इमरान ख़ान को किस मामले में गिरफ़्तार करने लाहौर पहुंची पाकिस्तान की पुलिस

इमेज स्रोत, SHAHZAIB AKBER/EPA-EFE/REX/Shutterstock
पाकिस्तान की इस्लामाबाद पुलिस रविवार पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को उनके लाहौर स्थित जमन पार्क निवास से गिरफ़्तार करने में नाकामयाब रही.
इस्लामाबाद पुलिस ने जमन पार्क पहुंचने से पहले ट्विटर पर सूचना दी थी कि इमरान ख़ान के ख़िलाफ़ ग़ैर-ज़मानती वारंट जारी होने के बाद उनकी टीम उन्हें पकड़ने के लिए लाहौर पहुंची है.
इसके साथ ही इस्लामाबाद पुलिस ने लिखा था कि उनके काम में दखल देने वालों के ख़िलाफ़ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
लेकिन इन तमाम कोशिशों के बाद इस्लामाबाद पुलिस इमरान ख़ान को पकड़ने में सफल नहीं हुई और उसे इमरान ख़ान समर्थकों की ओर से विरोध का सामना करना पड़ा.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त
पाकिस्तान के प्रतिष्ठित अख़बार डॉन के मुताबिक़, इमरान ख़ान के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ पीटीआई नेता शिबिल फ़राज़ ने पुलिस को बताया था कि इमरान ख़ान जमन पार्क में मौजूद नहीं हैं.
लेकिन इसके कुछ घंटों बाद इमरान ख़ान ने जमन पार्क से ही अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित किया.
इमरान ख़ान के इस तरह पुलिस के जाने के कुछ घंटों बाद ही जमन पार्क में नज़र आने से पुलिस की कोशिशों पर सवाल खड़े हुए हैं.

इमेज स्रोत, RAHAT DAR/EPA-EFE/REX/Shutterstock
इस्लामाबाद पुलिस ने भी कहा है कि सीनेटर फ़राज़ को ग़लत जानकारी देने के मामले में क़ानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है.
इसी बीच पीटीआई नेता फ़वाद चौधरी ने कहा है कि 'इमरान ख़ान को 9 मार्च तक इस्लामाबाद हाई कोर्ट से गिरफ़्तारी से राहत मिली हुई है. ऐसे में पुलिस अगर उन्हें गिरफ़्तार करती है तो ये अदालत की अवमानना होगी.'
चौधरी ने पार्टी प्रवक्ताओं से बात करते हुए कहा है कि संघीय सरकार इमरान ख़ान को गिरफ़्तार करके देश में अशांति फैलाना चाहती है.
उन्होंने कहा, "पार्टी कार्यकर्ताओं को क़ानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए और शांति बनाए रखनी चाहिए."

इमेज स्रोत, ANI
इमरान ख़ान ने दिया सुरक्षा का हवाला
इमरान ख़ान ने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं से बात करते हुए कहा है कि उनके वकील पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर ये समझाने की कोशिश करेंगे कि उनकी ज़िंदगी पर ख़तरा मंडरा रहा है.
इमरान ख़ान ने कहा, "मुझे अदालतों में आतंकवाद जैसे हास्यास्पद मामलों में पेश होने के लिए बुलाया जा रहा है. ये मामला पाकिस्तान के चुनाव आयोग के दफ़्तर के बाहर हुए विरोध प्रदर्शन को लेकर दर्ज किया गया है जबकि मैं उस समय अपने घर पर मौजूद था."
इसके साथ ही उन्होंने बताया कि उनके ख़िलाफ़ अब तक 74 मामले दर्ज किए गए हैं.
इमरान ख़ान ने ये भी बताया है कि वह लाहौर हाईकोर्ट और इस्लामाबाद की अदालतों में पेश हुए हैं, लेकिन इस दौरान उन्हें किसी तरह की सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई गई.

इमेज स्रोत, ANI
टीवी पर प्रसारित हो तोशाख़ाना मामले की जांच
इमरान ख़ान ने अपने संबोधन के दौरान उस तोशाख़ाना मामले का ज़िक्र किया जो उनके ख़िलाफ़ लगाए गए आतंकवाद वाले मामले के केंद्र में है.
इमरान ख़ान ने कहा, "अगर तोशाख़ाना मामले की कार्यवाही टीवी पर प्रसारित हो तो लोगों को पता चलेगा कि नवाज़ शरीफ़ और आसिफ़ अली ज़रदारी असली डकैत हैं और अगर किसी ने क़ानून का उल्लंघन नहीं किया होगा तो वो इमरान ख़ान होगा."
इसी दौरान उन्होंने कहा कि जब तक पीएम शहबाज़ शरीफ़, गृह मंत्री राना सनाउल्लाह ख़ान और आईएसआई चीफ़ सत्ता में हैं तब तक उनकी जान को जोख़िम बना रहेगा.
वहीं, राना सनाउल्लाह ख़ान ने कहा कि उनकी सरकार की इमरान ख़ान को गिरफ़्तार करने में दिलचस्पी नहीं है.
डॉन के मुताबिक़, सनाउल्लाह ख़ान ने कहा, "अगर हम इमरान ख़ान को गिरफ़्तार करना चाहते तो हमने 28 फ़रवरी को ही उन्हें गिरफ़्तार कर लिया होता जब वह ज़मानत लेने के लिए इस्लामाबाद आए थे. हम चाहें तो अभी भी उन्हें लाहौर से गिरफ़्तार कर सकते हैं."
इसके बाद उन्होंने बताया कि पुलिस कोर्ट के आदेशों का पालन करने के लिए लाहौर पहुंची थी और वह आगे बताएगी कि इमरान ख़ान ने इस प्रक्रिया में उनका सहयोग नहीं किया.
यहां ये जानना ज़रूरी है कि तोशाख़ाना मामला क्या है जिसकी वजह से इमरान ख़ान के ख़िलाफ़ आतंकवाद जैसी संगीन धाराओं समेत कुल 74 मुकद्दमे दर्ज किए गए हैं.

