You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
देश हो तो फिनलैंड जैसा लेकिन क्यों ?
यूरोप के संपन्न देशों में लंदन, बर्लिन, पेरिस और अन्य कई बड़े शहरों का शुमार है. इन सभी शहरों में एक सामान्य बात यह है कि यहां बेघरों की समस्या नहीं सुलझ पाई है.
माकूल सोशल वेलफेयर सिस्टम के बावजूद यहां के लोग सड़कों पर सो रहे हैं. अभी तक इन शहरों में बेघरों की समस्या नहीं ख़त्म हो पाई है.
यहां एक अपवाद है. यूरोपीय यूनियन में फिनलैंड एकमात्र देश है जिसने बेघरों को समस्या ख़त्म कर दिया है. ईयू के कई देशों के नागरिक घरों की कमी से जूझ रहे हैं. यहां के ग़रीबों के लिए घर का नहीं होना एक बड़ी समस्या है.
ब्रिटेन ने एक संसदीय जांच में पाया है कि इंग्लैंड में 2014 से 2015 के बीच सड़क पर सोने वालों की तादाद में 30 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई है.
यूरोपीय यूनियन में बेघरों को देखने वाले संगठन का अनुमान है कि 2009 में डेनमार्क में बेघर युवाओं की संख्या में 75 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई. ग्रीस की राजधानी एथेंस में हर 70 में से एक शख़्स सड़क पर सोता है.
आख़िर फिनलैंड ने इस समस्या को कैसे ख़त्म किया?
उत्तरी यूरोप के इस देश ने बेघरों को लेकर काफ़ी उदारता से मदद की है. दूसरे देश बेघरों को अस्थायी और सशर्त मदद करते हैं.
फिनलैंड बेघरों के लिए अपार्टमेंट की व्यवस्था करता है. इसके साथ ही सामाजिक कार्यकर्ताओं को उनके जीवन स्तर को सुधारने में लगाया जाता है. यहां इनके लिए रोजगार पर भी काम किया जाता है.
फिनलैंड में बेघरों को 16,300 घर देने वाले वाई फाउंडेशन के मैनेजर जुहा काकिनेन ने कहा, ''हमलोगों ने एक अनुबंध पर इन्हें अपार्टमेंट देना शुरू किया है. इन्हें किसी भी किराएदार की तरह पूरा हक़ मिला हुआ है. यदि इन्हें और समर्थन की ज़रूरत पड़ती है तो हम मदद करते हैं.''
फाउंडेशन ने ज़ोर देकर कहा कि इस क़दम से यहां बेघरों को स्थायी समाधान मिल रहा है जबकि दूसरे देशों में अस्थायी पनाह दी जाती है. उन्होंने कहा, ''ज़्यादातर बेघरों को अतिरिक्त मदद की ज़रूरत नहीं पड़ती है, लेकिन उन्हें किसी भी तरह की ज़रूरत पड़ती है तो हम मदद करते हैं.
काकिनेन का कहना है, ''हमलोग निश्चित तौर पर अपनी कोशिश जारी रखेंगे. फिनलैंड में एक अनुमान के मुताबिक़ सात हज़ार लोग अब भी बेघर हैं. यदि हमारे देश में एक भी शख़्स बेघर रहेगा तो यह कम नहीं है.''
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)