जापान में सूनामी पीड़ित फंड में घोटाला

जापान में सरकारी जाँच में सामने आया है कि वहाँ पिछले साल आई <link type="page"> <caption> सूनामी</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2011/03/110311_japan_tsunami_pics_ia.shtml" platform="highweb"/> </link> के बाद अरबों डॉलर ऐसे कामों पर खर्च हुए जिनका पुनर्निमाण से कोई ताल्लुक नहीं था.
<link type="page"> <caption> जापान</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2011/03/110311_quake_japan_va.shtml" platform="highweb"/> </link> की सरकार ने पुनर्निमाण पर 150 डॉलर खर्च करने का बजट बनाया था, लेकिन जाँच में पाया गया कि 25 प्रतिशत धन ऐसी योजनाओं पर खर्च हुआ जिनका पुनर्निमाण से कोई लेना-देना नहीं था.
जाँच में पाया गया कि धन का प्रयोग कई बेतुके और विचित्र कामों में भी हुआ.
इस फंड की मदद से <link type="page"> <caption> सूनामी</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2011/03/110311_tsunami_history_va.shtml" platform="highweb"/> </link> प्रभावित क्षेत्र से हजार किलोमीटर दक्षिण में ओकीनावा द्वीप पर एक सड़क का निर्माण किया गया, जापान की सबसे लंबी इमारत टोक्यो स्काई ट्री का प्रचार किया गया, पायलटों को प्रशिक्षण दिया गया, और यहाँ तक कि ये धन जापान के विवादित व्हेल कार्यक्रम पर भी खर्च किया गया.
जापान के प्रधानमंत्री योशिहीको नोडा को इन खर्चों पर सफाई देने में परेशानी हो रही है.
उधर पिछले साल हुई इस दुर्घटना से <link type="page"> <caption> प्रभावित हुए सवा तीन लाख से ज्यादा लोग</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2011/03/110311_japan_tsunami_new_ia.shtml" platform="highweb"/> </link> अभी भी अस्थायी शिविरों में रह रहे हैं, और आश्चर्य की बात ये है कि अभी तक पुनर्निमाण का काम शुरू नहीं हो सका है.
इस त्रासदी में रिकुजंतकाटा बंदरगाह से सटे करीब आधे घर बरबाद हो गए थे.
शर के उप-मेयर ने समाचार एजेंसी एसोसिएटड प्रेस को बताया कि 19 महीने पहले आए सूनामी के बाद से अभी तक इलाके में एक भी नए घर का निर्माण नहीं हुआ है.
एजेंसी के मुताबिक माना गया कि धन के व्यय से जापान की अर्थव्यवस्था में तेजी लाने में मदद मिलेगी, लेकिन सरकार अब अपनी गलती मान रही है.
ओसाका में सेंट एंड्रयूज विश्वविद्यालय में राजनीति पढ़ाने वाले प्रोफेसर मासाहीरो मात्सामुरा ने एसोसिएटड प्रेस से कहा, “ये रवैया पुनर्निमाण के प्रति सरकारी लापरवाही का प्रतीक है. सभी लोग बहाने बनाने में उस्ताद हैं.”