इमेज स्रोत, GOVERNMENT OF PAKISTAN
क्या है तोशाख़ाना मामला
तोशाखाना से आशय पाकिस्तान के उस सरकारी विभाग से है जो प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति समेत शीर्ष पदों पर आसीन हस्तियों को विदेशी दौरों पर मिलने वाले तोहफ़ों का रिकॉर्ड रखता है.
तोशाखाना में रखी गई चीज़ों को स्मृति चिह्न की तरह देखा जाता है. यहां रखी हुई चीज़ों को कैबिनेट की मंज़ूरी के बाद ही बेचा जा सकता है.
अगर ऐसे उपहारों की क़ीमत 30 हज़ार रुपये से कम है तो उसे व्यक्ति मुफ़्त में अपने पास रख सकता है.
वहीं, अगर गिफ़्ट की क़ीमत 30 हजार रुपये से ज़्यादा है तो उस क़ीमत का 50 प्रतिशत जमा करके उसे ख़रीदा जा सकता है. साल 2020 से पहले सामान की असल क़ीमत का सिर्फ़ 20 प्रतिशत ही जमा करना पड़ता था.
इन तोहफों में आमतौर पर महंगी घड़ियां, सोने और हीरे के गहने, क़ीमती सजावट के सामान, स्मृति चिह्न, हीरे जड़ी कलम, क्रॉकरी और कालीन जैसी चीज़ें शामिल होती हैं.
इमरान ख़ान पर क्या आरोप लगे
इमरान ख़ान के सत्ता से बाहर जाने के बाद उनके ख़िलाफ़ प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए मिले तोहफ़ों की जानकारी नहीं देने का आरोप लगाया गया था.
शहबाज़ शरीफ़ की पार्टी मुस्लिम लीग (नवाज़) के नेता बैरिस्टर मोहसिन नवाज़ रांझा ने पाकिस्तानी संविधान के अनुच्छेद 63 (2) के तहत पाक नेशनल असेंबली के स्पीकर के समक्ष इस मामले को उठाया था.
उन्होंने कहा था कि ''इमरान ख़ान ने प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए क़ीमती तोहफे लिए थे. इमरान ख़ान ने चुनाव आयोग को दी गई अपनी संपत्ति की घोषणा में उनका ब्योरा नहीं दिया था. इस तरह से ये 'दुर्भावनापूर्ण' है और इसलिए उन्हें संविधान के तहत चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए.''
इसके बाद पाकिस्तान नेशनल असेंबली के स्पीकर राजा परवेज अशरफ़ ने बीते चार अगस्त को चुनाव आयोग से इस मामले पर विचार करने को कहा. और इसके बाद पाकिस्तानी चुनाव आयोग ने इस मामले में इमरान ख़ान समेत सभी पार्टियों से जवाब मांगा था.
ये भी पढ़ें - मोहम्मद अली जिन्ना के जीवन के आख़िरी 60 दिन

इमेज स्रोत, Getty Images
चुनाव आयोग को इमरान ख़ान ने क्या बताया?
इमरान ख़ान ने इस मामले में चुनाव आयोग को दिए अपने लिखित जवाब में बताया है कि 1 अगस्त 2018 से 31 दिसंबर 2021 तक उन्हें और उनकी पत्नी को 58 तोहफ़े मिले थे.
लिखित जवाब में कहा गया था कि इन तोहफ़ों में से ज़्यादातर फूलदान, मेज़पोश, सजावटी सामान, कालीन, पर्स, इत्र, माला, फ़्रेम, पेन होल्डर आदि थे. इसके अलावा इसमें घड़ियां, पेन, कफ़लिंक, अंगूठियां और कंगन भी थे.
इमरान ख़ान ने बताया था कि इन सभी तोहफ़ों में तीस हज़ार रुपये से ज़्यादा की क़ीमत के सिर्फ़ 14 तोहफ़े थे. इन तोहफ़ों को उन्होंने प्रक्रिया के अनुसार पैसे देकर तोशाखाना से ख़रीदा था.
अपने जवाब में इमरान ख़ान ने अपने कार्यकाल में पैसे देकर ख़रीदे हुए तोहफे बेचने की बात स्वीकार की थी.
इसमें एक घड़ी, कफ़लिंक, एक पेन, एक अंगूठी और चार रोलेक्स घड़ियां शामिल थीं.
उन पर आरोप है कि उन्होंने तोशाखाना के कुछ तोहफ़ों को सिर्फ़ 20 प्रतिशत और कुछ को 50 प्रतिशत भुगतान कर ख़रीदा था और महंगे दाम पर उन्हें बेच दिया था.

