जापान के विदेश मंत्री जी-20 की बैठक में भारत क्यों नहीं आए

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इमेज कैप्शन, जापान के विदेश मंत्री योशिम्सा हायाशी
    • Author, रजनीश कुमार
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

जापान के विदेश मंत्री योशिम्सा हायाशी जी-20 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने भारत नहीं आए.

जापान के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि नई दिल्ली में एक से तीन मार्च तक आयोजित इस बैठक में जूनियर मंत्री केंजी यामदा शरीक होंगे. केंजी जापान के विदेश राज्य मंत्री हैं.

जापान ने अपने बयान में कहा है कि नई दिल्ली में आयोजित जी-20 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में वर्तमान अंतरराष्ट्रीय हालात, बहुध्रुवीय अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा के साथ विकास में आपसी सहयोग पर बात होनी है.

जापान के पास अभी जी-7 की अध्यक्षता है और भारत के पास जी-20 की. जापान ने अपने विदेश मंत्री के बदले जूनियर मंत्री को भारत क्यों भेजा? यह सवाल कई तरह से उठाया जा रहा है.

बात केवल जापान की नहीं है. दक्षिण कोरिया ने 24 फ़रवरी को ही घोषणा कर दी थी कि उसके उप-विदेश मंत्री इस बैठक में जाएंगे. यानी दक्षिण कोरिया और जापान दोनों ने अपने विदेश मंत्री के बजाय जूनियर मंत्री को भारत भेजा.

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क्या भारत के लिए यह झटका है?

जापानी विदेश मंत्री के भारत नहीं आने की ख़बर की पुष्टि नहीं हुई तभी 28 फ़रवरी को वॉशिंगटन स्थित हडसन इंस्टिट्यूट में एक जापानी रिसर्चर ने ट्वीट कर कहा था, ''अगर जापानी विदेश मंत्री हायाशी ने जी-20 के विदेश मंत्रियों की बैठक में नई दिल्ली जाने की योजना को रद्द किया तो यह भारत के लिए बहुत परेशान करने वाला होगा. इसका असर बाद में ज़रूर होगा. जापानी विदेश मंत्री को भारत ज़रूर जाना चाहिए.''

द इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट फ़ॉर स्ट्रैटिजिक स्टडीज़ में जापान की रिसर्चर युका सी कोशिनो ने लिखा है, ''जापान ने अपने विदेश मंत्री को भारत में आयोजित जी-20 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में नहीं भेजने का फ़ैसला अगर औपचारिक रूप से किया है तो यह हैरान करने वाला है. भारत के सीनियर अधिकारी इस फ़ैसले को इसी रूप में देख रहे हैं. जापानी पीएम भारत को लेकर प्रतिबद्धता जताते रहे हैं जबकि यह रुख़ बिल्कुल उलट है.''

जापान का यह रुख़ चौंकाने वाला है. अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने 24 फ़रवरी को ही घोषणा कर दी थी कि विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन जी-20 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में नई दिल्ली जाएंगे और तीन मार्च को क्वॉड देशों के विदेश मंत्रियों के साथ बैठक करेंगे.

क्वॉड गुट में अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत हैं. अभी तक स्पष्ट नहीं है कि जापानी विदेश मंत्रियों की ग़ैरमौजूदगी में क्वॉड के विदेश मंत्रियों की बैठक होगी या नहीं या फिर इसमें भी जापान के जूनियर मंत्री ही शामिल होंगे.

जापान के विदेश मंत्री के नहीं आने के सवाल पर भारत के विदेश सचिव विनय मोहन क्वात्रा ने बुधवार को कहा, ''भारत और जापान के बीच शानदार सहयोग है. विदेश मंत्री हायाशी घरेलू व्यस्तता की वजह से भारत नहीं आ सके.''

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रिश्ते में जटिलता

भारत और जापान को क़रीबी सहयोगी के रूप में देखा जाता है लेकिन यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद से दोनों देशों के संबंधों में जटिलता आई है.

