गैरी लिनेकर: कार्यक्रम के प्रसारण में रुकावट के लिए बीबीसी महानिदेशक ने मांगी 'माफ़ी'

बीबीसी के महानिदेशक टीम डेवी

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, बीबीसी के महानिदेशक टिम डेवी

बीबीसी के महानिदेशक टिम डेवी ने बीबीसी वन पर प्रसारित होने वाले स्पोर्ट्स प्रोग्राम में एक दिन की रुकावट के लिए लाइसेंस फ़ीस देने वालों से माफ़ी मांगी है.

शनिवार को बीबीसी वन टेलीविज़न चैनल पर प्रसारित होने वाले फ़ुटबॉल शो को आख़िरी मिनट में रोक दिया गया था.

दरअसल 'मैच ऑफ द डे' के होस्ट गैरी लिनेकर के समर्थन में कमेंटेटरों के वॉकआउट करने के बाद यह शो रोका गया था.

इसके बाद 'मैच ऑफ द डे' प्रोग्राम का समय घटाकर 20 मिनट कर दिया गया.

ब्रिटिश सरकार की विवादित आप्रवास नीति की आलोचना करने की वजह से लिनेकर को निलंबित कर दिया गया था. हालांकि बीबीसी के महानिदेशक टिम डेवी ने कहा है कि सरकार ने उन पर ऐसा करने के लिए दबाव नहीं डाला था.

'बीबीसी वन' पर शनिवार रात को प्रसारित हुए 'मैच ऑफ द डे' को बग़ैर प्रेज़ेंटर के प्रसारित किया गया. शो में कोई कमेंटरी भी नहीं थी. विशेषज्ञ एलेन सियरर और इयान राइट भी शो में शामिल होने नहीं आए.

छोड़िए YouTube पोस्ट
Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट YouTube समाप्त

इस प्रोग्राम को इसके मशहूर थीम ट्यून और ओपनिंग क्रेडिट्स के बग़ैर प्रसारित किया गया. कार्यक्रम शुरू होते ही एक ग्राफ़िक्स दिखाया गया. इसमें लिखा था- 'प्रीमियर लीग हाइलाइट्स.'

इसके बाद सीधे बोर्नमाउथ बनाम लिवरपूल के मैच के क्लिप दिखाए जाने लगे. अमूमन इस प्रोग्राम के दौरान जो कमेंट्री होती थी उसकी जगह भीड़ की शोर मचाती आवाज़ डाल दी गई.

बीबीसी के महानिदेशक टिम डेवी

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, बीबीसी के महानिदेशक टिम डेवी

महानिदेशक टिम डेवी ने क्या कहा?

टिम डेवी ने माना कि बीबीसी के लिए ये एक 'मुश्किल दिन' था. लेकिन उन्होंने कहा, "हम इस हालात को सुलझाने के लिए पूरा ज़ोर लगा रहे हैं."

बीबीसी न्यूज़ ने जब टिम डेवी से इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, "गैरी को दोबारा प्रसारण के लिए वापस ले आना मेरी सफलता है और हम मिलकर अपने दर्शकों को एक बार फिर वर्ल्ड क्लास स्पोर्ट्स कवरेज दे रहे हैं, जिसके बारे में मैं ये कह सकता हूं कि सॉरी आज हम डिलीवर नहीं कर सके."

टिम डेवी से सवाल किया गया, "निष्पक्षता, बीबीसी के सबसे अहम मूल्यों में से एक है और उतना ही अहम भरोसा है. इस समय ब्रिटेन में ऐसे बहुत से लोग हैं, जो आप पर भरोसा नहीं कर रहे हैं. क्या आपको लगता है कि आपको इस्तीफ़ा दे देना चाहिए?"

सवाल के जबाव में उन्होंने कहा, "बिल्कुल भी नहीं. मुझे लगता है कि मेरा काम लाइसेंस फ़ीस चुकाने वाले लोगों की सेवा करना है और ऐसा बीबीसी उन्हें देना है जो विश्वस्तरीय, निष्पक्ष और लैंडमार्क आउटपुट दे. मैं इस परिस्थिति को सुलझाने और ऐसी ही सेवा देने में लगा हुआ हूं."

