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एलन मस्क: कैसे ना ना करते इक़रार ट्विटर से कर बैठे?
- Author, जेम्स क्लेटन
- पदनाम, तकनीकी संवाददाता, बीबीसी न्यूज़
ये अमेरिका के सैन होज़े में मार्च महीने के आख़िरी दिनों की एक सर्द-सी शाम थी.
दुनिया के सबसे अमीर शख्स की मेज़बानी के लिए आनन-फ़ानन में Airbnb पर एक बैठक आयोजित की गई थी.
ये मीटिंग ट्विटर के लिहाज़ से बहुत ही बड़ी थी. हाल ही में एलन मस्क ट्विटर के सबसे बड़े शेयरधारक बन गए हैं. अब चर्चा ये थी कि वो कंपनी के बोर्ड में भी शामिल होना चाहते हैं.
जब ट्विटर के चेयरमैन ब्रेट टेलर, मीटिंग के लिए पहुँचे तो माहौल उनकी उम्मीद के मुताबिक तो बिल्कुल नहीं था.
बाद में उन्होंने मस्क को ये संदेश भेजा, "जहां हमारी बैठक हुई है, वो सबसे अजीब जगह थी."
जहां तक बात मीटिंग की है तो वो बिना किसी अड़चन के पूरी हो गई थी. इसके कुछ दिन बाद ही ये घोषणा हुई कि एलन मस्क ट्विटर के बोर्ड में शामिल होंगे.
ये सिर्फ़ शुरुआत थी. अगले छह महीने सबसे अधिक उठापटक से भरे सौदे के गवाह बने. सिलिकॉन वैली के इतिहास में अभी तक ऐसा सौदा नहीं देखा गया, जिसे लेकर इतनी बार 'ना-ना कहने के बावजूद इकरार' हो गया हो.
अप्रैल महीने की शुरुआत तक एलन मस्क भी ख़ुश दिखे. बोर्ड के सदस्य बनने की ख़बरों के बीच वो लगभग रोज़ अपने ट्वीट्स से ये बताते थे कि आने वाले दिनों में कंपनी किन बदलावों की गवाह बन सकती है.
ठोस कार्रवाई के पक्ष में थे एलन मस्क
हालांकि, मस्क और ट्विटर के सीईओ पराग अग्रवाल के बीच होने वाली व्यक्तिगत मुलाक़ातें कुछ ख़ास रंग नहीं दिखा रही थीं. माना जा रहा था कि ट्विटर पर मौजूद ख़ामियों को दूर करने के मुद्दे पर दोनों के बीच टकराव की स्थिति थी, जिससे एलन मस्क ख़ुश नहीं थे.
एलन मस्क ने इस बारे में टेलर को कथित तौर पर लिखा, "पराग के साथ बातचीत से ट्विटर की ख़ामियां दूर नहीं होंगी. सख़्त कार्रवाई ज़रूरी है."
14 अप्रैल को अरबपति मस्क ने सार्वजनिक तौर पर ये कहा कि वो ट्विटर को पूरी तरह खरीदना चाहते हैं.
उन्होंने इसके लिए ट्विटर को 44 अरब डॉलर का प्रस्ताव दिया. शुरुआत में ट्विटर के बोर्ड ने ये प्रस्ताव ठुकरा दिया और मस्क को जबरन कंपनी खरीदने से रोकने के लिए 'पॉयज़न पिल' जैसी नीति का सहारा भी लिया.
लेकिन एक बार फिर से चीज़ें बदलीं और ट्विटर बोर्ड ने 25 अप्रैल को घोषणा कर दी कि उन्होंने मस्क के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है. लेकिन कहानी अब भी ट्विस्ट आना बाक़ी थे.
इसके बाद उत्साह से भरे एलन मस्क ने अपने अंदाज़ में ट्वीट किया और ट्विटर पर 'फ़्री स्पीच' पर ज़ोर दिया.
मस्क ने कहा कि ट्विटर अपना रास्ता भटक गया है. उन्होंने कहा कि ट्विटर अक्सर बोलने की आज़ादी पर रोक लगाता है. जबकि दुनिया के 'टाउन हॉल' के तौर पर उसे सबसे पहले 'फ्री स्पीच' वाली जगह बनना चाहिए.
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एलन मस्क को महंगा पड़ा ट्विटर सौदा?
कनाडा के वैनकुवर में टेड टॉक के दौरान मस्क ने कहा कि उन्हें इस सौदे के 'वित्तीय पहलू' की कोई परवाह नहीं है.
