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कितनी ख़तरनाक है पुतिन की 'प्राइवेट आर्मी', जो यूक्रेन में लड़ रही है रूस की जंग
यूक्रेन की सेना ने रूस के वागनर समूह के एक मुख्यालय पर हमला बोला है. पूर्वी यूक्रेनी प्रांत लुहान्स्क के निर्वासित गवर्नर ने ये जानकारी दी है.
गवर्नर सर्हे हैदै ने बताया है कि लुहान्स्क प्रांत के कडिव्का में स्थित उस होटल को निशाना बनाया गया है जहां इस समूह को लड़ाके कथित रूप से मिला करते थे.
हैदै ने दावा किया है कि रूस को इस हमले में भारी नुकसान हुआ है, और मेडिकल ट्रीटमेंट नहीं हो पाने से बचे - खुचे सैनिकों में से पचास फीसद के मरने की आशंका है.
बीबीसी इस होटल में वागनर समूह की मौजूदगी की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका है.
बीते शनिवार और रविवार रूस ने ओडेसा को अपने निशाने पर बनाए रखा. वहीं, यूक्रेन ने रूसी नियंत्रण वाले मेलितोपोल शहर पर बमबारी करना जारी रखा.
पश्चिमी विशेषज्ञों के मुताबिक़, वागनर रूसी सरकार के समर्थन वाला लड़ाकों का समूह है जो रूसी हितों के लिए काम करते हैं.
इस निजी सेना को एक कंपनी की शक्ल में येवगेनी प्रिगोज़िन फंड करते हैं. प्रिगोज़िन पुतिन के क़रीबी हैं.
एक समय में रेस्तरां चलाने वाले प्रिगोज़िन पर युद्ध अपराध और मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़े आरोप लगते रहे हैं. इससे पहले वागनर क्राइमिया, सीरिया, लीबिया, माली और सेंट्रल अफ़्रीकन रिपब्लिक में तैनात रही हैं.
वागनर ग्रुप है क्या?
यूक्रेन पर हमले से ठीक पहले इसी गुट के लड़ाके पूर्वी यूक्रेन में फॉल्स फ़्लैग अभियानों को अंजाम दे रहे थे ताकि रूस को हमला करने का बहाना मिल सके.
किंग्स कॉलेज़ लंदन में संघर्ष और सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर ट्रेसी जर्मन कहती हैं कि इस क्षेत्र में वागनर समूह की पहली एंट्री साल 2014 में हुई थी.
वह कहती हैं, "इस समूह के लगभग 1000 लड़ाकों ने लुहान्स्क और डोनेत्स्क क्षेत्र में रूस समर्थित चरमपंथियों का समर्थन किया."
यूक्रेन के अभियोजकों ने वागनर समूह के तीन लड़ाकों पर रूसी सेनाओं के साथ मिलकर अप्रैल में कीएव के पास स्थित गांव मोतीज़िन गांव में तीन वागनर युद्ध अपराधों को अंजाम देने का आरोप लगाया है.
अभियोजकों का कहना है कि इन अपराधों में हत्या और प्रताड़ना शामिल है. इन तीन में से एक लड़ाका बेलारूस और एक रूस से जुड़ा है.
जर्मनी के ख़ुफ़िया विभाग को आशंका है कि वागनर लड़ाके यूक्रेनी शहर बूका में आम लोगों की हत्याओं में शामिल हो सकते हैं.
रॉयल यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूट से जुड़े डॉ सैमुअल रमानी कहते हैं कि अब वागनर समूह के लड़ाके डोनबास क्षेत्र में रूसी सैनिकों के साथ मिलकर जंग में हिस्सा ले रहे हैं.
वह कहते हैं, "वागनर समूह ने लुहांस्क में पोपोस्ना और सेवेरोडोनेत्स्क जैसे शहरों पर कब्जा करने में अहम भूमिका निभाई है. आजकल ये रूसी सेना की अनौपचारिक यूनिट है जिसके लड़ाकों की मौत होने पर जानकारी नहीं दी जाती है."
यूक्रेन की सेना ने इससे पहले जून में स्टाख़ानोव और लुहान्स्क के पोपोस्ना में स्थित वैगनर समूह के दूसरे ठिकानों पर हमला करने का दावा किया था.
वागनर समूह को किसने बनाया?
द जेम्सटाइन फ़ाउंडेशन थिंक टैंक के सीनियर फ़ेलो डॉ सर्गेई सुखान्किन बताते हैं कि वागनर ग्रुप को दिमित्री उत्किन नाम के एक व्यक्ति ने बनाया था.
