पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने क्यों कहा- और बिगड़ सकती है मुल्क की हालत- बीबीसी एक्सक्लूसिव

- Author, फ़रहत जावेद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, इस्लामाबाद
पाकिस्तान के राष्ट्रपति डॉक्टर आरिफ़ अल्वी ने देश की अर्थव्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई है और कहा है कि अगर राजनीतिक दलों समेत सभी पक्षों ने मतभेदों को नजरअंदाज़ कर चर्चा शुरू नहीं किया, तो आर्थिक स्थिति और बिगड़ सकती है.
उन्होंने कहा कि देश में राजनीतिक तापमान को कम करना बहुत ज़रूरी है. राष्ट्रपति अल्वी ने सभी पक्षों के बीच संवाद की पेशकश भी की.
बीबीसी उर्दू को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने कहा कि मौजूदा गठबंधन सरकार पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के साथ बातचीत को लेकर टालमटोल कर रही है.
उनके मुताबिक़ पिछले एक महीने के दौरान तहरीक-ए-इंसाफ़ और गठबंधन सरकार के बीच कोई संवाद नहीं हुआ है और बातचीत के उनके अनुरोध का कोई जवाब नहीं मिला है.
राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने बीबीसी को ये भी बताया कि इमरान ख़ान ने वर्तमान सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के नाम पर संतोष व्यक्त किया था. राष्ट्रपति ने सेनाध्यक्ष की नियुक्ति से पहले इमरान ख़ान से सलाह-मशविरा किया था.
बातचीत के दौरान राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने सत्ताधारी गठबंधन और पीटीआई के बीच बातचीत की पेशकश की.
उन्होंने कहा- मैं इमरान ख़ान की बात नहीं कर रहा हूँ, मैं कह रहा हूँ कि कम से कम राजनीतिक दल आपस में बातचीत कर लें, उसके बाद पार्टियों के बड़े लोग भी मिल सकते हैं.
इमरान ख़ान और जनरल बाजवा

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इमरान ख़ान और पाकिस्तान के पूर्व सेना प्रमुख जनरल बाजवा के बीच रिश्तों पर भी राष्ट्रपति अल्वी ने खुलकर बात की.
इंटरव्यू के दौरान उन्होंने स्वीकार किया कि दोनों के बीच मतभेद थे. हालाँकि उन्होंने इसके लिए सोशल मीडिया को भी ज़िम्मेदार ठहराया.
उन्होंने कहा कि वे इमरान ख़ान और मौजूदा सरकार और उनकी टीमों के बीच बातचीत के पक्षधर थे और उन्होंने हमेशा इस भूमिका को खुलकर निभाया.
आरिफ़ अल्वी ने कहा कि बातचीत को लेकर मौजूदा सरकार का रवैया टालमटोल वाला रहा है.
उन्होंने कहा, "जब भी मेरी बातचीत हुई है, उन्होंने (सरकार ने) समर्थन किया है कि बातचीत होनी चाहिए, लेकिन मुझे नतीजा नहीं दिख रहा है."
संसदीय चुनाव को लेकर राष्ट्रपति अल्वी ने कहा कि ये चुनाव का साल है, चुनाव होना चाहिए.
उन्होंने कहा कि चुनाव में अगर कुछ महीनों का अंतर आता है, तो उसे भी बातचीत के ज़रिए सुलझा लिया जाए ताकि अर्थव्यवस्था और जनता की भलाई के लिए काम किया जा सके.
राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने पूर्व सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के बीच मतभेदों के लिए 'सोशल मीडिया' को ज़िम्मेदार ठहराया.
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया को अनुचित महत्व देने के कारण ग़लतफ़हमियाँ पैदा हुईं और इस तरह सोशल मीडिया दोनों के बीच मतभेदों का एक मुख्य कारण था.
डॉक्टर आरिफ़ अल्वी ने कहा कि देश में निर्णय लेने वाली ताक़तें सोशल मीडिया को ठीक से 'हैंडल' नहीं कर पा रही हैं.
इमरान ख़ान की सरकार के अंत में उनके और पूर्व सेनाध्यक्ष कमर जावेद बाजवा के बीच कैसे रिश्ते रहे, इस सवाल पर राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने कहा- यह सब प्रेस में है, मेरे पास कोई विशिष्ट जानकारी नहीं है.
'ग़लतफ़हमियाँ'

