भूकंप की भविष्यवाणी से 'डरेंगे' वैज्ञानिक

इटली में भूकंप
इमेज कैप्शन, लाकिला में 6.3 की तीव्रता वाले भूकंप में 309 लोग मारे गए थे

छह वैज्ञानिकों और एक सरकारी अधिकारी को पिछले दिनों मानव हत्या के जुर्म में छह साल की सजा सुनाई गई.

उन्हें इटली के लाकिला में 2009 के भूकंप से पहले लोगों को ये 'झूठा भरोसा' देने का दोषी पाया गया कि भूकंप नहीं आएगा. लेकिन क्या इसके लिए सजा देना सही है.

पहले तो भूकंप विज्ञान की सीमाओं को समझना होगा. एडिनबरा विश्वविद्यालय में भूकंप विज्ञान और चट्टान भौतिकी के प्रोफेसर इयान मैन उस अंतरराष्ट्रीय आयोग के सदस्य थे जो लाकिला के बाद भूकंप की भविष्यवाणी पर बना था.

वो कहते हैं कि ये पूर्वानुमान करना संभव है कि किसी वक्त कहां पर भूकंप आ सकता है. लेकिन सटीक तरीके से यह कह पाना संभव नहीं है कि किस वक्त भूकंप आएगा.

लाकिला में छोटे छोटे झटकों के बाद बड़ा भूकंप आया था जिसमें तीन सौ से ज्यादा लोग मारे गए. मैन कहते हैं कि हल्के झटकों के बाद बड़े भूकंप की संभावना बढ़ जाती है लेकिन ये संभावना बहुत कम होती है.

सही जानकारी नहीं मिली

मैन कहते हैं, “छोटे छोटे झटकों या छोटे भूकंप के बाद बड़ा भूकंप आने की संभावना 100 में से एक होती है. ये बहुत दुर्लभ होता है, लेकिन ऐसा होता है.” लाकिला में ऐसा ही हुआ.

पहले ऐसा होता था कि लाकिला में हल्के झटके आने के बाद कुछ लोग अपना घर छोड़ देते थे और अपनी कारों में सो जाते थे ताकि इमारतों के गिरने के खतरे से बचे रहें. लेकिन 2009 में अधिकारियों के निर्देशों ने कुछ लोगों का मन बदल दिया और वे अपने घरों में ही रहे.

ये मामला भूकंप के बारे में भविष्यवाणी करने की विज्ञान की क्षमता से नहीं जुड़ा है बल्कि ये आधिकारियों के उन बयानों से जुड़ा है जिनमें भूकंप के जोखिम के बारे में सही जानकारी नहीं दी गई थी.

इतालवी भूकंप विशेषज्ञों ने उस वक्त समझा कि भूकंप की संभावना कम थी लेकिन भूकंप आना असंभव नहीं था. लेकिन प्रेस कांफ्रेस में संभवतः जो संदेश दिया गया, उससे ये मतलब निकाला गया कि चिंता की कोई बात नहीं है. 'झूठे आश्वासन' वाले बयानों के कारण ही वैज्ञानिकों के खिलाफ मामला बना.

बताया जाता है कि उस वक्त इटली के नागरिक संरक्षण विभाग में उप प्रमुख के पद पर काम कर रहे बर्नार्दो दि बर्नार्दिनिस ने तो घबराए हुए लोगों से ये भी कहा कि वे चैन से घर जाएं और वाइन का एक गिलास पीएं.

संरक्षण की जरूरत

कैब्रिज विश्वविद्यालय में जोखिम से जुड़ी सार्वजनिक समझ संबंधी अध्ययन के प्रोफेसर डेविड श्पीगलहाल्टर कहते हैं, “इस मामले की मूल जड़ संचार है. वैज्ञानिकों ने बैठक की, जोखिम का मूल्यांकन किया और वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि भूकंप का खतरा बढ़ा है, लेकिन अब है काफी कम ही. वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि वे पक्के विश्वास से नहीं कह सकते कि भूकंप आएगा ही.”

बर्नार्दिनिस ने लोगों से कहा था कि वो चैन से घर जाएं और वाइन का गिलास पीएं
इमेज कैप्शन, बर्नार्दिनिस ने लोगों से कहा था कि वो चैन से घर जाएं और वाइन का गिलास पीएं

इसके बाद लोगों को जो जानकारी दी गई उससे उन्हें ये समझ आया कि वे इस बात को लेकर आश्वस्त हो सकते हैं कि भूकंप नहीं आएगा. इसीलिए ये मामला अदालत में पहुंचा.

श्पीगलहाल्टर कहते हैं कि ये वैज्ञानिकों की जिम्मेदारी थी कि वो जोखिम के बारे में लोगों को प्रभावी तरीके से बताते. लेकिन वो मानते हैं कि लाकिला मामले के बहुत ही खतरनाक नतीजे होंगे. क्या वैज्ञानिक अब स्वतंत्र रूप से अपनी सलाह देने की हिम्मत करेंगे.

श्पीगलहाल्टर बताते हैं, “इटली में लगातार भूकंपों की समस्या रही है. अब कौन इसमें शामिल होना चाहेगा. अब भूकंप से जुड़ी भविष्यवाणियां करने में वैज्ञानिक जोखिम महसूस करेंगे.”

ऐसे में श्पीगल हाल्टर मानते हैं कि वैज्ञानिकों को संरक्षण मुहैया कराए जाने की जरूरत है.