जापान के प्रधानमंत्री फ़ुमिओ किशिदा ख़ुद यूक्रेन पर रूसी हमले को लेकर सख़्ती से पेश आ रहे हैं. रूस के ख़िलाफ़ पश्चिम के प्रतिबंध में जापान और दक्षिण कोरिया भी शामिल हैं. पिछले साल जब जापानी पीएम भारत के दौरे पर आए थे तब भी उन्होंने रूस की आलोचना की थी.

जी-20 दुनिया की 20 बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों का समूह है. 2023 में जी-20 की अध्यक्षता भारत के पास है. मोदी सरकार जी-20 की अध्यक्षता को बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही है. ऐसे में जापान के विदेश मंत्री के नहीं आने को झटके के तौर पर देखा जा रहा है.

कहा जाता है कि एशिया में चीन की बढ़ती आक्रामकता के कारण जापान भारत से रक्षा संबंध गहरा करना चाहता है. लेकिन भारत की रूस से दोस्ती को लेकर जापान असहज रहा है.

पिछले साल सितंबर में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे की अंत्येष्टि में शामिल होने के लिए टोक्यो गए थे. इस दौरे में उन्होंने जापान के वर्तमान प्रधानमंत्री से भी मुलाक़ात की थी.

इसी साल जनवरी में जापान और भारत के बीच पहली एयर ड्रिल्स हुई थी. इसके अलावा किशिदा सरकार ने जापान में मई महीने में होने वाले जी-7 समिट में भारत और ऑस्ट्रेलिया को भी आमंत्रित किया है.

ये दोनों देश जी-7 के सदस्य नहीं हैं लेकिन जापान ने अतिथि के तौर पर बुलाया है. जापान के सरकारी प्रसारक एनएचके के मुताबिक़ जी-7 में यूक्रेन संकट, परमाणु निरस्त्रीकरण और जलवायु परिवर्तन पर बात होनी है.

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जापान की सत्ताधारी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद गोशी होसोनो ने विदेश मंत्री के भारत नहीं जाने की आलोचना की है.

उन्होंने ट्वीट कर कहा है, ''विदेश मंत्री ने भारत में जी-20 की बैठक में नहीं जाने का फ़ैसला किया है. जापान जी-7 का अध्यक्ष है और उसने जी-20 में बड़े विकासशील देशों के सामने 'नियम आधारित दुनिया' की वकालत करने का मौक़ा खो दिया है. जब आपके पास ज़्यादा अहम काम करने का मौक़ा है, तब एक कमिटी की बैठक में शामिल होने के लिए जी-20 की बैठक में नहीं गए. मुझे लगता है कि मंत्री को फिर से सोचना चाहिए.''

जापान की क्योडो न्यूज़ एजेंसी ने एक भारतीय अधिकारी के हवाले से बताया है कि जापान के विदेश मंत्री के भारत नहीं आने का असर नकारात्मक पड़ेगा.

जी-20 की बैठक में शामिल होने रूस के विदेश मंत्री सेर्गेई लावरोफ़ नई दिल्ली पहुँच गए हैं. चीन के विदेश मंत्री क़िन गांग, अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन, ब्रिटेन के विदेश मंत्री जेम्स क्लेवेरी और तुर्की के विदेश मंत्री मेव्लुत चोवाशुग्लू भी इस बैठक में शामिल हो रहे हैं.

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दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री क्यों नहीं आए?

दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री का भी जी-20 की बैठक में नई दिल्ली नहीं आना चौंकाता है. दक्षिण कोरिया का भारतीय बाज़ार के इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों में दबदबा है. दक्षिण कोरिया भारत में बड़े निवेशक के रूप में भी देखा जाता है.

सोल के अख़बार खिउंगहियांग शिनमुन ने लिखा है कि दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री पार्क जिन को उम्मीद थी कि वह जी-20 की बैठक से अलग जापान के विदेश मंत्री से मुलाक़ात करेंगे. इससे पहले पार्क जिन ने जापानी विदेश मंत्री से म्यूनिख में मुलाक़ात की थी. दक्षिण कोरिया जापान से कई मोर्चों पर मतभेद सुलझाने की कोशिश कर रहा है. अख़बार ने लिखा है कि दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्री को पता चला कि जापानी विदेश मंत्री हायाशी नई दिल्ली नहीं आ रहे हैं तो उन्होंने भी दौरा रद्द कर दिया.

