सीरिया में दो कार बम धमाके, कइयों की मौत

सीरिया में धमाके
इमेज कैप्शन, सीरिया डेढ़ साल से भी ज्यादा समय से विद्रोह से जूझ रहा है

सीरिया में हुए दो कार बम हमलों में कई लोगों के मारे जाने की खबर है.

पहला धमाका हमा प्रांत के जियारा गांव में एक सरकारी विकास एजेंसी के सामने हुआ.

सरकारी मीडिया ने इस धमाके में दो लोगों के मारे जाने और 10 अन्य के घायल होने की खबर दी है जबकि एक मानवाधिकार संगठन ने कम से कम 50 सैनिकों और मिलिशिया लड़ाकों के मारे जाने की बात कही है.

सरकारी समाचार एजेंसी साना की खबर में एक आधिकारिक सूत्र के हवाले से कहा गया है कि जियारा में एक टन विस्फोटक सामग्री से लदी कार को स्थानीय ग्रामीण विकास केंद्र के सामने उड़ा दिया गया जिसमें दो आम नागरिक मारे गए जबकि दस अन्य घायल हो गए.

लेकिन लंदन स्थित संगठन सीरियन ऑब्जर्वेट्री फॉर ह्यूमन राइट्स के अनुसार इस हमले में जियारा में सैन्य चौकी को निशाना बनाया जिसमें कम से कम 50 सैनिक और सरकार समर्थक मिलिशिया लड़ाके मारे गए हैं.

दूसरा धमाका राजधानी दमिश्क के मेजेज 86 इलाके में हुआ जिसमें अधिकारियों के अनुसार 11 लोग मारे गए हैं. दमिश्क के पश्चिम में पड़ने वाले इस इलाके में सरकार समर्थकों का खासा प्रभाव है.

जमीनी प्रतिनिधित्व पर जोर

सीरिया में विद्रोह
इमेज कैप्शन, सीरियाई विपक्ष को एकजुट और सशक्त करने की कोशिशें हो रही हैं

ये हिंसा ऐसे समय में हुई है जब मुख्य विपक्षी गठबंधन सीरियाई राष्ट्रीय परिषद ने घोषणा की है कि उसने अपने सदस्यों की संख्या बढ़ा कर 400 से ज्यादा की है और इसमें कार्यकर्ताओं और सीरिया के भीतर मौजूद समूहों को भी रखा गया है.

इस कदम की घोषणा कतर में हुई बैठक में की गई. इस बैठक का मकसद इन आलोचनाओं से उबरना था कि निर्वासित नेताओं के नेतृत्व वाले इस गठबंधन में जमीनी स्तर पर राष्ट्रपति बशर अल असद के खिलाफ लड़ रहे लोगों का प्रतिनिधित्व नहीं हो पा रहा है.

गुरुवार को सीरियाई राष्ट्रीय परिषद के सदस्य अमरीका के समर्थन वाले इस प्रस्ताव पर चर्चा करेंगे कि 50 सदस्यों वाला एक नया नेतृत्व समूह बनाया जाए जो सभी मुख्य विपक्षी गुटों का प्रतिनिधित्व करेगा और इसमें सैन्य कमांडर और स्थानीय परिषदों से जुड़े लोग भी होंगे.

सीरिया में पिछले डेढ़ साल से भी ज्यादा समय से राष्ट्रपति बशर असद के खिलाफ विद्रोह चल रहा जिसमें संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 20 हजार से ज्यादा लोग मारे गए हैं. हालांकि मानवाधिकार संगठन मरने वालों की संख्या 35 हजार से ज्यादा बताते हैं.