यूक्रेन में लाशों की पहचान के लिए जूझते और बिलखते लोगों की कहानी

कंटेनर में अवशेष
इमेज कैप्शन, इज़ियम में मारे गए कुछ लोगों के अज्ञात अवशेषों को ख़ारकीव में एक कंटेनर में रखा जा रहा है
    • Author, सारा रेंसफोर्ड
    • पदनाम, बीबीसी ईस्टर्न यूरोप संवाददाता, ख़ारकीएव इलाक़े से

ओलेह पोडोरोज़नी हल्की रोशनी वाले गलियारों से होकर मुर्दाघर की तरफ़ पीछे के यार्ड में एक बड़े सफ़ेद कंटेनर तक ले जाते हैं. यहाँ खिड़कियों को रेत की बोरियों से बंद किया गया है.

जैसे ही भारी भरकम दरवाजे़ को खोला गया, लाशों की गंध बाहर तक निकल कर आने लगी. सफ़ेद थैलों में अंदर इकट्ठे किए गए नागरिकों के शव हैं.

जब इज़ियम शहर पर रूसी सैनिकों का क़ब्ज़ा था तब इन नागरिकों की मौत हो गई थी. इनमें से कई तो महीनों से मृत हैं.

लाश के थैलों को नंबरों से चिह्नित किया गया है. मृत लोगों के विवरण को काले पेन से लिखा गया है. इज़ियम शहर के आज़ाद होने के कुछ हफ़्तों बाद वहाँ पाए गए 146 लोगों के शवों के अवशेषों की अब तक पहचान नहीं हो पाई है.

ये अवशेष यहाँ इसलिए हैं क्योंकि ख़ारकीव क्षेत्र में रूसी मिसाइल हमलों और सामूहिक क़ब्रों से मुख्य मुर्दाघर अज्ञात लाशों से भरी पड़ी है.

फोरेंसिक विशेषज्ञ और पैथेलॉजिस्ट ओलेह पोडोरोज़नी कहते हैं, "अभी हमारे पास शवों की संख्या वास्तव में बहुत अधिक है."

ओलेह आगे बताते हैं कि,"डीएनए की जांच होने तक सभी मृत अवशेष यहीं रहेंगे."

यहाँ एक जेनेरेटर भी है, लेकिन यूक्रेन के बुनियादी ऊर्जा ढांचे पर रूसी हमलों की वजह से होने वाली नियमित बिजली कटौती के दौरान कंटेनर को ठंडा रखना चुनौतीपूर्ण है.

एक पीड़ित की हड्डियों की जांच करता पैथोलॉजिस्ट
इमेज कैप्शन, एक पीड़ित की हड्डियों की जांच करता पैथोलॉजिस्ट

एक लंबी तलाश

इज़ियम में पूर्व की तरफ़ कुछ घंटों के सफ़र के बाद रूस के आक्रमण से विनाश दिखता है. आक्रमण से होने वाली तबाही चौंकाने वाली है.

फ्लैटों के ऊंचे-ऊंचे ब्लॉक के बीच में एक विशाल सुराख है और चारों ओर अलग-अलग घरों को जमींदोज़ कर दिया है.

एक आदमी आग से काली हुई एक इमारत के दीवार को रंग रहा था. वहीं पास के गैराज में पंक्तिबद्ध तरीके़ से बड़े ज़ेड के आकार को दीवारों पर पोत दिया गया था. इस ज़ेड के आकार को सात महीने के कब्जे़ के दौरान रूसी सैनिकों के द्वारा दिया गया टैग है.

इन सबके बीच रहने वाले परिवार उन रिश्तेदारों की तलाश कर रहे हैं. परिवार को पता है कि उनके परिचित की मौत हो चुकी है लेकिन अब तक उनके पास कोई शरीर नहीं है जिसे वे दफन कर सकें.

