मलाला को मिली अस्पताल से छुट्टी

तालिबान चरमपंथियों की गोली का शिकार हुई पाकिस्तानी स्कूली छात्रा यूसुफ़ज़ई को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है.
पंद्रह वर्षीय मलाला को पिछले साल अक्तूबर में उस वक़्त गोली मार दी गई थी जब वो अपने स्कूल से घर लौट रहीं थीं.
मलाला तालिबान की धमकियों की परवाह किए बग़ैर पाकिस्तान में लड़कियों की शिक्षा के अधिकार को लेकर अभियान चला रही थी.
पाकिस्तान में डॉक्टरों ने उसके सिर से एक गोली निकाली थी, लेकिन बाद में मलाला को इलाज के लिए ब्रिटेन भेजा दिया गया.
बर्मिंघम के क्वीन एलिज़ाबेथ अस्पताल में मलाला का दोबारा ऑपरेशन किया गया. अस्पताल की टीम ने मलाला के स्वास्थ्य में तेज़ी से हो रहे सुधार पर काफ़ी प्रसन्नता ज़ाहिर की थी.
अस्पताल के अधिकारियों के मुताबिक़ मलाला अब अपने घर वालों के साथ जा सकती है और ज़रूरत पड़ने पर वो अस्पताल दोबारा आ जाएगी.
सोमवार को ही डॉक्टरों ने कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि मलाला को दोबारा सर्जरी की ज़रूरत है.
पिछले महीने मलाला को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी लेकिन बाद में उनका दोबारा ऑपरेशन करना पड़ा.
तालिबान
गत नौ अक्तूबर को मलाला पाकिस्तान के उत्तर पश्चिमी ज़िले स्वात में अपने स्कूल से लौट रही थी. उसी समय कुछ बंदूक़धारियों ने उनकी बस को रोककर उनके सिर और सीने में गोली मार दी थी.
तालीबान ने दावा किया था कि उन्होंने ही मलाला को गोली मारी थी क्योंकि वो धर्मनिरपेक्षता का प्रचार-प्रसार कर रही थी.
इस घटना ने न सिर्फ़ पाकिस्तान में सनसनी फैला दी बल्कि पूरी दुनिया में इसकी चर्चा होने लगी.
उम्मीद की जा रही है कि मलाला अब स्थायी रूप से ब्रिटेन में अपना निवास बना लेगी क्योंकि उनके पिता ज़ियाउद्दीन यूसुफ़ज़ई को पाकिस्तान के वाणिज्य दूतावास में एक नौकरी दे दी गई है.
इसी हफ्ते की शुरुआत में घोषणा की गई थी कि मलाला के नाम से एक फ़ंड तैयार किया जाएगा जो उन क्षेत्रों में लोगों को दिया जाएगा जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में बेहतरीन काम किया है.












