आपका बच्चा असाधारण प्रतिभा का धनी है, इसका पता कैसे लगाएं

निकोल

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    • Author, ब्रूना एल्विस
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़ ब्राज़ील, साओ पाओलो से

आपने लोगों को यह कहते हुए सुना होगा कि यह बच्चा ईश्वर की देन है, असाधारण है ये बच्चा. किन परिस्थितियों में हम ऐसा कहते हैं, इसको लेकर न्यूरो साइंटिस्ट और न्यूरो साइकोलॉजिस्टों का दावा है कि जिन बच्चों को आईक्यू लेवल औसत से बहुत बेहतर हो, उन्हें ही ऐसा माना जा सकता है.

लेकिन दूसरी तरफ़ शिक्षकों और खेल कोचों के मुताबिक इसे थोड़े बड़े दायरे में देखे जाने की ज़रूरत है और जो बच्चे कई क्षेत्रों में असाधारण क्षमताएं प्रदर्शित कर रहे हों, उन्हें भी ईश्वरीय देन माना जा सकता है.

यह बहस शायद ही कभी ख़त्म हो. लेकिन इस पहलू पर एक आम सहमति ज़रूर बनी है, जो बच्चे आईक्यू (बुद्धिमता मापने का पैमाना) टेस्ट में 97 परसेंटाइल से ज़्यादा अंक हासिल करते हैं, उन्हें ईश्वरीय देन मानते हैं.

ब्राज़ील के साओ पाउलो के छह साल के थियो कोस्टा रिबेरियो इनमें एक हैं. छह महीने के होने पर उन्होंने पहला शब्द बोला था और जब 18 महीने के हुए तब वे पूरा वाक्य बोलने लगे थे, इसी उम्र में उन्होंने प्री स्कूल में दाखिला लिया था.

थियो के पिता इगोर रिबेरियो ने बताया, "कोई शब्द देखकर वह हमें एक्सप्लेन करने को कहता था. लगातार सवाल पूछता था, लेकिन वे बेतूके सवाल नहीं थे." रिबेरियो के मुताबिक परिवार की ओर से बच्चे पर कोई दबाव नहीं था लेकिन उसकी उत्सुकता की अनदेखी भी नहीं हुई.

कोविड संकट के दौरान, जब बच्चे वर्ण और अक्षर सीख रहे थे, तब तीन साल के थियो पढ़ने, लिखने और गणना करने लगे थे. जुलाई, 2021 में वे तब स्कूल गए जब उनके माता-पिता को मीटिंग के लिए बुलाया गया था. उस बातचीत में बताया गया कि बच्चे का प्रदर्शन औसत से बेहतर है और इसे बुद्धिमता परीक्षण में हिस्सा लेना चाहिए.

रिबेरियो ने बताया, "इसके बाद हम न्यूरो साइकोलॉजिस्ट के पास गए, उन्होंने बुद्धिमता परीक्षण किया. इसके अलावा उन्होंने भावनात्मक पहलू और मोटर इस्तेमाल के कौशल की भी जांच की. इसके बाद उन्होंने रिपोर्ट दी, हम तब अचरज में पड़ गए जब उन्होंने बताया कि थियो का आईक्यू लेवल ईश्वरीय देन वाले स्तर से भी ऊपर है."

रिबेरियो के मुताबिक उन्होंने न्यूरो साइकोलॉजिस्ट से कहा, "ये तो ठीक है, लेकिन हम इस बच्चे का क्या करें."

थियो कोस्टा रिबेरियो

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छह साल में 'टीन एजर'

पेशेवर विशेषज्ञों के मुताबिक पांच साल के थियो की बौद्धिक और भावनात्मक क्षमताएं 14-15 साल के किसी आम बच्चे जितनी थी. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि थियो, आम बच्चों जैसे नहीं करता. उसे हमेशा घर से बाहर जाने, दोस्त बनाने, खेलने और शारीरिक शिक्षा की क्लास करने में आनंद आता है. डायनासोर के बारे में जानकारी जुटाना उसका पैशन बन चुका है, उसने अपना यूट्यूब चैनल भी शुरू किया है.