इज़ियम पुलिस स्टेशन को नष्ट कर दिया गया था, इसलिए वहां के अधिकारियों ने आर्ट कॉलेज में एक घटना कक्ष स्थापित किया है. यहाँ वे डीएनए के नमूने और इलाक़े में अत्याचारों के सबूतों को एकत्र करते हैं.

लोग मुंह से स्वाब सैंपल दे रहे है
इमेज कैप्शन, अधिकारी परिचितों की पहचान करने की उम्मीद में रिश्तेदारों के मुंह से स्वाब सैंपल लेते हुए

अधिकारी एक-एक कर लोगों को बुलाते हैं और गालों के अंदरूनी हिस्से से सैंपल लेते हैं. डीएनए सैंपल को फोरेंसिक प्रयोगशाला में इस उम्मीद में भेज दिया जाता है कि मुर्दाघर के किसी लाश से उसकी आनुवंशिकी (जेनेटिक) की मेल हो जाए.

तित्याना तबाकिना, अपनी बारी के बाद कमरे के बीच में रुकती हैं. वो अपने मुंह को सैंपल देने के लिए इस तरह से आगे करती हैं जैसे वो सिसक रही हों.

मार्च की शुरुआत में उनकी बहन इरीना और भतीजा येवेनी फ्लैटों के ब्लॉक पर एक रूसी हवाई हमले में मारे गए थे. वे इमारत की बेसमेंट में सुरक्षित रहने की मंशा से शरण लिए हुए थे.

तेत्याना ने अपने भतीजे येवेनी के हाथ पर बने एक टैटू से उसकी पहचान की. लेकिन उन्हें अब तक अपनी बहन नहीं मिल सकी है.

तेत्याना कहती हैं, "इरा विस्फोट में क्षत-विक्षत हो गई थी. मुझे उसका एक टुकड़ा भी नहीं मिला. मैं अपनी बहन के एक छोटे से टुकड़े को पाने का इंतज़ार कर रही हूं ताकि मैं उन दोनों (इरीना और येवेनी) को एक साथ दफना सकूं."

इरीना और येवेन की एक तस्वीर
इमेज कैप्शन, मार्च में रूसी हवाई हमले में इरीना और उनके बेटे येवेनी की मौत हो गई थी - इरीना का शव अभी तक नहीं मिला है

डीएनए में कठिनाइयां

जिस युद्ध ने तेत्याना के लिए दुःस्वप्न पैदा किया, वह लाशों की पहचान प्रक्रिया को भी बहुत धीमा कर रहा है.

ख़ारकीव क्षेत्र पर आक्रमण के दौरान फोरेंसिक विशेषज्ञ सुरक्षित ठिकानों में शरण ले चुके हैं.

विक्टोरिया लोनोवा कहती हैं, "हम नए लोगों को प्रशिक्षण दे रहे हैं, लेकिन अब तक सिर्फ़ आठ लोग ही हमारे विभाग में हैं और काम का दबाव बहुत ज़्यादा हैं."

विक्टोरिया प्रयोगशाला में एक विशेषज्ञ हैं जो मृतकों और उनकी खोज करने वालों के आनुवंशिक (जेनेटिक) प्रोफाइल स्थापित करने की कोशिश कर रही हैं.

वो कहती हैं, "हमें बिजली कटौती की भी समस्या है. भारी भरकम उपकरण अचानक काम करना बंद कर देते हैं, इसलिए हमें फिर से शुरू करना पड़ता है." हमारे पास एक जनरेटर है, लेकिन कई बार ऐसा भी होता है जब हमारे पास पूरे दिन बिजली नहीं होती है."

जिस तरीक़े से लोगों की मौत हुई, उसने वैज्ञानिकों के काम को और जटिल बना दिया है. कई लोग गोलाबारी और हवाई हमलों में बुरी तरह से जल गए है.

ओलेह पोडोरोज़नी कहते हैं कि, "जलने का अधिकतम तापमान होने के कारण लगभग कोई अनुवांशिक सामग्री नहीं बचती है. हम हड्डी के टुकड़े भेजते हैं, लेकिन कभी-कभी विशेषज्ञ आनुवंशिक नमूना नहीं निकाल पाते हैं, इसलिए वे और सैंपल मांगते हैं. इसलिए यह इतना धीमा है."

