चार पाकिस्तानी प्रधानमंत्रियों को कठघरे में लाने वाला जज

    • Author, शुमाइला जाफ़री
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़, इस्लामाबाद

महीनों के तनाव और सियासी रस्साकशी के बाद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को गिरफ़्तार कर लिया गया है. अब वे पाकिस्तान के नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो यानी नैब के पास आठ दिन की कस्टडी में हैं.

उन्हें मंगलवार को इस्लामाबाद हाई कोर्ट के परिसर में अल-क़ादिर यूनिवर्सिटी घोटाला मामले में गिरफ़्तार किया गया है. इस यूनिवर्सिटी को चलाने वाली ट्रस्ट की प्रमुख इमरान ख़ान की पत्नी बुशरा बीबी हैं.

बुधवार को इस्लामाबाद की पुलिस लाइन्स में एक अस्थाई अदालत बैठी और इमरान ख़ान की सुनवाई हुई.

केस की सुनवाई कर रहे थे नैब के जज मोहम्मद बशीर.

नैब के अभियोजकों ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इसांफ़ के चेयरमैन इमरान की 14 दिन की रिमांड मांग थी लेकिन जज बशीर ने आठ दिन की ही रिमांड दी.

कौन हैं जज मोहम्मद बशीर?

जस्टिस मोहम्मद बशीर इस्लामाबाद में नैब की तीनों अदालतों में प्रशासनिक जज हैं. इसका मतलब है कि पाकिस्तान की राजधानी में जो भी नैब का केस आएगा उसकी सुनवाई जज बशीर ही करेंगे.

उनके पास केस सुनने या न सुनने का विकल्प रहता है. वे चाहें तो इन तीनों अदालतों के किसी अन्य जज के पास केस को ट्रांसफ़र कर सकते हैं.

पाकिस्तान के क़ानून मंत्रालय के नियमों के मुताबिक़, नैब के जजों को तीन साल के लिए नियुक्त किया जाता है. लेकिन जज बशीर के साथ ये बात लागू नहीं होती.

वे इस्लामाबाद में नैब के कोर्ट संख्या एक में पिछले 11 साल से नियुक्त हैं. जज बशीर को वर्ष 2012 में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के प्रधानमंत्री युसूफ़ रज़ा गिलानी ने नियुक्त किया था.

इसके बाद 2018 में नवाज़ शरीफ़ ने उन्हें एक बार फिर तीन साल के लिए नियुक्त कर दिया.

2021 में उनका दूसरा कार्यकाल ख़त्म हुआ पर उस वक्त के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने उन्हें तीन और वर्षों के लिए जज नियुक्त कर दिया.

बीबीसी उर्दू के शहज़ाद मलिक बताते हैं कि 2024 में उन्हें एक और एक्सटेंशन देने की फ़ाइल भी प्रोसेस की जा रही है.

नैब की जजों की नियुक्ति कैसे होती है?

आमिर सईद अब्बासी पाकिस्तान टीवी चैनल दुनिया के एक सीनियर कोर्ट रिपोर्टर हैं.

अब्बासी कहते हैं कि नियुक्ति के लिए जज के नाम का सुझाव इस्लामाबाद हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस की ओर क़ानून मंत्रालय को जाता है. इसके बाद लॉ मिनिस्ट्री इस प्रस्ताव को कैबिनेट के सामने रखती है.

कैबिनेट की सहमति के बाद ये फ़ाइल राष्ट्रपति के पास जाती है जहां इसपर अंतिम मुहर लगती है.

सेशन्स जज मोहम्मद बशीर का नाम इस्लामाबाद हाई कोर्ट के दो मुख्य न्यायाधीशों ने सुझाया था. दिलचस्प ये है कि जज बशीर को पाकिस्तान की तीनों बड़ी सियासी पार्टियों के दौर में एक्सटेंशन मिला. और जिस भी प्रधानमंत्री ने उन्हें एक्सटेशन दिलाई, वही उनके सामने अभियुक्त बनकर पेश हुआ.

कैसे चार प्रधानमंत्री हुए उनके सामने पेश?

जज बशीर के बारे में एक दिलचस्प बात ये है कि उन्होंने साल 2012 के बाद चार प्रधानमंत्रियों को अभियुक्त के तौर पर अपनी अदालत में पेश होते पाया है.

