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इमरान ख़ान की गिरफ़्तारी के बाद पाकिस्तान में अब तक क्या-क्या हुआ है?
- Author, टीम बीबीसी हिन्दी
- पदनाम, नई दिल्ली
पूर्व प्रधानमंत्री, चर्चित क्रिकेटर और लोकप्रिय राजनेता इमरान ख़ान की कथित भ्रष्टाचार के मामले में नाटकीय गिरफ़्तारी के बाद से पाकिस्तान में स्थिति बेहद तनावपूर्ण है.
जो कुछ मंगलवार को पाकिस्तान की सड़कों पर हुआ उसकी देश के इतिहास में कोई मिसाल नहीं है.
अचानक हुए इस घटनाक्रम के बाद पाकिस्तान में सिर्फ़ सुरक्षा और राजनीतिक हालात ही नहीं बल्कि आर्थिक हालात भी ख़राब हो रहे हैं.
डॉलर के मुक़ाबले रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर यानी एक डॉलर के बदले लगभग 290 रुपये पर पहुंच गया है.
अदालत में पेश हुए इमरान
इसी बीच अल-क़ादिर यूनिवर्सिटी ट्रस्ट में कथित भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ़्तार इमरान ख़ान को बुधवार को भारी सुरक्षा के बीच इस्लामाबाद हाई कोर्ट में पेश किया गया है.
अदालत ने उन्हें आठ दिनों की रिमांड पर भेज दिया है. नैब ने उनकी चौदह दिनों दिनों की हिरासत मांगी थी.
अब अदालत ने उन्हें 17 मई को पेश होने के लिए कहा है.
शाह महमूद क़ुरेशी और इमरान ख़ान के वकीलों ने उनसे मुलाक़ात करने की कोशिश की लेकिन उन्हें मिलने नहीं दिया गया.
इसी बीच इमरान ख़ान पर तोशखाना मामले में भी आरोप तय कर दिए गए हैं.
जज हुमायूं दिलावर ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को तोशखाना मामले में अभ्यारोपित किया है.
इमरान ख़ान को जब उन पर तय किए गए आरोप पढ़ कर सुनाए जा रहे थे तब उन्होंने दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया.
इमरान ख़ान की गिरफ़्तारी के बाद से ही पाकिस्तान में सुरक्षा हालात लगातार ख़राब हो रहे हैं.
सड़कों पर लोग, तोड़फोड़ और आगजनी
इमरान ख़ान के समर्थक देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन कर रहे हैं. अब तक हिंसा में चार लोगों की मौत हुई है.
कई शहरों में सैन्य ठिकानों पर भी हिंसक हमले हुए हैं. पुलिस ने इमरान ख़ान की पार्टी तहरीके इंसाफ़ (पीटीआई) के सैकड़ों कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार भी किया है.
इस्लामाबाद हाई कोर्ट से ही पीटीआई के बड़े नेता असद उमर को भी गिरफ़्तार कर लिया गया है.
पाकिस्तान के इतिहास में कभी ऐसा नहीं हुआ था कि आम लोग सैन्य ठिकानों में घुस हों और हिंसक हमले किए हों.
लाहौर के कोर कमांडर के घर में घुसी भीड़ ने जमकर तोड़फोड़ की और सामान भी लूट कर ले गए. ऐसी ही तस्वीरें रावलपिंडी से लेकर मुल्तान और गुजरांवाला से भी आई हैं.
जगह-जगह जलती हुई गाड़ियां, आसमान में उड़ता धुआं और उत्तेजक नारे लगाती आक्रोशित भीड़ सड़कों पर दिखाई दे रही हैं.
सिर्फ़ सरकारी संपत्तियों को ही नहीं बल्कि निजी संपत्तियों को भी नुक़सान पहुंचाया जा रहा है.
मानवीय सहायता के लिए काम करने वाले संगठन ईधी की एंबुलेंस को भी पेशावर में आग लगा दी गई.
पंजाब को क्यों किया फ़ौज के हवाले?
इसी बीच पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने क़ानून व्यवस्था बनाये रखने के लिए सेना को बुलाने का फ़ैसला किया है.