कुछ मृतकों के रिश्तेदार अब यूक्रेन छोड़ चुके हैं, इसलिए उन सबों का सैंपल नहीं लिया जा सकता.

प्रोसेक्यूटर ऑफिस ने निर्देश जारी किए हैं और बताया है कि कैसे शरणार्थी विदेशों से सैंपल को परीक्षण के लिए भेज सकते हैं. कुछ लोगों ने इसका लाभ भी उठाया है.

इज़ियम के पास दबे लोगों के क्रॉस
इमेज कैप्शन, अधिकारियों ने ख़ारकीव क्षेत्र में अब तक करीब 900 शव निकाले हैं

जंगल की क़ब्रें

इज़ियम शहर के अज्ञात लोग ज़्यादातर शहर के किनारे एक देवदार के जंगल में साधारण लकड़ी के क्रॉस की लंबी पंक्तियों के नीचे में दबे पाए गए थे.

जब इज़ियम पर क़ब्ज़ा कर लिया गया था, तब उन अज्ञात लाशों को क़ब्र खोदने वाले वॉलन्टीअर द्वारा वहाँ ले जाया गया था.

जब यूक्रेनी सैनिकों ने शहर को वापस लिया, तब जाकर इन लाशों को बाहर निकाला गया और ख़ारकीव भेज दिया गया. पुलिस के मुताबिक़ कुछ लोगों की प्राकृतिक मौत हुई है जबकि ज़्यादातर मौत गोलाबारी या विस्फोट में हुई हैं.

17 मृत लोगों की लाशों पर यातना के सबूत हैं, जिसमें गले में लिपटी हुई रस्सी और बंधे हाथ शामिल हैं. अब तक 899 मृतकों की लाशों को बाहर निकाला गया है.

इस बिल्डिंग पर हुए हमले में पूरा परिवार मारा गया.
इमेज कैप्शन, इस बिल्डिंग पर हुए हमले में पूरा परिवार मारा गया.

ख़ारकीव क्षेत्र के लिए पुलिस जांच के प्रमुख सेर्ही बोल्विनोव कहते हैं, "बेशक, यह बहुत मुश्किल है. हमने इतनी लाशें कभी नहीं देखीं. औसतन, हम एक दिन में लगभग 10 लाशें खोद रहे हैं और यह काम ख़त्म नहीं हुआ है."

इस हफ़्ते उनके अधिकारियों को क्लस्टर बम से मारे गए एक व्यक्ति का शव मिला जिसे उसकी पत्नी ने उनके बगीचे में दफ़न कर दिया था.

सेर्ही बोल्विनोव आगे कहते हैं, "यहाँ जो हुआ, रूस ने जो अपराध किए, वे हमारी स्मृति से कभी नहीं मिटेगा और हम उनमें से प्रत्येक की जाँच करेंगे."

अब तक इज़ियम में कुल 451 शव पाए गए हैं, जिसमें सात बच्चे शामिल हैं. मृतकों को जंगल में दफनाए गया, अधिकांश लाशों को ब़गैर ताबूत और बिना बॉडी बैग के दफनाया गया था.

ज़्यादातर लोगों के क़ब्र पर नाम भी नहीं थे. क़ब्र पर लकड़ी के क्रॉस थे जिसमें सिर्फ संख्या लिखी हुई थी.

एक नाम लिखा था: लेनिन एवेन्यू, 35/5, बूढ़ा आदमी.

व्लादीमीर वाकुलेंको की मां
इमेज कैप्शन, व्लादीमीर वाकुलेंको की मां ने अपने मारे गए बेटे के अंतिम संस्कार में कहा, "ईश्वर हमें क्षमा करना सिखाता है, लेकिन मैं हत्यारों को कभी माफ नहीं करूंगी।"

एक कवि का अंतिम संस्कार

लेकिन जिस लाश को वहां दफ़न किया गया था, उसका नंबर 319 है, जिसकी अब पहचान की जा चुकी है. डीएनए जांच के अनुसार, मृतक की पहचान वलोडिमिर वाकुलेंको (बाल लेखक और कवि) के तौर पर की गई.

