने की वजह से यह मुश्किल है.
ऐसा अंदाजा है कि कार्डिनल वोट देने के वक्त अपना मन बदल सकते हैं इसलिए उन्हें अतिरिक्त सादे बैलट पेपर दिए जाने की बात समझ में आती है.
कई चरणों में होने वाली जांच और फिर से जाँच की वजह से इसकी संभावना भी क्षीण ही है और चूंकि हर मतपत्र के लिए जांच करने वाले कार्डिनल को बेतरतीब तरीके से चुना जाता है इसलिए किसी तरह की साजिश की संभावना न के बराबर ही रहती है.
दिलचस्प बात यह है कि छंटनी करने वाले धर्मगुरुओं के चयन में छेड़छाड़ की थोड़ी सी गुंजाइश है क्योंकि इसको लेकर कोई लिखित नियम-कायदा नहीं है.
चुनाव में दखल देने के लिए छंटनी करने वालों और पुनरीक्षण के काम में लगे धर्मगुरुओं को प्रभावित करना पहली जरूरत है और इसके बाद कोई कमजोर कड़ी दिखाई देती है तो वह है मतपत्रों की गिनती का काम.
दोबारा मतगणना की जब तक कोई बड़ी वजह न हो, ऐसा नहीं किया जाता.