इससे पहले पिछले हफ़्ते शनिवार को बेंगलुरु में जी-20 देशों के वित्त मंत्रियों की बैठक हुई थी. इस बैठक का अंत साझे बयान से होना था लेकिन बिना बयान जारी हुए ही बैठक ख़त्म करनी पड़ी थी.

भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि बयान को लेकर रूस और चीन की असहमति थी. बयान के टेक्स्ट में यूक्रेन में युद्ध की निंदा की गई थी.

भारत और जापान

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साझा बयान जारी नहीं हुआ लेकिन भारत ने अध्यक्ष होने के नाते बैठक का सारांश जारी किया था. लेकिन इस सारांश के दो पैरे से रूस और चीन सहमत नहीं थे. साझा बयान जारी नहीं होना बताता है कि यूक्रेन पर हमले के कारण जी-20 में स्पष्ट विभाजन दिख रहा है.

विपक्षी नेता और जाने-माने पूर्व डिप्लोमैट शशि थरूर ने द वायर को दिए इंटरव्यू में कहा है कि भारत ने रूस को संतुष्ट करने के लिए अपने ही नेतृत्व को कमज़ोर कर लिया है. शशि थरूर ने कहा, ''जी-20 के अध्यक्ष होने के नाते सदस्य देशों के वित्त मंत्रियों की बैठक के बाद साझा बयान जारी नहीं होना भारत की नाकामी है. यह भारतीय डिप्लोमैसी के लिए गहरा झटका है.''

सुरेंद्र कुमार कई देशों में भारत के राजदूत रहे हैं. वह शशि थरूर की इस बात से सहमत नहीं हैं कि साझा बयान जारी नहीं होना भारत की नाकामी है.

सुरेंद्र कुमार ने बीबीसी से कहा, ''जी-20 के तीन महत्वपूर्ण देश अमेरिका, चीन और रूस सेम चैप्टर पर नहीं हैं. भारत उस हैसियत में नहीं है कि तीनों का मतभेद ख़त्म कर दे. जी-20 की अध्यक्षता बारी-बारी से सभी सदस्यों को मिलती है. अध्यक्षता मिलने का मतलब यह नहीं है कि सारे सदस्य देश भारत की बात सुन लेंगे.''

फुमियो किशिदा

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सुरेंद्र कुमार कहते हैं, ''अगर अभी जी-20 की अध्यक्षता चीन या अमेरिका के पास भी होती तब भी साझे बयान पर सहमति बनाना आसान नहीं था. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन अचानक से यूक्रेन पहुँचे थे. रूस बाइडन के यूक्रेन जाने से बहुत ख़फ़ा है. भारत न तो बाइडन को यूक्रेन जाने से रोक सकता है और न ही रूस को ख़फ़ा होने से रोक सकता है. ज़ाहिर है, इसका असर जी-20 में भी दिख रहा है.''

जापान को चीन के मामले में भारत के रुख़ पर शक रहा है. जापान के मीडिया में अक्सर यह बात कही जाती है कि भारत चीन के ख़िलाफ़ खुलकर नहीं आएगा. जापान के विदेश मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी ने 2017 में निक्केई एशियन रिव्यू से कहा था, ''इस चिंता से इनकार नहीं किया जा सकता है कि जब जापान मज़बूती से चीन के ख़िलाफ़ आएगा तो भारत अपना क़दम पीछे खींच लेगा.''

निक्केई एशियन रिव्यू ने यह भी लिखा था कि भारत अपने पूर्वोत्तर के राज्यों में जापान की मदद से कई परियोजनाओं को ज़मीन पर उतारना चाहता है. निक्केई ने लिखा था, ''हिन्द महासागर में चीन के विस्तार के मद्देनज़र यह काफ़ी अहम है. भारत और जापान इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को समुद्र में भी उतारने की तैयारी में हैं. दोनों देशों के बीच श्रीलंका में लिक्विफाइड प्राकृतिक गैस इम्पोर्ट टर्मिनल बनाने की भी तैयारी कर रहे हैं. श्रीलंका में चीन पहले से ही कई परियोजनाओं पर काम कर रहा है.''

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