मरने के नौ महीने बाद उनका परिवार अंतिम संस्कार कर सका.

मार्च के अंत में कवि वलोडिमिर को क़ैद कर लिया गया था और रूसी सेना द्वारा पूछताछ की गई थी. फिर रिहा कर दिया गया. अगले दिन प्रत्यक्षदर्शियों ने देखा कि दो सिपाही उन्हें फिर से ले जा रहे हैं. प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि उन्होंने सिपाहियों को "यूक्रेन की जय!" कहते सुना था. फिर कवि वलोडिमिर पर Z के निशान लगाकर एक कार में बांध दिया.

चीड़ के जंगल से जब उनका कंकाल बरामद किया गया तो क़ब्र में दो गोलियां मिलीं.

उनकी मां ओलेना इहनाटेंको ने उनके अंतिम संस्कार में नीले और पीले यूक्रेनी झंडे में लिपटे ताबूत पर झुककर उनके हत्यारों की मांग की. उन्होंने रुसी सैनिकों के लिए कहा, "तुम गीदड़ों! तुम ऐसे कैसे हो सकते हो?"

ओलेना ने अपने बेटे की तस्वीर को सीने से लगाकर कहती हैं, "ईश्वर हमें क्षमा करना सिखाता है, लेकिन मैं हत्यारों को कभी माफ़ नहीं करूंगी. मैं इस उम्मीद और विश्वास के साथ जिऊंगी कि जांच में पता चलेगा कि कौन ज़िम्मेदार है और हत्यारों को सज़ा मिलेगी. मैं उस सपने के लिए जीऊंगी."

उनके बेटे के दोस्तों को एक डायरी मिली है जिसे उसने युद्ध की शुरुआत में अपने साथ रखा था और बंदी बनाए जाने से पहले एक पेड़ के नीचे दबा दिया था. डायरी रूसियों के क़ब्जे वाले एक छोटे से गांव में एक प्रमुख यूक्रेनी देशभक्त के रूप में उनके डर की बात करता है.

डायरी में कवि व्लादीमीर वाकुलेंको ने कहा है, "शत्रु द्वारा घिर जाना मेरे लिए अत्यंत ख़तरनाक है."

अंतिम बार डायरी में लाइनदार नोट पेपर पर क्रेन के झुंड को ऊपर की ओर देखने का वर्णन करती हुए उकेरी हुई है.

कवि की डायरी की जांच
इमेज कैप्शन, वलोडिमिर वाकुलेंको के दोस्तों को एक डायरी मिली जिसे उन्होंने रूसी हमले की शुरुआत में रखा था

लंबा इंतज़ार

इज़ियम में अब तक डीएनए के माध्यम से पाँच मृतकों की पहचान हो पाई है. फ़ॉरेंसिक टीम ने स्वीकार किया है कि कुछ लाशें ऐसी हैं जो बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई हैं जिनकी पहचान कभी नहीं की जा सकती.

तेत्याना तबाकिना जैसे रिश्तेदारों के लिए यह एक पीड़ादायक प्रतीक्षा है.

वो कहती हैं कि एक पड़ोसी ने हाल ही में उसी हमले में मारे गए परिवार के सात सदस्यों को दफना दिया, जिस हमले में उनके भतीजे और बहन की मौत हुई थी.

तेत्याना आगे कहती हैं, "उन्होंने मुझे बताया कि उनके अंतिम संस्कार के बाद सुबह ऐसा लगा जैसे एक बड़ा बोझ उठा लिया था और अब आख़िरकार फिर से सो सकता है.

तेत्याना का कहना है कि "मैं बस उस पल से गुजरना चाहती हूं, तो शायद यह उनके लिए आसान होगा या मेरे लिए."

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