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फ़िनलैंड के नेटो में शामिल होने से रूस के सामने किस तरह का ख़तरा?
- Author, पॉल किर्बी (लंदन से) और जोनाथन बेयल (ब्रसेल्स से)
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
फ़िनलैंड नेटो गठबंधन का 31वां सदस्य देश बन गया है. इससे रूस के साथ नेटो सदस्य देशों की सीमा अब दोगुनी हो गयी है.
फ़िनलैंड के विदेश मंत्री ने नेटो में शामिल होने संबंधी दस्तावेज़ अमेरिकी विदेशी मंत्री को सौंपा और उन्होंने फ़िनलैंड को नेटो का सदस्य देश घोषित किया.
इसके बाद नेटो के नए चमकते मुख्यालय में 30 अन्य सदस्य देशों के झंडों के साथ फ़िनलैंड का सफ़ेद-नीला झंडा भी शामिल हो गया है. नेटो गठबंधन में फ़िनलैंड का जुड़ना, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के लिए झटका माना जा रहा है.
यूक्रेन पर हमले से पहले रूसी राष्ट्रपति लगातार नेटो के विस्तार को लेकर अपनी शिकायतें दर्ज कराते रहे थे. अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि रूस के राष्ट्रपति ने पड़ोसी देश पर हमला करके वही काम शुरू किया था, जिस काम को वे रोकने की कोशिश कर रहे थे.
रूसी राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने नेटो के विस्तार को रूसी सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों का उल्लंघन बताते हुए चेतावनी दी कि फ़िनलैंड में क्या हो रहा है उस पर रूस की पैनी नज़र है.
फ़िनलैंड के 80 फ़ीसदी लोग चाहते थे नेटो
बहरहाल नेटो में फ़िनलैंड के शामिल होने के मौके पर सैन्य बैंड ने राष्ट्रगान बजाया और उसके बाद नेटो की धुन भी सुनाई.
हालांकि इस आयोजन से कुछ दूरी पर प्रदर्शनकारियों के एक छोटे से समूह ने यूक्रेन का झंडा लहराते हुए 'नेटो में यूक्रेन' के नारे लगाए. इन लोगों के प्रदर्शन ने याद दिलाया कि क्यों गुटनिरपेक्ष फ़िनलैंड ने स्वीडन के साथ मई, 2022 में नेटो में शामिल होने की बात कही थी.
फ़िनलैंड रूस के साथ 1340 किलोमीटर (832 मील) लंबी पूर्वी सीमा साझा करता है और यूक्रेन में युद्ध शुरू होने के बाद हेलसिंकी ने नेटो का सदस्य बनना बेहतर समझा क्योंकि नेटो के अनुच्छेद पाँच के मुताबिक एक सदस्य देश पर हमला पूरे समूह पर हमला है.
यानी ज़ाहिर है कि अब अगर फ़िनलैंड पर हमला किया गया या उसकी सीमा में अतिक्रमण हुआ, तो अमेरिका सहित सभी नेटो सदस्य उसकी सहायता के लिए सामने आएंगे.
रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद से फ़िनलैंड के लोगों में नेटो में शामिल होने की राय बढ़ने लगी और 80 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है.
फ़िनलैंड के राष्ट्रपति साउली निनिस्तो ने अपने देश के लिए नए युग की शुरुआत बताते हुए कहा, "यह फ़िनलैंड के लिए एक महान दिन है." उन्होंने यह भी कहा कि फ़िनलैंड एक विश्वसनीय सहयोगी साबित होगा और नेटो की उसकी सदस्यता से किसी को कोई भी ख़तरा नहीं होगा.
निनिस्तो ने कहा, "सुरक्षा और स्थिरता, वे पहलू हैं जिन्हें हम बहुत दृढ़ता से महसूस करते हैं. सुखी जीवन होने के लिए मूल तत्व सुरक्षित वातावरण है."
30 हज़ार प्रशिक्षित सैनिक
इससे पहले नेटो के महासचिव जेन स्टोलटेनबर्ग ने नेटो गठबंधन और ख़ुद के लिए गर्व का दिन बताते हुए कहा, "यह फ़िनलैंड को सुरक्षित और नेटो को मज़बूत बनाएगा. पुतिन ने यूक्रेन पर हमला करते वक्त अपने लक्ष्य की घोषणा की थी कि इससे नेटो के साथ उनकी सीमा कम होगी और कोई और यूरोपीय देश नेटो का सदस्य नहीं बनेगा. लेकिन उन्हें इसके ठीक उलट हासिल हो रहा है."
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा, "मैं खुद को यह कहने से रोक नहीं पा रहा हूं कि हमें इस एक चीज़ के लिए मिस्टर पुतिन को धन्यवाद कहना चाहिए. वे रूस की आक्रामकता से जिस चीज़ को रोकना चाह रहे हैं, वही हो रहा है."
