27 साल बाद 'कंप्यूटर ऐप ने दी आवाज़'

अपने आस-पड़ोस की दुनिया में हमें ऐसे लोग दिखते रहते हैं जिनकी जिंदगी लकवा मार जाने के बाद बदल जाती है. जो कल तक हंसी-मजाक करते रहे हों, अचानक लकवे का दौरा उन्हें अपाहिज बना देता है.
आम तौर पर शरीर का जो हिस्सा लकवे से प्रभावित होता है, वह सुन्न पड़ जाता है. आप उससे कोई काम नहीं ले पाते. कई बार यह दौरा केवल मस्तिष्क को प्रभावित करता है और इससे आपके सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है, इसके असर से कई बार आप बोल नहीं पाते हैं.
ऐसे लोगों के लिए एक कंप्यूटर <link type="page"> <caption> ऐप</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2013/01/130111_drinking_mirror_va.shtml" platform="highweb"/> </link> नई जिंदगी बन सकता है. कम से कम ब्रिटेन के केविन बेवेरली के साथ तो ऐसा ही हुआ है.
बीते 27 साल से केविन बेवेरली बोल नहीं सकते हैं. उनके शरीर का बायां हिस्सा लकवाग्रस्त है. उनके दिमाग पर भी इसका असर पड़ा जिसके चलते वे बोल नहीं पाते हैं.
मूक लोगों के लिए नई उम्मीद
एक समय कराटे के ब्लैक बेल्ट चैंपियन रहे केविन के लिए ये जिंदगी बोझ बन गई थी लेकिन कंप्यूटर के एक नए ऐप ने उनकी जिंदगी आसान कर दी है.
दरअसल इस ऐप में आदमी के तमाम मनोभावों को संकेतों के जरिए दर्शाया गया है और मनोभावों को एक आवाज़ में रिकॉर्ड किया गया है.
आप जिस मनोभाव को अभिव्यक्त करना चाहते हैं, उससे संबंधित संकेत को दबाने पर पूरी अभिव्यक्ति आवाज के तौर पर निकलती है.
इस ऐप के इस्तेमाल करते हुए केविन के चेहरे पर खुशियां देखीं जा सकती हैं. उनके पहली अभिव्यक्ति रही है, “आख़िरकार, अब कोई मुझे सुन सकता है.”
साफ है कि इस ऐप के इस्तेमाल से मूक लोगों को भी अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति में मदद मिलेगी.