थियो के पिता बताते हैं, "कभी वो छह साल के बच्चे की तरह डायनासोर के साथ खेलना चाहता है, कार्टून देखता है, वीडियो गेम्स देखता है और कभी उसका टीन एज अवतार जागृत होता है और दार्शनिक बातें शुरू होती हैं."

थियो से हुई बातचीत के बारे में रिबेरियो बताते हैं, "हम उसे इंसानों के प्रजनन और जेनेटिक कोड के बारे में बता चुके हैं. बच्चे और किशोर का मिश्रण है थियो."

थियो के माता पिता के लिए आश्चर्य का सिलसिला इस साल भी जारी रहा. जब फरवरी महीने में ज़्यादा आईक्यू क्षमता वाले लोगों की सोसायटी मेन्सा इंटरनेशनल में हिस्सा लेने वालों में सबसे कम उम्र का ब्राज़ीली बना थियो. इन दिनों अपनी पढ़ाई के अलावा आम ब्राज़ीली बच्चे की तरह थियो फुटबॉल और संगीत भी सीख रहा है.

रिबेरियो बताते हैं, "दरअसल ऐसे बच्चों को ना तो सरकार और ना ही स्कूल की ओर से कोई प्रोत्साहन मिलता है, इन बच्चों को अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए इसकी ज़रूरत है." थियो के पिता का दावा है कि उन्हें अपने बेटे को प्राथमिक स्कूल में दाखिले की अनुमति के लिए अदालत जाना पड़ा.

वो बताते हैं, "अगर शैक्षणिक अधिकारी चाहें तो बच्चों को रोक सकते हैं, इससे वे आगे नहीं बढ़ सकते."

बीबीसी ने ब्राज़ील के शिक्षा मंत्री को कई बार ईमेल और फ़ोन से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन इस स्टोरी के प्रकाशित होने तक उनका कोई जवाब नहीं मिला है.

ऐसी असाधारण बच्चों की शिक्षिका पेट्रेसिया गोनक्लेव्स ने कहा, "स्कूल ऐसा होना चाहिए जो बच्चे की प्रतिभा के मुताबिक उसे अवसर उपलब्ध कराए ना कि क़ानून सम्मत अधिकार को हासिल करने के लिए बच्चे के पिता के अदालत में जाने का इंतज़ार करे."

थियो के माता पिता ने प्राइमरी स्कूल में पहले एडमिशन देने की अनुमति के लिए कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया.

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निकोल की कहानी

आठ साल की निकोल पेक्सोटो जब छह महीने की हुईं तो पहला शब्द कहा- डैड.

निकोल की मां जेसिका पेक्सोटो बताती हैं, "एक साल की हुई तो उसके लिए गुड़िया वैगरह लाने लगे थे. लेकिन इसका प्रिय खिलौना पेंसिल और पेपर था. लोग कहते थे कि यह अलग है लेकिन मुझे लगता कि मां होने के चलते मुझे ऐसा लग रहा है."

निकोल जब दो साल की हुई तो नर्सरी क्लास में दूसरे सभी बच्चों से बेहतर थी. 2021 में सात साल की निकोल ने रियो डि जेनेरियो के एक स्कूल में दाखिला लिया. यहां माता-पिता को बच्ची के आईक्यू टेस्ट कराने के लिए कहा गया. निकोल अभी प्राथमिक स्कूल के तीसरे साल में है. निकोल की मां ने कहा, "अब हम एक ग्रेड आगे जाने की तैयारी में हैं, ऐसा करने की अनुमति देने वाली रिपोर्ट हमारे पास है."

निकोल काफ़ी उत्सुकता वाली बच्ची है और डॉक्टर बनने का सपना देख रही है. हालांकि गणित के सवाल सुलझाना भी उनका पैशन है.

उनकी मां ने बताया, "हमलोग एक दिन चर्च में थे. निकोल की बगल में उसके स्कूल की एक छात्रा बैठी हुई थी जो छठी ग्रेड में पढ़ती है. वह अपने गणित की गुना वाली गणनाएं सुलझाने की कोशिश कर रही थी. निकोल ने उसे देखा. जब वह घर आयी तो उसने ना केवल उन गणनाओं को किया बल्कि सब ठीक भी थे."

जब निकोल छह साल की थी, तब उसने अपने पिता को म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट बजाने और उसके बारे जानकारी देने को कहा. उनकी मां याद करती हैं, "उसके बाद उसने खुद से एक गाना बजाया."

