‘18 महीनों में 28,000 लापता’

सीरिया
इमेज कैप्शन, मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक ये लोगों में आतंक फैलाने और उन्हें प्रताड़ित करने का एक तरीका है.

सीरिया में काम कर रहे मानवाधिकार संगठनों का कहना है सेना और हथियार बंद संगठनों द्वारा अगवा किए जाने के चलते सीरिया में 28,000 से ज्यादा लोग लापता हैं.

मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक उनके पास पिछले 18 महीनों से जारी सरकार विरोधी हिंसक प्रदर्शनों में लापता हुए 18,000 से ज्यादा लोगों के नाम औप पते हैं. इसके अलावा 10,000 लोगों के बारे में पुख्ता जानकारी मौजूद है.

इंटरनेट के ज़रिए सक्रिय नागरिक अधिकार संगठन ‘आवाज़’ का कहना है, सीरिया में सरकार की ओर से फैलाए गए ‘आतंक’ से ‘कोई भी सुरक्षित’ नहीं है.

‘कोई भी सुरक्षित नहीं'

‘आवाज़’ की निदेशक एलिस जे के मुताबिक, ''सीरियाई लोगों को सड़कों से उठाया जा रहा है. ये लोग अक्सर गायब हो जाते हैं और सरकारी यातना ग्रहों में पहुंचते हैं. सच ये है कि बाज़ार जाने वाली महिलाएं, खेतों में काम करने वाले किसान, कोई भी सुरक्षित नहीं है.''

यह संगठन संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार परिषद से जांच की पैरवी करते हुए उसे समस्त जानकारियां सौंपेगा.

‘आवाज़’ ने सीरिया में लापता हुए इन लोगों के परिजनों उनके दोस्तों से बातचीत कर पुख्ता जानकारियां हासिल की हैं.

हज़ारों लोग लापता

संगठन के मुताबिक ये लोगों में आतंक फैलाने और उन्हें प्रताड़ित करने का एक तरीका है. परिजन लापता हों यानी महीनों इस बारे में कोई जानकारी न हो कि आपके पति, आपके बच्चे कहां हैं इससे बुरा और भयावह कुछ नहीं हो सकता.

सीरिया के हस्साका शहर मे काम करने वाले मानवाधिकार वकील मुहम्मद खलील भी इन दलीलों की पुष्टि करते हुए कहते हैं कि भले ही इन लोगों की कोई स्पष्ट संख्या मौजूद न हो लेकिन यह सही है कि मार्च 2011 से अब तक हज़ारों लोग लापता हो चुके हैं.

सीरियाई सरकार ने अभी तक इन आंकड़ों पर प्रतिक्रिया नहीं दी है लेकिन पहले भी आ चुकी इस तरह की रिपोर्ट को वो खारिज कर चुकी है.

संयुक्त राष्ट्र क् आंकड़े के मुताबिक हिंसक संघर्ष में अबतक 18,000 लोगों की मौत हो चुकी है और 25 लाख से ज्यादा अपना घर छोड़ चुके हैं. मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक मरने वालों की संख्या 30,000 से ज्यादा है.