इनमें पीपुल्स पार्टी के राजा परवेज़ अशरफ़, मुस्लिम लीग (नवाज़) के शाहिद ख़ाक़ान अब्बासी और नवाज़ शरीफ़ और अब तहरीक-ए-इंसाफ़ के इमरान ख़ान.

नवाज़ शरीफ़, उनकी बेटी मरियम शरीफ़ और उनके दामाद कैप्टन सफ़दर को इन्हीं जज बशीर ने एवेनफ़ील्ड अपार्टमेंट केस में भ्रष्टाचार का दोषी क़रार देते हुए, उन्हें जेल भेजा था.

पत्रकार आमिर सईद अब्बासी बताते हैं कि जज बशीर के करियर काफ़ी दिलचस्प रहा है.

अब्बासी कहते हैं, "आमतौर पर जजों को एक टर्म के लिए ही नियुक्त किया जाता है. लेकिन मोहम्मद बशीर को चार बार इस पद पर बैठने का अवसर मिला है. वे ऐसा करने वाले पहले व्यक्ति हैं. ये प्रत्याशित है."

वो कहते हैं, "ऐसे बहुत दुर्लभ मामले हैं जब उन्हें दोबारा नियुक्त किया गया हो, उदाहरण के लिए 2018 में चीफ़ जस्टिस साक़िब निसार की ओर से उनके दोबारा नियुक्ति को लेकर काफ़ी दबाव था. उस वक़्त, सुप्रीम कोर्ट के सुपरवाइज़ जज जस्टिस इजाज़ उल अहसान इस मामले को लगातार देख रहे थे. उन्होंने सुनिश्चित किया कि मोहम्मद बशीर की दोबारा नियुक्ति का नोटिफ़िकेशन जल्द से जल्द जारी हो."

आमिर अब्बासी कहते हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो के पति और पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी को उनकी अदालत से काफ़ी राहत मिली. वो पांच मामलों में बरी हो गए.

साल 2017 में तत्कालीन वित्तर मंत्री इशाक़ डार जब उनकी अदालत में पेश नहीं हुए तो मोहम्मद बशीर की अदालत एसी-1 ने उन्हें घोषित मुल्जिम क़रार दे दिया.

सज़ा से बचने के लिए डार विदेश में स्वनिर्वासन में रहे. लेकिन उन्होंने अपने पहले के फैसले को पटल दिया और क़ानूनी एजेंसियों को इशाक़ डार को गिरफ़्तार करने से रोक दिया, क्योंकि वो पिछले साल पाकिस्तान वापस लौटकर मौजूदा पीडीएम सरकार में वित्त मंत्री का कार्यभार ग्रहण करने वाले थे. डार ने अदालत को आश्वासन दिया था कि आय से अधिक संपत्ति के मामले में अदालती कार्यवाही का सामना करेंगे.

अब इमरान ख़ान की बारी...

और अब इमरान ख़ान की बारी है. अल क़दीर ट्रस्ट मामले ने उन्हें मोहम्मद बशीर के एसी-1 कोर्ट में पहुंचा दिया है.

बीबीसी उर्दू के कोर्ट रिपोर्टर शाहज़ाद मलिक की कोर्ट की कार्यवाहियों को पिछले एक दशक से कवर करते रहे हैं.

वो कहते हैं, "मोहम्मद बशीर को सरकार समर्थक जज माना जाता है. कार्यवाही के दौरान वो बहुत धैर्य से सुनते हैं, दलीलों के लिए पर्याप्त समय देते हैं और बढ़े ध्यान से बहस सुनते हैं. हालांकि अगर उनके फैसलों पर ग़ौर किया जाए तो क़रीब क़रीब सभी मुख्यधारा की पार्टियों ने उनके इंसाफ़ का स्वाद चखा है."

वरिष्ठ विश्लेषक कामरान ख़ान का कहना है, "सज़ा वाले फ़ैसलों को छोड़ दिया जाए तो यह दिलचस्प है कि जज मोहम्मद बशीर तीन बड़ी राजनीतिक पार्टियों के पसंदीदा जज रहे हैं, वो इतने जटिल शख़्सियत वाले इंसान हैं कि उन पर एक पूरी किताब लिखी जा सकती है."

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