निकोल को दूसरों से बातचीत और संबंध बनाने में कोई मुश्किल नहीं होती है. पोक्सोटो बताती हैं, "मुझे नहीं मालूम निकोल क्या है, लेकिन वह आसानी से दोस्त बना लेती है, और किसी भी हालात से तालमेल बिठा लेती है."

निकोल भी मेन्सा ब्राज़ील की सदस्य है. उनकी मां बताती हैं, "वह बताती है कि उसके जीवन में कोई बदलाव नहीं हुआ है और वह हमेशा ऐसी ही रहेगी. जब मैं उसे समझाने की कोशिश कर रही हूं कि वह भी दूसरे बच्चों से अलग और बेहतर नहीं है."

निकोल और उनका परिवार

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इमेज कैप्शन, माता पिता के मुताबिक गणित और म्यूज़िक में निकोल की प्रतिभा हैरान करने वाली है.

असाधारण प्रतिभा की पहचान

शुरुआत में बेहतर संकेत होने के बावजूद हमें यह ख़्याल रखना चाहिए कि जल्दबाज़ी में प्रतिभा का आकलन नहीं होता. बौद्धिक क्षमता को आंकने के लिए कई परीक्षण से गुज़रना होता है. आईक्यू के अलावा यह भी देखना होता है कि बौद्धिक क्षमता कितनी है. इसका आकलन मनोवैज्ञानिकों, न्यूरोसाइकोलॉजिस्ट, शिक्षाविदों और विषय विशेषज्ञों द्वारा किया जाता है.

बहरहाल असाधारण प्रतिभा की पहचान के लिए निम्न गुणों का होना ज़रूरी है:-

  • तीव्र जिज्ञासा
  • उम्र की तुलना में बेहतर शब्दावली
  • सीखने में आसानी और उच्च बौद्धिक क्षमता
  • त्वरित तार्किक क्षमता
  • नेतृत्व और आत्मविश्वास
  • अच्छी यादाश्त
  • रचनात्मकता
  • विचारों को अपनाने या संशोधित करने की क्षमता
  • व्यावहारिक अवलोकन
  • लक्ष्य का पीछा करने में दृढ़ता

जिन बच्चों की पहचान नहीं हो पाती है, स्कूल में उनकी रूचि बदल सकती है और उनमें व्यवहार संबंधी समस्याएं विकसित हो सकती हैं.

न्यूरो साइंटिस्ट डॉ. फैबियानो डी अब्रू कहते हैं, "ऐसे कई प्रतिभाशाली लोग हैं जो प्रोत्साहन की कमी के कारण स्कूल में अच्छे ग्रेड नहीं प्राप्त करते हैं. कभी-कभी, दोहराई जाने वाली शिक्षण पद्धति और कक्षा में पढ़ाने के तरीक़े से प्रतिभाशाली बच्चे परेशान होते हैं और वे अपने कौशल का विकास नहीं करते हैं."

ब्राज़ील और कई अन्य देशों में प्रतिभाशाली लोगों की पहचान के लिए कोई व्यवस्था नहीं है. वे अपने ही परिवार, स्कूल या दोस्तों द्वारा खोजे जाते हैं. इसके चलते ही शोधकर्ताओं का अनुमान है कि प्रतिभाशाली बच्चों की मौजूदा संख्या वास्तविकता से बहुत कम है.

विशेषज्ञों के बीच अभी भी असाधारण प्रतिभा के कारणों पर बहस है

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खेल-कला-अकादमिक जगत की प्रतिभाएं

ब्राज़ीलियन काउंसिल फॉर गिफ्टेडनेस के मुताबिक प्रतिभाशाली लोगों को दो बड़े समूहों में वर्गीकृत किया जाता है. पहला प्रतिभाशाली शिक्षाविदों का है - जो अच्छे ग्रेड प्राप्त करते हैं और वैज्ञानिक तौर तरीक़े सीखने में बहुत अच्छे होते हैं. दूसरे बड़े समूह को रचनात्मक लोगों का समूह कहा जाता है.

मेन्सा ब्राज़ील की मनोविज्ञान पर्यवेक्षक प्रिसिला ज़ाइया कहती हैं कि बुद्धिमता और उच्च क्षमता, असाधारण प्रतिभा का ही हिस्सा है.