संविधान के अनुच्छेद 245 का इस्तेमाल करते हुए पंजाब की कार्यवाहक सरकार ने स्थानीय प्रशासन की मदद करने के लिए सेना को बुला लिया है.
पंजाब के गृह मंत्रालय ने सेना की दस कंपनियों को बुलाया है. लाहौर, मुल्तान, रावलपिंडी, फ़ैसलाबाद और कुछ अन्य ज़िलों में सेना को तैनात किया जा रहा है.
मंगलवार को पाकिस्तान में सबसे अधिक हिंसा भी पंजाब प्रांत में हुई थी. अस्करी टॉवर में आगजनी से लेकर कोर कमांडर के घर में लूटपाट तक, गिरफ़्तारी के बाद लाहौर में अफ़रा तफ़री का माहौल था.
पाकिस्तान तहरीके इंसाफ़ के नेता बार-बार लोगों से बाहर निकलकर प्रदर्शन करने का आह्वान कर रहे हैं. इससे स्थिति और भी गंभीर हो गई है.
ये भी पढ़ें- पाकिस्तान में इमरान ख़ान के साथ और ख़िलाफ़ कौन है?
कैसे गिरफ़्तार किए गए इमरान ख़ान?
कई मामलों का सामना कर रहे पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान मंगलवार को दो मामलों में ज़मानत हासिल करने के लिए इस्लामाबाद हाई कोर्ट पहुंचे थे.
पाकिस्तान के अर्धसैनिक बल रेंजर्स ने उन्हें यहां से हिरासत में लेकर नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरौ (नैब) को सौंप दिया.
इमरान को अल-क़ादिर ट्रस्ट में कथित भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ़्तार किया गया.
पाकिस्तान में रेंजर विशेष अर्धसैनिक बल हैं और सुरक्षा के लिहाज से ख़ास मौकों पर ही उनका इस्तेमाल किया जाता है.
पाकिस्तान में पुलिस इससे पहले अलग-अलग मामलों में कई बार इमरान ख़ान को गिरफ़्तार करने की नाकाम कोशिशें कर चुकी थी. हर बार इमरान ख़ान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ़ के कार्यकर्ता पुलिस बलों के सामने आ जाते थे.
लेकिन मंगलवार को जिस मामले में इमरान ख़ान को गिरफ़्तार किया गया, वो बहुत चर्चित नहीं था. हालांकि इमरान ख़ान बार-बार अपनी गिरफ़्तारी का अंदेशा ज़ाहिर कर चुके थे.
लेकिन इस बार इमरान ख़ान को गिरफ़्तार करने के लिए रेंजरों का इस्तेमाल किया गया. रेंजरों ने अदालत पहुंचे इमरान ख़ान को अपने सुरक्षा घेरे में ले लिया और फिर उन्हें नैब को सौंप दिया.
ये घटनाक्रम इतनी तेज़ी से हुआ कि पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ़ के नेताओं को भी इसे समझने और इमरान ख़ान की गिरफ़्तारी की पुष्टि करने में समय लगा.
इस वक्त क्यो हो रहा है?
पाकिस्तान में स्कूल बंद है, कुछ हाईवे ब्लॉक कर दिए गए हैं और सड़कों पर कम ही वाहन दिखाई दे रहे हैं.
पाकिस्तान में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं. देश के गृह मंत्रालय के आदेश पर प्रमुख सोशल मीडिया वेबसाइट भी ब्लॉक कर दी गई हैं.
इसी बीच पीटीआई ने फिर से अपने समर्थकों से प्रदर्शन तेज़ करने का आह्वान किया है.
बुधवार को प्रदर्शनकारियों ने लाहौर के शादमान पुलिस थाने में आग लगा दी है.
वहीं पंजाब पुलिस ने पंजाब प्रांत में ही एक हज़ार से अधिक प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार करने की पुष्टि की है.
पंजाब पुलिस के मुताबिक मंगलवार को इमरान ख़ान की गिरफ़्तारी के बाद से 130 से अधिक पुलिस अधिकारी घायल हुए हैं.
रिपोर्टों के मुताबिक नैब इमरान ख़ान की चौदह दिनों की हिरासत मांग सकती है. पीटीआई ने इमरान ख़ान की गिरफ़्तारी को क़ानूनी ठहराने के इस्लामाबाद हाई कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी है. पीटीआई नेता फ़वाद चौधरी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाख़िल की है.