इमेज स्रोत, Getty Images
इमरान ख़ान ने कौन से तोहफ़े ख़रीदे
पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनने के दो महीने के अंदर ही इमरान ख़ान ने तोशाखाना में दो करोड़ रुपये से ज़्यादा जमा कर कई तोहफ़े ख़रीदे थे.
इनमें क़रीब 85 लाख रुपये क़ीमत की एक ग्राफ घड़ी, क़रीब 60 लाख रुपये के कफ़लिंक, 87 लाख रुपये का पेन और अंगूठी जैसी चीज़ें शामिल थीं.
इसी तरह इमरान ख़ान ने 38 लाख रुपये क़ीमत की रोलेक्स घड़ी 7.5 लाख रुपये में और 15 लाख क़ीमत की रोलेक्स घड़ी को सिर्फ 2.5 लाख में तोशाखाना से ख़रीदा था.
एक और मौके पर इमरान ख़ान ने 49 लाख क़ीमत के कफ़लिंक और घड़ी से भरा एक बॉक्स आधे दाम पर लिया.
दस्तावेज़ों के अनुसार, कथित रूप से बेची गई घड़ी भी चुनाव आयोग की लिस्ट में दर्ज नहीं थी. ये घड़ी इमरान ख़ान की पत्नी बुशरा बीबी को उनकी सऊदी अरब की अपनी पहली यात्रा के दौरान गिफ़्ट के रूप में मिली थी.
इसकी क़ीमत 85 करोड़ रुपये बताई जाती है. इमरान ख़ान ने 20 प्रतिशत भुगतान कर इस घड़ी को ख़रीद लिया था.
इस मामले में चुनाव आयोग ने इमरान ख़ान के ख़िलाफ़ कार्रवाई करते हुए उन्हें पांच सालों तक चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर दिया था.
इसके बाद पाकिस्तानी चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर पीटीआई कार्यकर्ताओं की ओर से विरोध प्रदर्शन किया गया. इस मामले में ही उनके ख़िलाफ़ आतंकवाद जैसी संगीन धाराओं में मुक़दमा दर्ज किया गया है.
इस मामले में कोर्ट के सामने पेश नहीं हो पाने की वजह से ही उनके ख़िलाफ़ ग़ैर-जमानती वारंट जारी किया गया था जिसकी वजह से इस्लामाबाद पुलिस उन्हें गिरफ़्तार करने लाहौर पहुंची थी.
लेकिन इमरान ख़ान से पहले पाकिस्तानी राजनीति की बड़ी-बड़ी हस्तियों पर इस तरह के आरोप लगते रहे हैं.

इमेज स्रोत, GOVERNMENT OF PAKISTAN
कई पूर्व शासकों पर चल रहा है मुक़दमा
तोशाखाने से अवैध रूप से गिफ़्ट लेने के लिए न सिर्फ़ इमरान ख़ान बल्कि पाकिस्तान के दो पूर्व प्रधानमंत्रियों और एक पूर्व राष्ट्रपति को आज की तारीख़ में मुक़दमे का सामना करना पड़ा रहा है.
इसमें पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़, यूसुफ़ रजा गिलानी और पूर्व राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी शामिल हैं.
जब यूसुफ़ रजा गिलानी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री थे तो उन्होंने तोशाखाना के नियमों में ढील दी, जिसके बाद आसिफ़ अली ज़रदारी और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने कारें ख़रीदीं.
इस्लामाबाद के अकाउंटेबिलिटी कोर्ट ने तोशाखाने से अवैध तरीके से उपहार में मिली महंगी गाड़ियों को ख़रीदने के आरोप में नवाज़ शरीफ़ के ख़िलाफ़ गैर-ज़मानती वारंट जारी किया हुआ है.
आसिफ़ अली ज़रदारी ने राष्ट्रपति रहते हुए तोशाखाने से बख्तरबंद बीएमडब्ल्यू 750 एलआई, लेक्सस जीप और एक बीएमडब्ल्यू 760 एलआई खरीदी थी. उन पर आरोप है कि उन्होंने इन तोहफ़ों का भुगतान फ़र्जी बैंक खातों के ज़रिए किया था और इसमें मनी लॉन्ड्रिंग का पैसा डाला गया था.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)
















