उत्तर कोरिया के खिलाफ़ दुनिया लामबंद

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण की कड़ी आलोचना की है और कड़े प्रतिबंधों समेत सख़्त कार्रवाई की धमकी दी है.
मंगलवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण के बारे में विचार-विमर्श करने के लिए सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई गई थी.
बैठक के बाद अमरीकी दूत सूज़न राइस ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हर मुमकिन कोशिश की जाएगी ताकि उत्तरी कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को रोका जा सके.
दूसरी तरफ अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मंगलवार को किए उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण बेहद भड़काऊ कदम बताया और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से इसके जवाब में ‘तेजी से’ और ‘विश्वसनीय’ कदम उठाने को कहा.
उधर उत्तर कोरिया के मुख्य सहयोगी और सुरक्षा परिषद में वीटो शक्ति रखने वाले चीन ने भी बीजिंग में उत्तर कोरियाई राजदूत को तलब कर परमाणु परीक्षणों पर अपना विरोध जताया है.
‘अमरीका के लिए खतरा’
राइस ने कहा, “सुरक्षा परिषद इस मुद्दे पर एकजुट है और साफ़ तौर पर उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम का विरोध करती है और इसे अंतरराष्ट्रीय शांति औऱ सुरक्षा के लिए खतरा समझती है जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. और उत्तरी कोरिया को इसके लिए सुरक्षा परिषद के कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा.”
अमरीकी दूत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव 2087 के तहत उत्तर कोरिया के खिलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों के पास कई विकल्प हैं जिन पर अमल किया जा सकता है. इनमें कड़े आर्थिक प्रतिबंध भी शामिल हैं.
उधर वॉशिंगटन में अमरीकी रक्षा मंत्री लियोन पनेटा ने भी उत्तर कोरिया को अमरीका के लिए एक गंभीर खतरा कहा है. उन्होंने एक भाषण के दौरान कहा, “उत्तर कोरिया ने मिसाइल परीक्षण के बाद अब यह परमाणु परीक्षण भी किया है. वह अमरीका के लिए एक गंभीर खतरा हैं. और हमें उससे निपटने के लिए तैयारी कर लेनी चाहिए.”
कड़ी कार्रवाई पर जोर
राइस ने कहा, “उत्तरी कोरिया को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करके न तो कोई फ़ायदा हुआ है और न कभी होगा. एक मज़बूत औऱ खुशहाल देश बनाने के बजाय उत्तर कोरिया ने अपनी गलत नीतियों के तहत परमाणु कार्यक्रम जारी रखा जिससे उसने खुद को अलग थलग किया है और अपने लोगों को गरीबी में और अधिक ढकेला है.”
उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया का परमाणु कार्यक्रम अमरीका समेत विश्व के बहुत से देशों के सुरक्षा के लिए खतरा है."

अमरीका और रूस समेत कई देश बैठकें और सलाह मशविरे कर रहे हैं जिससे उत्तरी कोरिया के खिलाफ़ एकजुट हो कर कड़ी कार्रवाई की जाए.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने भी कड़े शब्दों में उत्तरी कोरिया के परमाणु परीक्षण की आलोचना की और कहा यह संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का घोर उल्लंघन है.
बान की मून दक्षिण कोरियाई नागरिक हैं और महासचिव बनने से पहले वह दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री भी रह चुके हैं.
चीन पर नजरें
लेकिन इस पूरे मामले में चीन के रुख पर सभी की नजरें लगी हैं.
चीन उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा साझीदार माना जाता है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों के बावजूद चीन से ही उत्तरी कोरिया को ईंधन और अन्य ज़रूरी वस्तुएं मुहैया कराई जाती हैं.
लेकिन चीन ने इस परमाणु परीक्षण की कड़ी निंदा की है. फिर भी चीन सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों में कड़ी कार्रवाई के लिए किस हद तक अंतरराष्ट्रीय समुदाय का साथ देगा, इस पर अब भी कयास लगाए जा रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र ने दिसंबर 2012 में उत्तरी कोरिया द्वारा लंबी दूरी की मिसाइल परीक्षण के खिलाफ़ अतिरिक्त प्रतिबंध लगा दिए थे.
उत्तरी कोरिया 2006 और 2009 में भी दो बार परमाणु परीक्षण कर चुका है.