टिम डेवी ने कहा कि वो निश्चित तौर पर इस्तीफ़ा नहीं देने जा रहे हैं, लेकिन उन्होंने ये ज़रूर कहा कि बीबीसी के लिए ये मुश्किल वक्त था.

डेवी ने कहा कि बीबीसी किसी राजनीतिक पार्टी को ख़ुश करने की कोशिश नहीं कर रहा था. दरअसल विपक्षी दल लगातार ये आरोप लगा रहे थे कि लिनेकर के सरकार विरोधी ट्वीट के मामले में बीबीसी के अधिकारी डाउनिंग स्ट्रीट और सरकार के मंत्रियों के दबाव के आगे झुक गए हैं.

टिम डेवी ने बताया, "पार्टी से जुड़े राजनीतिक मसलों" में शामिल होने के आरोपों के बाद लिनेकर को "कदम पीछे हटाने" को कहा गया था.

उन्होंने कहा था कि लिनेकर जैसे फ्रीलांस पत्रकारों को लेकर वो निष्पक्षता से जुड़े नियमों की समीक्षा करेंगे.

'मैच ऑफ द डे' के होस्ट गैरी लिनेकर

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, 'मैच ऑफ द डे' के होस्ट गैरी लिनेकर

लिनेकर के समर्थन में वॉकआउट

लिनेकर के बेटे जॉर्ज ने 'संडे मिरर' से कहा था कि उन्हें लग रहा है कि उनके पिता फिर से 'मैच ऑफ़ द डे' प्रेज़ेंट करेंगे. हालांकि जॉर्ज ने ये भी कहा कि "वो (लिनेकर) अपने शब्दों से पीछे नहीं हटेंगे."

मंगलवार को ब्रितानी सरकार के पेश किए गए अवैध आप्रवास बिल पर टिप्पणी करते हुए लिनेकर ने कहा था, "ये बेहद क्रूर नीति है जिसके ज़रिए सबसे अधिक कमज़ोर लोगों को निशाना बनाया जा रहा है और इसके लिए जिस भाषा का इस्तेमाल किया गया है वो 30 के दशक की जर्मन सरकार की ओर से इस्तेमाल भाषा से अलग नहीं है."

शुक्रवार को उन्हें सस्पेंड कर दिया गया था जिसके बाद निष्पक्षता से जुड़े बीबीसी के नियमों, सरकार की आप्रवास नीति और बीबीसी के चेयरमैन रिचर्ड शॉर्प की पोज़िशन को लेकर चर्चा शुरू हो गई.

बीबीसी स्पोर्ट्स के लिए ये मुश्किलों भरा अप्रत्याशित दिन रहा जब कई कर्मचारी लिनेकर के समर्थन में आ गए थे. इसमें फ़ुटबॉल कवर करने वाले कई जाने माने चेहरे शामिल थे, जो कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए.

इस दिन सवेरे से लेकर शाम तक बीबीसी के टेलीविज़न और रेडियो पर फ़ुटबॉल को लेकर कार्यक्रम चलना था, लेकिन बीबीसी को मजबूरन पहले से चलाए कार्यक्रमों को फिर प्ले करना पड़ा, रेडियो 5 लाइव में शेड्यूल में आए खाली हिस्सों को भरने के लिए उसे पॉडकास्ट चलाने पड़े.

दोपहर में फ़ुटबॉल फ़ोकस कार्यक्रम का वक्त था लेकिन ये कार्यक्रम चलाया नहीं जा सका. कार्यक्रम शुरू होने के डेढ़ घंटे पहले इसके होस्ट अलेक्स स्कॉट ने ट्वीट किया, "आज शो करना सही नहीं लग रहा."

शाम 4 बजे फाइनल स्कोर का प्रसारण होना था लेकिन इसे उस वक्त रोक दिया गया जब इसके होस्ट जेसन मोहम्मद ने स्कोर प्रस्तुत करने से मना कर दिया.