ज़ाइया कहती हैं, "प्रतिभाशाली माने जाने के लिए व्यक्तियों को भावनात्मक और सामाजिक पहलुओं से जुड़ी अन्य विशेषताओं को भी प्रस्तुत करना चाहिए. वे अधिक संवेदनशील और सहानुभूति रखने वाले लोग हैं, न्यायप्रिय भावना रखते हैं. उनकी आसपास की दुनिया पर नज़र होती है विवरण के प्रति सर्तक होते हैं."

उन्होंने यह भी बताया कि, "ऐसे कौशल भी हैं जो बौद्धिक क्षेत्र से अलग हैं और संगीत, खेल, कला और नृत्य में दिखाई देंगे."

क्या होते हैं विवाद

लेकिन असाधारण प्रतिभा एक विवादास्पद विषय है. साओ पाउलो विश्वविद्यालय की न्यूरोसाइकोलॉजिस्ट डॉ पेट्रीसिया रेज़ज़क तर्क देते हुए कहती हैं, "वैज्ञानिक साहित्य को लेकर कोई आम सहमति नहीं है, लेकिन मेरे लिए प्रतिभाशाली होने के दावे को अनिवार्य रूप से बौद्धिक होना चाहिए."

ब्राजीलियन इंस्टीट्यूट ऑफ गिफ्टेडनेस के एक सदस्य के मुताबिक, 'असाधारण प्रतिभा के अलावा भी ऐसे भी लोग होते हैं जिनकी क्षमताएं बहुत ज़्यादा होती हैं.'

रेज़ज़क कहती हैं, "हो सकता है कि मेरा बच्चा अत्यंत विकसित कलात्मक या एथलेटिक क्षमता वाला बच्चा हो. किसी क्षेत्र विशेष में उसकी क्षमता बहुत हो लेकिन मैं उसे असाधारण प्रतिभा के बदले उच्च क्षमता का ही मानूंगी."

क्या चीज़ है जो असाधारण बनाती है?

विशेषज्ञों के अनुसार, असाधारण बच्चों के मस्तिष्क के कुछ क्षेत्रों में ग्रे मैटर की मात्रा अधिक होती है, और इससे सिनैप्स (कनेक्शन स्थापित करना) सामान्य से अधिक तेजी से काम करते हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि ग्रे मैटर फ्रंटल कॉर्टेक्स के साथ-साथ सोच को प्रभावित करने वाली कुछ संरचनाओं को प्रभावित करता है.

डॉ. अब्रू बताते हैं, "असाधारण तौर पर प्रतिभाशाली लोगों के दिमाग़ अलग-अलग होते हैं, इसलिए वास्तव में वे अधिक बौद्धिक रूप से विकसित होते हैं. उनके पास बड़े न्यूरॉन्स होते हैं, अधिक मज़बूत और अधिक क्षमता के साथ और उनका सिनैप्टिक कनेक्शन अधिक तीव्र और स्थायी होता है, जिससे मस्तिष्क बड़ा होता है."

उन्होंने यह भी बताया, "इसमें प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स शामिल है, जो मानव मस्तिष्क में निर्णय लेने, तर्क करने, रोकथाम, यादाश्त और ध्यान के लिए ज़िम्मेदार होते हैं."

कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि असाधारण बौद्धिक क्षमता वाले बच्चों की मस्तिष्क स्मृति प्रणाली आमतौर पर बढ़ रहे बच्चों की तुलना में भिन्न आकार की होती है. दूसरे विश्लेषक इस बात पर ज़ोर देते हैं कि प्रतिभाशाली बच्चों के पास अधिक एकीकृत और बहुमुखी मस्तिष्क तंत्र होता है.

मेन्सा ब्राज़ील की मनोविज्ञान पर्यवेक्षक प्रिसिला ज़ाइया भी बताती हैं कि असाधारण प्रतिभा कोई चिकित्सीय स्थिति नहीं है. उन्होंने कहा, "यह एक न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर नहीं है, बल्कि व्यक्ति की कार्यप्रणाली है. हम असाधारण प्रतिभा को रचनात्मक और मनोवैज्ञानिक पहलू के रूप में समझते हैं."

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