उन्होंने कहा- मैं समझता हूँ कि कुछ ग़लतफ़हमियाँ थीं. जो पब्लिक में भी आ रही थी. मैं ग़लतफ़हमियों को दूर करने की कोशिश करता था. पाकिस्तान के राष्ट्रपति के रूप में, मेरी संवैधानिक ज़िम्मेदारी सबको एक साथ लाने की है.
यह पूछे जाने पर कि क्या इमरान खान और पूर्व सेना प्रमुख के बीच टकराव की मुख्य वजह डीजीआईएसआई की नियुक्ति है, राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने कहा कि वह किसी ख़ास व्यक्ति या घटना के बारे में बात नहीं करेंगे.
राष्ट्रपति की मध्यस्थता की कोशिश सफल क्यों नहीं हुई, इस पर डॉक्टर अल्वी ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि सभी पक्ष अड़ियल रवैया दिखा रहे थे और उनकी सलाह का पालन नहीं किया गया.
राष्ट्रपति आरिफ़ अल्वी को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान का क़रीबी सहयोगी माना जाता है.
इमरान ख़ान के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव पास हो जाने के बाद उन्होंने कई मौक़ों पर उनके प्रति अपनी नरमी ज़ाहिर की है और पिछले साल पंजाब प्रांत में राजनीतिक तनाव के दौरान भी उन्होंने इमरान ख़ान के पक्ष में क़दम उठाए थे.
जब नवंबर में नए सेना प्रमुख की नियुक्ति का मामला सामने आया, तो राष्ट्रपति आरिफ़ अल्वी इमरान ख़ान से सलाह-मशविरा करने के लिए लाहौर तक आ गए.
उस समय ये माना गया था कि राष्ट्रपति आरिफ़ अल्वी सेना प्रमुख की नियुक्ति में देरी करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
जब बीबीसी ने उनसे पूछा कि क्या इमरान ख़ान से सलाह लेने का उनका फ़ैसला सही था, तो उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के साथ प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ की मुलाक़ात का भी ज़िक्र किया और कहा कि संविधान उन्हें ऐसा करने की इजाज़त देता है.
पाकिस्तान के राष्ट्रपति से कहा कि उनका मानना है कि उनका फ़ैसला सही था और इसका मुख्य कारण लोगों के बीच इमरान ख़ान की लोकप्रियता है.
आरिफ़ अल्वी ने कहा- पाकिस्तान में सबसे लोकप्रिय नेता कौन है, यह देखने के लिए पिछले कुछ वर्षों के चुनावों को देखें. तो क्या आपको लगता है कि मुझे पाकिस्तान की सबसे लोकप्रिय पार्टी से सलाह नहीं लेनी चाहिए? क्या संविधान मुझे ऐसा करने से रोकता है? मैं किसी से भी सलाह लेने को तैयार हूँ.
उन्होंने कहा कि उनके फ़ैसले को लेकर सरकार से भी उन्हें बधाई संदेश मिले और जिस काम के लिए सरकार उन्हें ख़ुद बधाई दे रही थी, वो ग़लत फ़ैसला कैसे हो सकता है.
भ्रष्टाचार के आरोप

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बीबीसी से बात करते हुए राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने कहा कि भ्रष्टाचार के आरोपों के मामले में एक गैर-राजनीतिक, तटस्थ और अधिकार प्राप्त एजेंसी की ओर से जाँच होनी चाहिए.
उन्होंने कहा, "जहाँ तक भ्रष्टाचार का आरोप है, जाँच होनी चाहिए, लेकिन जाँच एजेंसियों का राजनीतिकरण किया गया है, जिसका मुझे खेद है."
इस सवाल पर कि इमरान ख़ान और उनकी पत्नी पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं, राष्ट्रपति आरिफ़ अल्वी ने कहा कि उन्हें लगता है कि जहाँ भी भ्रष्टाचार के आरोप हैं, ग़ैर-राजनीतिक जाँच कराने का क़ानून है और इसे इसी तरह किया जाना चाहिए.
आरिफ़ अल्वी ने कहा- ऐसा नहीं है कि अरबों रुपए की चोरी की राजनीतिक जाँच होती है और करोड़ों-लाखों रुपए की चोरी पकड़ी जाती है और किसी ग़रीब साइकिल चोर को जेल भेज दिया जाता है. मेरी राय है कि भ्रष्टाचार के सभी आरोपों की गैर-राजनीतिक जाँच सही क़दम है, लेकिन पाकिस्तान अभी तक उस स्थिति में नहीं पहुँचा है. अब हर चीज़ का राजनीतिकरण हो गया है.
आरिफ़ अल्वी ने पिछले कुछ समय से देश में चल रहे ऑडियो और वीडियो लीक जैसे घोटालों पर भी बात की. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर उन्होंने नेताओं और सरकार से कहा है कि ऐसा नहीं होना चाहिए.
उन्होंने कहा- मैं इस मुद्दे पर संसद में दो बार बोल चुका हूँ और मैंने कहा है कि यह नैतिकता के ख़िलाफ़ है. इस्लाम की दृष्टि से और सार्वजनिक मूल्यों की दृष्टि से भी निजी बातचीत का बाहर निकलना अस्वीकार्य है. यह केवल आतंकवाद या बहुत आपराधिक मामलों में ही हो सकता है.
डॉक्टर आरिफ़ अल्वी ने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर भी टिप्पणी की और कहा कि मौजूदा सरकार इस कठिन दौर में आर्थिक स्थिति के हिसाब से नीतियाँ बना रही है.
उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार देश को आर्थिक संकट से उबारने का प्रयास कर रही है.
उनका कहना है कि कोरोना वायरस की वैश्विक महामारी के बाद शुरू हुआ संकट यूक्रेन में युद्ध और पाकिस्तान की राजनीति में अस्थिरता से बढ़ा है, जबकि बाढ़ ने अर्थव्यवस्था को और ख़राब कर दिया है.
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