'मैच ऑफ द डे' के होस्ट गैरी लिनेकर

इमेज स्रोत, Reuters

इमेज कैप्शन, 'मैच ऑफ द डे' के होस्ट गैरी लिनेकर

रद्द करना पड़ा प्रोग्राम

कर्मचारियों के बॉयकॉट के कारण शनिवार सवेरे रेडियो 5 लाइव पर नियमित तौर पर आने वाला कार्यक्रम 'फ़ाइटिंग टॉक' के प्रसारण की योजना को भी रद्द करना पड़ा. कार्यक्रम के होस्ट कॉलिन मरे ने कहा कि "ये फ़ैसला पूरी टीम और मैंने लिया था."

जो फैन्स दोपहर के वक्त टीवी पर खेल कार्यक्रम देखना चाहते थे उन्हें बार्गेन हंट और द रिपेयर शॉप का रिपीट टेलीकास्ट देखना पड़ा. एक वक्त वो भी था जब रेडियो 5 लाइव को पुरानी, पहले से रिकॉर्ड कर रखी रिपोर्टें चलानी पड़ीं.

रात के दस बजकर बीस मिनट पर 'मैच ऑफ़ द डे' कार्यक्रम के प्रसारण से पहले एक प्रेज़ेन्टर ने दर्शकों को बताया, "हम माफ़ी चाहते हैं हम सामान्य दिनों की तरह आज कमेंट्री टुडे समेत मैच ऑफ़ द डे का प्रसारण नहीं कर पाएंगे, लेकिन आप आज के प्रीमियर लीग मैचों के बेस्ट एक्शन देख सकते हैं."

रविवार को टीवी पर कवरेज की योजना और क्या बीबीसी मार्क चैपमैन के साथ मैच ऑफ द डे 2 प्रसारित कर पाएगा या नहीं इसे लेकर कई बड़े सवाल उठाए जा रहे हैं. शनिवार को कार्यक्रम के होस्ट टीवी पर नहीं दिखे थे.

प्रधानमंत्री ऋषि सुनक

इमेज स्रोत, Reuters

ब्रितानी सरकार ने क्या कहा?

शनिवार शाम प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने एक बयान जारी किया जिसमें उन्होंने लिनेकर को एक 'प्रतिभाशाली प्रेज़ेन्टर' कहा. हालांकि उन्होंने कहा कि सरकार का इस विवाद से कोई नाता नहीं है.

उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री के तौर पर मुझे वो करना है जो मुझे सही लगता है. मैं इस बात का सम्मान करता हूं कि सभी इससे सहमत होंगे. यही कारण है कि मैं 'स्टॉप द बोट्स' मुहिम को लेकर स्पष्ट रहा हूं."

उन्होंने कहा, "गैरी लिनेकर एक महान फुटबॉलर और एक शानदार प्रेज़ेन्टर हैं. मुझे उम्मीद है कि गैरी लिनेकर और बीबीसी के बीच मौजूदा स्थिति को समय रहते हल किया जा सकता है, लेकिन यह बीबीसी का मामला है, सरकार का इसमें कुछ लेना-देना नहीं है."

कल्चर, मीडिया और खेल विभाग के प्रवक्ता ने कहा, "बीबीसी के लिए व्यक्तिगत मामले अहम हैं, लेकिन डाउनिंग स्ट्रीट और कई वरिष्ठ मंत्रियों ने हाल के दिनों में मुखर होकर आलोचना की है."

गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन और कल्चर मंत्री लुसी फ्रेज़र, दोनों ने सरकार की भाषा और नाज़ी जर्मनी के बीच तुलना करने के लिए प्रेज़ेन्टर पर हमला बोला है.

सुएला ब्रेवरमैन ने कहा कि लिनेकर ने जो तुलना की वो ग़लत और किसी काम की नहीं थी.

ब्रिटेन में विपक्ष के नेता सर कीयर स्टामर

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, ब्रिटेन में विपक्ष के नेता सर कीयर स्टामर

लिनेकर के समर्थन में आया विपक्ष

वहीं लेबर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने लिनेकर के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है, जिसमें विपक्ष के नेता सर कीयर स्टामर भी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि सरकार को लिनेकर के बारे में कानाफूसी करने के बजाय शरण देने की नीति को ठीक करने पर ध्यान देना चाहिए.