वे 2013 तक रूसी विशेष सैन्य दस्ते में शामिल थे.
सुखान्किन कहते हैं, "वागनर ग्रुप में उन्होंने 35 से 50 साल की उम्र वाले ऐसे लोगों की भर्ती की जिन पर परिवार का या फिर कर्ज़ का बोझ था. ये अधिकतर छोटे शहरों से थे जहां काम के मौक़े कम थे. इनमें से कुछ चेचन्या में हुए संघर्ष और कुछ रूस-जॉर्जिया युद्ध में शामिल थे. इनके पास युद्ध का अनुभव था, लेकिन ये आम जीवन में अपनी जगह नहीं तलाश पाए थे."
सर्गेई बताते हैं कि रूसी सैन्य ख़ुफ़िया विभाग के पास एक जगह पर क़रीब तीन महीनों तक इनकी ट्रेनिंग हुई. इससे ये अंदाज़ा लगाया गया कि इस ग्रुप के तार रूसी सेना से जुड़े थे.
बताया जाता है कि दुनिया के कई संघर्षग्रस्त इलाक़ों में इसी ग्रुप के लड़ाके भेजे गए.
वो कहते हैं, "मुझे लगता है रूस इसे लेकर इसलिए उत्सुक था क्योंकि वो चेचन्या और अफ़ग़ानिस्तान में हुई ग़लती नहीं दोहराना चाहता था. पुतिन को डर था कि विदेशी ज़मीन पर सैन्य अभियानों में अधिक रूसी सैनिकों की मौत हुई तो इससे देश में लोगों की नाराज़गी बढ़ेगी."
चेचन्या और अफ़ग़ानिस्तान के सैन्य अभियानों में हज़ारों रूसी सैनिकों की जान गई थी. वागनर ग्रुप आधिकारिक तौर पर सेना का हिस्सा नहीं था, इसलिए इसे अभियान में शामिल करने से सैनिकों की मौतों का आंकड़ा कम रखने में मदद होती.
सर्गेई कहते हैं, "एक बड़ी वजह ये थी कि रूस इनकी ज़िम्मेदारी लेने से इनकार कर सकता था. यानी वो ये कह सकता था कि उसे इन लड़ाकों के बारे में कोई जानकारी नहीं है. एक और वजह ये भी है कि किसी और देश में संवेदनशील मिशन पर सेना या पैरामिलिटरी भेजना मुश्किल होता है."
वागनर समूह पर किसका नियंत्रण है?
किरिल मिख़ायलोव कीएव में कॉन्फ़्लिक्ट इन्टेलिजेंस टीम में खोजी पत्रकार हैं. उत्किन के नेतृत्व में वागनर ग्रुप 2014 में पूर्वी यूक्रेन में सक्रिय दिखा. वो रूस समर्थक अलगाववादियों की मदद कर रहा था.
जब जून 2014 में यूक्रेन का एक सैन्य विमान हादसाग्रस्त हुआ, तो आरोप वागनर ग्रुप पर लगा.
मिख़ायलोव कहते हैं, "यूक्रेनी सुरक्षा एजेंसी ने पूर्वी यूक्रेन में विद्रोही कमांडरों और रूसी अधिकारियों की फ़ोन पर जो बातें सुनीं उसके अनुसार ये वागनर ग्रुप का काम था. दिमित्री उत्किन को फ़ोन पर विमान गिराए जाने की पुष्टि की गई थी."
उस वक्त इस बात की पुख़्ता जानकारी नहीं थी कि वागनर ग्रुप का नियंत्रण किसके हाथों में था. हालांकि इसके बाद ये ग्रुप डेबाल्टसवा के अभियान में शामिल हुआ.
डेबाल्टसवा पूर्वी यूक्रेन के दो महत्वपूर्ण इलाक़ों दोनेत्स्क और लुहांस्क को जोड़ने वाला रेलवे हब है. इसे रणनीतिक तौर पर अहम माना जाता है.
किरिल कहते हैं, "ये शहर यूक्रेन के क़ब्ज़े में था. रूसी सेना के समर्थन से विद्रोही इस पर क़ब्ज़ा करने की कोशिश में थे. उस वक्त वहां रूसी टैंकों का इस्तेमाल किया गया था. हाल में पता चला है कि वो वैगनर ग्रुप के थे."