फ़िनलैंड के पास 30 हज़ार प्रशिक्षित सैनिकों की सक्रिय सेना है और युद्ध की आपात स्थिति में यह अपनी सैन्य क्षमता को दो लाख अस्सी हज़ार तक बढ़ा सकता है. ये नेटो की सैन्य क्षमता को बढ़ाएगा.
हालांकि फ़िनलैंड के नेटो में शामिल होने से रूस के साथ उसकी लंबी सीमा रेखा को सुरक्षित रखने की चुनौती भी होगी. वैसे नेटो के हाल की सुरक्षा योजना में इस पहलू को शामिल किया गया है.
वहीं दूसरी ओर नेटो की सदस्यता के लिए स्वीडन का आवेदन अब अटक गया है.
रूस क्या सोच रहा है?
तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप अर्दोऑन ने स्टॉकहोम पर कुर्द चरमपंथियों को गले लगाने और उन्हें सड़कों पर प्रदर्शन करने की अनुमति देने का आरोप लगाया है. हंगरी ने भी अभी तक स्वीडन को नेटो में शामिल होने की मंज़ूरी नहीं दी है.
फ़िनलैंड के विदेश मंत्री पेक्का हाविस्तो ने ब्लिंकन को नेटो की सदस्यता संबंधी दस्तावेज़ सौंपते वक्त कहा कि उनके पास बहुत महत्वपूर्ण शुरुआती काम है, "एक तो आपको ये दस्तावेज़ सौंपने हैं और दूसरे स्वीडन की सदस्यता के लिए समर्थन देना है."
वहीं स्टोलटेनबर्ग ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण यही था कि स्वीडन जल्दी से जल्दी नेटो में शामिल हो जाए. वहीं फ़िनलैंड के राष्ट्रपति ने कहा कि वे जुलाई में लिथुआनिया में होने वाले नेटो शिखर सम्मेलन में अपने पड़ोसी देश का स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं.
वैसे फ़िनलैंड एक साल के अंदर नेटो का सदस्य देश बन गया है. संयोग से फ़िनलैंड नेटो के 74वीं वर्षगांठ के दिन गठबंधन देशों का सदस्य बना है. नेटो की स्थापना 1949 में हुई थी.
नेटो में अमेरिकी राजदूत जूलियन स्मिथ ने बीबीसी को बताया, "फ़िनलैंड एक शानदार, सक्षम और साझा मूल्यों वाला सहयोगी है. हमें उम्मीद है कि हमारे बीच सहज समन्वय की स्थिति रहेगी."
वहीं क्रेमलिन ने कहा कि रूस को अपनी सुरक्षा के लिए रणनीतिक और सामरिक उपाय करने के लिए मजबूर किया जा रहा है. हालांकि क्रेमलिन ने ये भी कहा कि रूस की फ़िनलैंड के साथ उस तरह से कभी कोई असहमति नहीं रही है, जबकि यूक्रेन रूस विरोधी रहा है.
इस बीच, रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु ने मंगलवार को कहा कि रूस की कम दूरी की इस्कंदर-एम बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली बेलारूस को सौंप दी गई है और यह परमाणु के साथ-साथ पारंपरिक हथियार ले जाने में सक्षम है. उन्होंने कहा कि कुछ बेलारूसी लड़ाकू विमान भी परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम हैं.
जेन्स स्टोलटेनबर्ग ने कहा कि नेटो ने अभी तक रूस के परमाणु रुख़ में कोई बदलाव नहीं देखा है और इसलिए गठबंधन देशों में किसी भी बदलाव की आवश्यकता फ़िलहाल नहीं है. उन्होंने कहा कि हेलसिंकी प्रशासन की सहमति के बिना फ़िनलैंड में कोई नेटो सैनिक तैनात नहीं होगा.
बाल्टिक सागर पर अब नेटो के सात सदस्य हो गए हैं, इससे सेंट पीटर्सबर्ग या कालिनिग्राद से रूस की तटीय सीमा तक पहुंच और भी सीमित होगी.
क्रेमलिन प्रशासन के प्रवक्ता पेस्कोव ने बीबीसी को बताया, "रूस बारीक़ी से देख रहा है कि नेटो गठबंधन किस तरह से फ़िनलैंड की सीमा का इस्तेमाल हथियार प्रणाली की तैनाती और बुनियादी ढांचे का आधार बनाने के लिए कर रहा है, ख़ासकर सीमावर्ती इलाक़ों में जहां से हम पर ख़तरा ज़्यादा हो. इसके आधार पर क़दम उठाए जाएंगे."
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