चीन पर लगे साइबर सेंधमारी के आरोप

चीनी सेना की एक <link type="page"> <caption> खुफिया शाखा</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/02/130204_international_others_google_china_aa.shtml" platform="highweb"/> </link> के बारे में कहा जा रहा है कि यह दुनिया के सबसे सफल <link type="page"> <caption> साइबर हमलावर</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2012/05/120528_flame_cyber_ak.shtml" platform="highweb"/> </link> गुटों में से एक है. साइबर सुरक्षा से जुड़ी अमरीकी फर्म मैनडियांट के मुताबिक ‘युनिट 61398’ के बारे में यह माना जाता है कि इस संगठन ने दुनिया भर के कम से कम 141 संगठनों के सैंकड़ों टेराबाइट आंकड़ें बड़े ही करीने से <link type="page"> <caption> उड़ाए</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2013/02/130216_science_tech_facebook_hacker_sp.shtml" platform="highweb"/> </link> हैं.
मैनडियांट ने इस साइबर सेंधमारी की जड़ें शंघाई की एक गुमनाम-सी इमारत में खोजी हैं. फर्म के मुताबिक इस इमारत का इस्तेमाल चीनी सेना की ‘युनिट 61398’ करती है.
हालांकि चीन ने <link type="page"> <caption> हैकिंग</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2012/10/121010_anti_hacking_product_aa.shtml" platform="highweb"/> </link> के आरोपों से इनकार किया है और मैनडियांट की रपट की वैधता पर सवाल उठाया है.
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हॉन्ग लेई ने कहा,“साइबर सेंधमारी अंतरराष्ट्रीय मुद्दा है और हैकिंग के पीछे <link type="page"> <caption> अनजान लोग</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/06/120610_anonymous_hacker_skj.shtml" platform="highweb"/> </link> होते हैं.”
संदिग्ध इमारत
उन्होंने कहा,“हैंकिंग के पीछे शामिल लोगों की पहचान करना बेहद मुश्किल है. हम नहीं जानते कि इस तथाकथित रपट में दिए गए सबूत कितने तर्कसंगत हैं.”
हॉन्ग ने कहा कि बीजिंग ने <link type="page"> <caption> हैकिंग</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/01/130113_aaron_swartz_vr.shtml" platform="highweb"/> </link> का स्पष्ट तौर पर विरोध किया है और इसे रोकने के लिए कदम भी उठाए गए हैं. चीन खुद भी साइबर हमलों का शिकार होता रहा है.
शंघाई के इस इमारत की सैन्य संवेदनशीलता को इस बात से समझा जा सकता है कि बीबीसी संवाददाता जॉन सुडवर्थ जब अपनी कैमरा टीम के साथ वहां पहुंचे तो सैनिकों ने थोड़ी देर के लिए उन्हें हिरासत में ले लिया था.
जॉन सुडवर्थ और उनकी टीम को वहां से तभी जाने दिया गया जब उन्होंने रिकॉर्ड किए गए वीडियो फुटेज चीनी सैनिकों को वापस कर दिए.
मैनडियांट की रिपोर्ट

हालांकि मैनडियांट का कहना है कि उन्होंने साल 2004 के बाद से हुई <link type="page"> <caption> साइबर सेंधमारी</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2012/07/120727_android_hacked_adg.shtml" platform="highweb"/> </link> की सैकड़ों घटनाओं की जांच की थी और पाया कि इन हरकतों के तार चीन से जुड़े हुए हैं और चीनी सरकार को इनके बारे में पता है.
हैकिंग हमलावरों में सबसे प्रमुख है ‘एपीटी1’ और इसके बारे में मैनडियांट मानती है कि साइबर सेंधमारों का यह <link type="page"> <caption> एकमात्र संगठन</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/china/2012/04/120406_china_hackers_tb.shtml" platform="highweb"/> </link> है जो अपनी गतिविधियां कम से कम साल 2006 से जारी रखे हुए है.
तरह तरह के संगठन ‘एपीटी1’ के हैकिंग हमलों का शिकार हुए हैं.
मैनडियांट कहती है,“हमें यकीन है कि ‘एपीटी1’ इतने लंबे समय तक अपने साइबर हमले जारी रखने में इसलिए सक्षम हुआ है क्योंकि इसे सरकार की सीधी मदद हासिल है.”
सक्रिय संगठन
फर्म के मुताबिक ‘एपीटी1’ की हैकिंग हरकतों के सुराग शंघाई के पुडोंग इलाके की एक 12 मंजिला इमारत में मिले. रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की ‘युनिट 61398’ भी इसी इलाके से काम कर रही है.
मैनडियांट की रपट में ‘एपीटी1’ के बारे में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. इसके लिए अच्छी अंग्रेजी और <link type="page"> <caption> कंप्यूटर सुरक्षा</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2012/01/120130_cyber_attack_ms.shtml" platform="highweb"/> </link> व नेटवर्किंग तकनीक की जानकारी वाले सैंकड़ों या संभवतः हज़ारों लोग काम करते हैं.
‘एपीटी1’ ने दुनिया के 20 उद्योगों की 141 कंपनियों के आंकड़े चुराए हैं जिनमें 87 फ़ीसदी अंग्रेजी में काम करते हैं.
हैकिंग के बाद अपने शिकार के नेटवर्क में ‘एपीटी1’ ने अपनी घुसपैठ औसतन 356 दिनों तक कायम रखी और सबसे ज्यादा 1,764 दिनों तक.
‘एपीटी1’ ने जिन उद्योगों को अपना निशाना बनाया वे चीन के आर्थिक विकास के लिए उसकी पंचवर्षीय योजना में रणनीतिक तौर पर अहम हैं.












