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ईरान में दो युवाओं को फांसी, अमेरिका समेत कई पश्चिमी देश कर रहे निंदा
- Author, एंतोइनेत रैडफ़ोर्ड & सारा फ़ॉलर
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
ईरान सरकार ने हाल ही में हुए सरकार विरोध प्रदर्शनों में शामिल रहे दो युवाओं को फांसी की सज़ा दी है. इनके ख़िलाफ़ ईरानी सुरक्षाबल के एक अधिकारी की हत्या करने का अभियोग था.
मोहम्मद महदी करीमी और सैयद मोहम्मद होसैनी नामक इन दो युवाओं ने अपनी सज़ा के ख़िलाफ़ कोर्ट में अपील दायर की थी.
इस याचिका में इन्होंने कहा था कि उन्हें प्रताड़ित करके उनसे गुनाह करने का कबूलनामा लिया गया है.
ईरान में विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से अब तक चार लोगों को फांसी की सज़ा दी जा चुकी है.
ब्रितानी विदेश मंत्री जेम्स क्लेवरली ने ईरानी सरकार के इस क़दम को 'घृणित' बताया है.
ईरान में कुछ महीने पहले मोरैलिटी पुलिस ने महसा अमीनी नामक एक महिला को कथित रूप से हिजाब नहीं पहनने की वजह से हिरासत में ले लिया था.
इसके बाद पुलिस हिरासत में ही उनकी मौत हो गयी.
इसने ईरान में व्यापक विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया जो अब तक पूरी तरह शांत नहीं हुए हैं.
क्या है पूरा मामला
'मोरैलिटी पुलिस' ईरान की पुलिस व्यवस्था का वो हिस्सा है जो इस्लामिक क़ानूनों और ड्रेस कोड को लागू करना सुनिश्चित करती थी.
ईरानी न्यायपालिका से जुड़ी ख़बरें देने वाली एजेंसी मिज़ान के मुताबिक़, ये दो शख़्स अर्ध-सैनिक बल के अधिकारी रुहोल्लाह अजामियां की हत्या के मामले में मुख्य अभियुक्त थे.
अभियोजकों का कहना है कि एक प्रदर्शनकारी की मौत के ग़म में शामिल कुछ लोगों ने अजामियां की हत्या कर दी थी.
इन लोगों को साल 2022 के दिसंबर महीने में पहली बार फांसी की सज़ा दी गयी थी जिसके बाद उन्होंने प्रताड़ना के आरोप लगाकर अपनी सज़ा के ख़िलाफ़ अपील की थी.
लेकिन ईरान की सर्वोच्च अदालत ने बीती तीन जनवरी को इस मामले में सुनवाई करते हुए इनकी सज़ा बरकरार रखी.
अमेरिका से लेकर ब्रिटेन तक निंदा
ईरान सरकार को अपने इस क़दम को लेकर पश्चिमी देशों की ओर से आलोचना का सामना करना पड़ रहा है. अमेरिका से लेकर ब्रिटेन और तमाम अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने इस घटना की निंदा की है.
ब्रितानी विदेश मंत्री जेम्स क्लेवरली ने ईरानी सरकार से आग्रह किया है कि वह अपने लोगों के ख़िलाफ़ हिंसा बंद करे. इसके साथ ही यूरोपीय संघ ने कहा है कि वह प्रदर्शनकारियों को फांसी की सज़ा दिए जाने को लेकर चकित थी.
वहीं, अमेरिका ने इन न्यायिक मामलों को दिखावटी क़रार देते हुए इनकी कड़ी निंदा की है.
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने ट्विटर पर लिखा है, "ईरानी सरकार फांसियों के ज़रिए विरोध प्रदर्शनों को कुचलना चाहती है. हम ईरानी सरकार के बर्बर दमन को लेकर उनकी जवाबदेही तय करने के लिए अपने साझेदारों के साथ काम करते रहेंगे."
ईरान में विरोध प्रदर्शन
मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी इस मामले को एक दिखावटी सुनवाई क़रार देते हुए इसकी निंदा की है.
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने ये भी कहा है कि ईरानी अथॉरिटीज़ कम से कम 26 अन्य लोगों के लिए मृत्यु दंड की मांग कर रही थीं.
22 वर्षीय महदी करीमी के परिवार वालों का कहना है कि बीते शनिवार उनके बेटे को मृत्युदंड दिए जाने से पहले उन्हें उससे मिलने तक नहीं दिया गया.
करीमी के परिवार ने अदालत से अपने बेटे की मृत्यु दंड की सज़ा माफ़ करने की गुहार लगाई थी.
मानवाधिकार एक्टिविस्ट न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक़, इन विरोध प्रदर्शनों में अब तक 516 लोग मारे गए हैं जिनमें 70 बच्चे शामिल हैं. इसके साथ ही 19262 लोग हिरासत में लिए गए हैं.
इस एजेंसी ने ये भी बताया है कि अब तक 68 सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई है.
विरोध प्रदर्शनों के बाद हिरासत में लिए जाने वाले कई लोगों को जबरन गायब करने के साथ-साथ अज्ञात स्थान पर हिरासत में रखे जाने, प्रताड़ित करने की ख़बरें भी आ रही हैं.
ईरान इन विरोध प्रदर्शन को दंगों की संज्ञा देते हुए विदेशी ताक़तों पर इन्हें भड़काने का आरोप लगाता है.
इस मामले में तीन अन्य लोगों को भी मौत की सज़ा दी गयी है. वहीं, 11 लोगों को क़ैद की सज़ा दी गयी है.
वहीं, इससे पहले दिसंबर में सुरक्षा कर्मियों पर हमले के मामले में दो युवाओं को मृत्युदंड दिया गया था.
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