हिलेरी क्लिंटनः नई पहचान का सफ़र

चार वर्ष अमरीका की विदेश मंत्री रहने के बाद हिलेरी क्लिंटन ये पद छोड़ रही हैं. अब चर्चा हो रही है कि क्या 2016 में वो राष्ट्रपति पद के लिए चुनावी दौड़ में शामिल होंगी.
अमरीका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कुछ दशकों के दौरान एक सक्रिय छात्र नेता से दुनिया भर में मशहूर राजनीतिज्ञ के रूप में अपनी पहचान बनाई है.
शुक्रवार को विदेश मंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल का आखिरी दिन था. क्या उनका सफ़र यहीं ख़त्म हो गया है या वह अब किसी नए सफ़र की तैयारी में हैं.
बिल क्लिंटन ने जब साल 1992 में अमरीका के राष्ट्रपति का पद संभाला और हिलेरी देश की प्रथम महिला बनीं तब से दुनिया उन्हें पहचानती रही है.
अमरीकियों ने गैलप पोल में 17 दफा हिलेरी को सबसे ज्यादा प्रशंसित महिला के तौर पर शुमार किया. अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी उन्हें देश की बेहतरीन महिला मंत्री बताया.
उन्हें कई लोगों की तारीफ भी मिली वहीं कई उनकी आलोचना भी करते हैं. उनकी स्वास्थ्य सुधार से जुड़ी नीतियों को विपक्ष की चुनौती का सामना करना पड़ा.
यौन शोषण से जुड़े मामले पर मीडिया के साथ क्लिंटन के रिश्ते जब खराब हुए तो हिलेरी ने इस तनाव को कम करने की भरपूर कोशिश की.
हालांकि देश की प्रथम महिला से सीनेटर बनी हिलेरी के प्रशंसकों की कोई कमी नहीं थी. साल 2008 के चुनाव के दौरान डेमोक्रेट पार्टी के उम्मीदवारों में भी वह आगे चल रही थीं.
एक चर्चा के दौरान जब उनसे यह पूछा गया था कि क्या मतदाताओं का दिल जीतने के लिए उन्हें ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ रही क्योंकि मतदाता उनके प्रतिद्वंद्वी बराक ओबामा को पसंद कर रहे हैं?
हिलेरी ने हंस कर जवाब दिया कि वह ओबामा को पसंद करती हैं, वैसे वह खुद इतनी बुरी नहीं हैं. पास खड़े ओबामा को तुरंत जवाब देना पड़ा, “आप पसंद किए जाने लायक हैं हिलेरी.”
ओबामा और हिलेरी के रिश्ते में तल्खी के कयास लगते रहे हैं. ओबामा ने चुनाव जीत लिया लेकिन हिलेरी को विदेशमंत्री के तौर पर चुन कर सबको हैरान भी कर दिया. सार्वजनिक तौर पर हिलेरी ने हमेशा यही कहा कि उन्हें यह महसूस होता कि अगर देश का राष्ट्रपति आपकी सेवाएं लेना चाहता है तो आप उसे ना नहीं कह सकते.
हिलेरी ने अमरीकी विदेश नीति में बदलाव कर देश की छवि को और सुधारने की कोशिश की. उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई देशों कि यात्राएं भी कीं. लेकिन हाल के दिनों में पाकिस्तान के साथ अमरीका के रिश्ते उतने अच्छे साबित नहीं हुए.
पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार का कहना है, “विदेश मंत्री के तौर पर हिलेरी के कार्यकाल के दौरान पाक-अमरीका के रिश्ते बेहद खराब रहे.”
नवंबर 2011 में जब नाटो के एक हमले में पाकिस्तानी सैनिक मारे गए तो पाक-अमरीका के रिश्ते में कड़वाहट आ गई. पाकिस्तान ने अमरीका की कोई मदद करने से इनकार कर दिया और साथ ही माफी मांगने तक की मांग कर डाली. लेकिन हिलेरी ने इस मुद्दे पर ज्यादा तूल नहीं दी और बाद में बड़ी सावधानी से शाब्दिक लहजे में माफी मांगी.
हालांकि रिपब्लिकन पार्टी से जुड़े लोग मसलन राष्ट्रपति पद के पूर्व उम्मीदवार और सीनेटर जॉन मेकेन भी हिलेरी की तारीफ करते हैं. मेकेन कहते हैं, “उन्होंने 100 से ज्यादा देश के नेताओं के साथ अपने ताल्लुक बनाए इसलिए वह किसी भी वक्त फोन उठा लेती थी.”
विदेश मंत्री के तौर पर उनका लक्ष्य महज दोस्त बनाने से ज्यादा महत्वाकांक्षी था. हिलेरी और ओबामा ने कोशिश की कि अमरीका की ताकत और नेतृत्व क्षमता को नए सिरे से परिभाषित किया जाए.
हिलेरी ने अपने कार्यकाल के पहले दिन से ही परिस्थितियों के मुताबिक कूटनीति, आर्थिक, सैन्य, राजनीतिक, कानूनी और सांस्कृतिक रणनीति के जरिये अपने मकसद को साधने की कला को ‘स्मार्ट पावर’ नाम दिया.
हिलेरी ने महिला अधिकार को प्राथमिकता दी और महिलाओं के मसले के लिए एक स्थायी राजदूत की नियुक्ति की. उन्होंने विकास से जुड़े मुद्दे मसलन वैश्विक खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और उद्यमशीलता से जुड़े कार्यक्रमों पर जोर दिया.
नई हुई शुरुआत
उन्होंने विदेश मंत्रालय और पेंटागन के बीच लंबे समय से चली आ रही बाधाओं और अविश्वास को तोड़ते हुए रक्षा मंत्री बॉब गेट्स और उनके बाद रक्षा मंत्री बने लियोन पेनेटा के साथ भी काम किया.

एशिया में उनकी स्मार्ट पावर की रणनीति रंग लाई और उन्होंने सहयोगियों के साथ कूटनीति और सैन्य गठबंधन में शानदार संतुलन बनाया और सुधार के साथ सुधारवादियों मसलन बर्मा की आंग सांग सू ची के लिए समर्थन जुटाया.
मानवाधिकार या महिला अधिकारों की पैरोकार रही हिलेरी की आलोचना तब हुई जब उन्होंने चीन के साथ अपने संबंध बनाने के दौरान वहां मानवाधिकार से जुड़े मसले पर बात नहीं की.
हालांकि उन्होंने इस आलोचना को सिरे से खारिज कर दिया. उनका कहना था कि अमरीका अपने बैंकर से केवल मानवाधिकार पर बात नहीं कर सकता, इसके लिए रिश्ते ज्यादा गहरे होने चाहिए.
मेकेन का कहना है, “मुझे लगता है कि वह कई मसले पर राष्ट्रपति को प्रभावित करती रही हैं.”
हिलेरी क्लिंटन ने विदेश मंत्री के तौर पर अपनी एक अलग पहचान बनाई और उनकी छवि और शख्सियत अपने पति के प्रभाव से अलग थी.