उन्होंने बीबीसी के वरिष्ठ लोगों पर मंत्रियों के दबाव के आगे झुकने का आरोप भी लगाया है.

लिबरल डेमोक्रेट नेता सर एड डेवी ने बीबीसी के चेयरमैन रिचर्ड शॉर्प को पीछे हटने को कहा है क्योंकि इस लड़ाई ने बीबीसी के शीर्ष पर विफलताओं को सामने लाने का काम किया है.

उन्होंने कहा, "हमें बीबीसी में ऐसे नेतृत्व की ज़रूरत है जो हमारे गर्व करने वाले ब्रिटिश मूल्यों को बनाए रखे और आज की लगातार अशांत राजनीति और रूढ़िवादियों की धमकाने की राजनीति का सामना कर सके."

इससे पहले शनिवार को साल 2000 से 2004 के बीच महानिदेशक के रूप में काम करने वाले ग्रेग डाइक ने कहा, "बीबीसी ने इस विवाद से निपटने के लिए अपनी खुद की विश्वसनीयता कम कर दी है."

बीबीसी के चेयरमैन रिचर्ड शार्प

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, बीबीसी के चेयरमैन रिचर्ड शार्प

बीबीसी पर आरोप

उन्होंने शार्प को लेकर चल रहे विवाद की तरफ इशारा किया और कहा कि लिनेकर के इस काम से यह धारणा बन सकती है कि "बीबीसी सरकार के दबाव के आगे झुक गया है."

बीबीसी के चेयरमैन के रूप में शार्प की नियुक्ति की जांच चल रही है कि क्या उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के लिए आठ लाख पाउंड के कर्ज़ गारंटी में किसी तरह की भूमिका अदा की, हालांकि उन्होंने जॉनसन के लिए कर्ज़ की व्यवस्था में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है.

बीबीसी के चेयरमैन के रूप में शार्प की भूमिका में हितों के किसी भी संभावित टकराव पर बीबीसी अपनी आंतरिक समीक्षा भी कर रहा है.

बीबीसी टीवी न्यूज़ के पूर्व प्रमुख और खेल निदेशक रोजर मोसी ने भी शार्प को जाने के लिए कहा है. उन्होंने कहा कि चेयरमैन ने बीबीसी की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाया है.

हालांकि अन्य लोग बीबीसी के कामों का समर्थन कर रहे हैं. बीबीसी में संपादकीय नीति के पूर्व नियंत्रक रिचर्ड आयरे ने शुक्रवार को कहा कि बीबीसी के पास लिनेकर के खिलाफ कार्रवाई करने के अलावा कोई रास्ता नहीं था.

उन्होंने कहा कि बीबीसी के महानिदेशक टिम डेवी ने लिनेकर के साथ एक समझौते पर पहुंचने के लिए कोशिश की लेकिन सफलता नहीं मिली.

आयरे ने कहा कि लिनेकर को बर्खास्त नहीं किया गया था, लेकिन उन्हें कम से कम अस्थायी रूप से हटा दिया गया था जिसके चलते लोग अब बीबीसी की यह कहकर आलोचना कर रहे हैं कि वह सरकार के इशारे पर काम कर रहा है.

लिनेकर ने 1999 से मैच ऑफ द डे की मेज़बानी की है. साल 2020-21 में उन्हें बीबीसी ने करीब 1.5 मिलियन पाउंड का भुगतान किया था. वे बीबीसी से फ्रीलांसर की तरह जुड़े हुए हैं.

बीबीसी के कर्मचारियों से राजनीतिक मामलों में निष्पक्ष रहने और सख्ती से सोशल मीडिया दिशानिर्देशों का पालन करने की उम्मीद की जाती है, लेकिन इस बात पर चर्चा होती है कि खबरों के बाहर ये दिशानिर्देश कर्मचारियों पर कैसे लागू होंगे.

बीबीसी न्यूज़ को बताया गया कि लिनेकर पर अपने फैसले के बारे में मैच ऑफ द डे प्रोडक्शन टीम को पहले से नहीं बताया गया था.

लिनेकर ने अभी तक हाल की घटनाओं पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी नहीं की है और शनिवार को लेस्टर सिटी होम गेम के दौरान उन्हें देखा गया था.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)