गिरफ़्तारी के बाद क्या हुआ?
जैसे-जैसे इमरान ख़ान की गिरफ़्तारी की ख़बर फैली, लोग सड़कों पर उतरते चले गए. मंगलवार शाम होते-होते देश के अधिकतर शहरों में प्रदर्शन हो रहे हैं.
प्रदर्शनकारी रावलपिंडी में पाकिस्तान सेना के हेडक्वार्टर में घुस गए. वहीं लाहौर में भी कैंट में प्रदर्शनकारियों ने हिंसा की.
मौके पर मौजूद बीबीसी संवाददाताओं के मुताबिक मंगलवार को सेना ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोई ख़ास कोशिश नहीं की.
लाहौर कैंट पहुंचे बीबीसी संवाददाता अली काज़मी के मुताबिक प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए कोई सैन्य बल मौजूद नहीं थे. प्रदर्शनकारियों को सेना की तरफ़ से किसी ख़ास प्रतिरोध का सामना नहीं करना पड़ा और हिंसक झड़पों में प्रदर्शनकारी पुलिस पर भारी पड़ते नज़र आए.
मंगलवार रात क्या हुआ?
पाकिस्तान की संघीय सरकार ने पुलिस लाइन हेडक्वार्टर को एक आदेश जारी करके सब-जेल घोषित कर दिया. यहीं रात में इमरान ख़ान को रखा गया.
वहीं नैब की विशेष अदालत को एक गेस्ट हाउस में लगाया गया. इस्लामाबाद की पुलिस लाइन में चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल मौजूद रहे. यहां सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतेजाम किए गए हैं.
इसी बीच मंगलवार देर रात इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने एक फ़ैसले में इमरान ख़ान की गिरफ़्तारी को क़ानूनी क़रार दिया है. पीटीआई ने हाई कोर्ट के इस फ़ैसले पर हैरानी ज़ाहिर की.
पीटीआई नेता फ़वाद चौधरी ने कहा है कि इमरान ख़ान की ज़मानत याचिका पर सुनवाई से पहले उनकी गिरफ़्तारी को क़ानूनी ठहराना ग़ैर-क़ानूनी है.
कहां-कहां हिंसा हुई?
लाहौर में प्रदर्शनकारी ने लिबर्टी इलाक़े में असकरी टाउन को आग लगा दी. इस इमारत में कार निर्माता कंपनी ऑडी का शोरूम भी है. प्रदर्शनकारियों ने इमारत पर क़ब्ज़ा कर लिया और गाड़ियों को भी आग लगा दी.
वहीं लारौह कैंट में घुसे प्रदर्शनकारियों ने कोर कमांडर के घर को लूट लिया. सैन्य छावनी में सुरक्षा में तैनात किए गए पुलिस वाहनों को भी आग लगा दी गई.
लाहौर में ही आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने नवाज़ शरीफ़ की पार्टी मुस्लिम लीग (नवाज़) के दफ़्तर पर हमला कर दिया.
रावलपिंडी जीएयक्यू (पाकिस्तान सेना के मुख्यालय) में भी प्रदर्शनकारी घुस गए.
इसके अलावा पाकिस्तान के अलग-अलग शहरों से हिंसा की रिपोर्टों मिल रही हैं.
स्वात के चकदरा मोटरवे पर प्रदर्शनकारियों ने एक टोल प्लाज़ा को भी आग के हवाले कर दिया.
क्या है सरकार का पक्ष?
इमरान ख़ान अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज करते रहे हैं. वहीं पाकिस्तान की संघीय सरकार ने इमरान ख़ान की गिरफ़्तारी को क़ानूनी बताया है.
संघीय मंत्री अहसान इक़बाल ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि इमरान ख़ान को राजनीतिक दुर्भावना से गिरफ़्तार नहीं किया गया है.
सरकार ने हिंसा की आलोचा की है और इसके लिए पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ़ को ज़िम्मेदार बताया है.
सरकार का कहना है कि जो लोग क़ानून अपने हाथ में ले रहे हैं उन सभी की पहचान कर उन्हें दंडित किया जाएगा.
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