मिख़ायलोव कहते हैं कि खोजी पत्रकारों को पता चला है कि दिमित्री उत्किन, डेबाल्टसवा और पूर्वी यूक्रेन के दूसरे हिस्सों के बारे में जीआरयू यानी रूसी सैन्य ख़ुफ़िया एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी को जानकारी दे रहे थे.
तो क्या इसका मतलब ये है कि वागनर ग्रुप का नियंत्रण असल में जीआरयू के हाथों में था?
वो कहते हैं, "उन पर सीधे तौर पर जीआरयू का नियंत्रण था, वो उन्हें रिपोर्ट करते थे. कम से कम उस वक्त ऐसा ही था."
हालांकि डेबाल्टसवा की लड़ाई के वक्त तक वागनर ग्रुप उतना बड़ा नहीं था. लेकिन सीरिया में ये स्थिति बदल गई.
और कहां तैनात रहा है वागनर ग्रुप
किरिल कहते हैं, "हमने कभी इस बात के सबूत नहीं देखे कि यूक्रेन की तरह प्रोफ़ेशनल रूसी सैनिकों ने लड़ाई के मैदान में पहली कतार में हिस्सा लिया हो. सीरिया में ये भूमिका वागनर ग्रुप ने निभाई थी."
"यूक्रेन में छोटे पैमाने पर अभियान के बाद वागनर ग्रुप में कई बटालियन हैं. इनके पास आधुनिक हाथियार और हर बटालियन में क़रीब 400 लड़ाके थे. ये ज़मीन पर रूसी सेना की जगह ले रहे थे."
वागनर ग्रुप सीरियाई सेना के साथ जंग में था. ग्रुप के कुछ लोगों के अनुसार कथित चरमपंथी समूह इस्लामिक स्टेट के क़ब्ज़े से छुड़ाए इलाकों में सबसे पहले इसी ग्रुप के सदस्य घुसते थे.
लेकिन फिर इसका नुक़सान भी था, मौतों की संख्या बढ़ रही थी.
वो कहते हैं, "खोजी पत्रकारों की रिपोर्टों के अनुसार, उस वक्त रूस के रक्षा मंत्री वागनर ग्रुप से काफ़ी नाराज़ थे क्योंकि मरने वालों के रिश्तेदार उनके बारे में सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे थे."
"ये बात सार्वजनिक होने लगी कि सीरिया में रूसी सैनिक लड़ रहे हैं. हथियारों के लिए वैगनर ग्रुप को मिल रही मदद बंद हो गई."
वॉशिंगटन पोस्ट और एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार वैग्नर ग्रुप ने अपनी रणनीति बदली और सीरियाई सरकार के साथ समझौता कर लिया. उन्हें पूर्व में मौजूद तेल और गैस के कुंओं को अमेरिका के समर्थन वाले कुर्द बलों के क़ब्ज़े से छुड़ाना था.
और फिर अहम मोड़ आया फ़रवरी 2018 में, सीरिया के कोनोको गैस प्लांट के नज़दीक कुर्द बलों के साथ तैनात अमेरिकी कमांडरों ने एक बड़ी फ़ौज को अपनी तरफ़ आते देखा. रेडियो पर उन्होंने लोगों को रूसी भाषा में बात करते सुना. ये वागनर ग्रुप के लड़ाके और सीरियाई सैनिक थे.
किरिल कहते हैं, "वहां ख़ूनी संघर्ष छिड़ गया. अमेरिकी सैनिक रूसी लड़ाकों पर हमले कर रहे थे. इससे रूस और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने का ख़तरा पैदा हो गया."
पेंटागन ने बताया कि रूसी अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिया है कि उस इलाक़े में उनका कोई सैनिक नहीं था.
वो कहते हैं, "फ़रात नदी के पश्चिम के इलाक़े और तेल के कुंए सीरियाई सरकार और वागनर ग्रुप के नियंत्रण में आ गए. वहीं पूर्वी इलाक़े अमेरिकी सेना समर्थित समूहों के क़ब्ज़े में थे. ये देखा गया कि तेल के कई कुंए अब भी कुर्द बलों के क़ब्ज़े से नहीं छुड़ाए जा सके थे."
यहीं से स्थिति थोड़ी जटिल हुई. अब तक ये पता नहीं चल सका है कि इस अभियान की इजाज़त किसने दी थी, या फिर वैग्नर ग्रुप अपनी मर्ज़ी से फ़ैसले ले रहा था.
लेकिन इसके बाद ग्रुप की रणनीति फिर एक बार बदल गई. अब ये सैन्य अभियानों की बजाय आर्थिक क्षेत्र में पंजे फैलाने लगा.
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