मस्क का ये बयान काम आया क्योंकि सौदे के एलान के महीनों बाद भी तकनीकी कंपनियों के शेयरों के दाम घटते जा रहे थे. ट्विटर की कीमत भी कम हो गई थी. इसकी वजह से कई विश्लेषकों ने ये भी कहना शुरू कर दिया था कि शायद एलन मस्क ने ट्विटर खरीदने के लिए ज़्यादा रकम चुका दी.
इधर मस्क ने सार्वजनिक तौर पर कई अलग-अलग सवाल करने शुरू कर दिए थे. मसलन- ट्विटर पर कितने असली अकाउंट्स हैं?
एलन मस्क को फ़ोर्ब्स और ब्लूमबर्ग ने दुनिया का सबसे अमीर व्यक्ति बताया था, जिनके पास करीब 250 अरब डॉलर की कुल संपत्ति है. एलन मस्क सालों से ट्विटर पर बोट्स (फ़र्जी) अकाउंट को लेकर शिकायत करते रहे हैं.
अपना प्रस्ताव स्वीकार होने के बाद भी वो ट्विटर से असली यूज़र्स की संख्या पूछते रहे.
ट्विटर के अधिकारियों ने बताया कि रोज़ाना के एक्टिव यूज़र्स में से करीब 5 फ़ीसदी बोट्स हैं. हालांकि, मस्क ने इसे नहीं माना.
पराग अग्रवाल ने ट्विटर पर एक लंबे थ्रेड में ये समझाने की कोशिश की कि कंपनी इस आंकड़े तक कैसे पहुँची. लेकिन मस्क ने इस थ्रेड का जवाब 'पूप इमोजी' से दिया.
मस्क का सौदे से पीछे हटने का एलान
ये सौदा लगभग रद्द होने की कगार पर पहुँचता जा रहा था और आठ जुलाई को मस्क ने एलान कर दिया कि वो अब इस डील से पीछे हटना चाहते हैं.
हालांकि, ये कह पाना मुश्किल है कि मस्क कंपनी को पहले से बेहतर कीमत पर खरीदने की कोशिश कर रहे थे या फिर वो असल में बोट्स अकाउंट्स की संख्या की वजह से इस सौदे से पीछे हटना चाह रहे थे.
मस्क के एलान पर ट्विटर ने भी पलटवार किया और बताया कि समझौते की शर्तों के अनुसार एलन मस्क अब कंपनी खरीदने के लिए कानूनी रूप से बाध्य हैं और सौदे से पीछे हटने का कोई विकल्प अब उनके पास नहीं है.
दोनों पक्षों ने मोटी फ़ीस देकर वकील रखे. इसके बाद डेलावेयर की एक अदालत ने 17 अक्टूबर की तारीख़ दी. इस दिन ये तय होना था कि क्या एलन मस्क पर ट्विटर खरीदने के लिए दबाव बनाया जा सकता है.
कोर्ट के दस्तावेज़ों में ट्विटर ने दलील दी कि उसने अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद असली यूज़र्स के बारे में मस्क को पर्याप्त जानकारी मुहैया करवा दी है. वहीं, मस्क की दलील थी कि माइक्रोब्लॉगिंग साइट पर ट्विटर के दावे से कई गुना अधिक बोट्स हैं. यहाँ तक कि मस्क ने कंपनी पर फर्जीवाड़े का आरोप भी लगाया.
सार्वजनिक मंचों से ट्विटर की ये आलोचना कंपनी के लिए नुक़सानदेह साबित होने लगी. ट्विटर की आमदनी का सबसे बड़ा ज़रिया विज्ञापन से आता है और अब विज्ञापन देने वाले ये सोचने को मजबूर हो गए कि उनके ऐड आख़िर कितने असली यूज़र्स को दिखाए जाते हैं.
ट्विटर मुख्यालय में भी इन ख़बरों ने हलचल तेज़ कर दी थी. कुछ कर्मचारी मस्क के सीईओ बनने की ख़बरों से ख़ुश थे. लेकिन स्टाफ़ के कुछ लोग निजी या सार्वजनिक तौर पर ये भी कह रहे थे कि ये सौदा कंटेंट मॉडरेशन और कंपनी के लक्ष्यों के लिहाज़ से विनाशकारी साबित होगा.
...और हो ही गई ट्विटर डील
धीरे धीरे समय बीतता गया. अब एलन मस्क, ट्विटर, जज और पत्रकार सभी एक न टलने वाले कोर्ट केस की तैयारी में थे लेकिन तभी स्थितियां फिर से पलटीं.
ट्विटर पर कई तरह के आरोप लगा चुके मस्क ने अचानक से ये एलान किया कि वो सौदे पर आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं.
ऐसा क्या हुआ जिससे मस्क ने अपना फैसला बदला?
शायद, उन्हें लगा कि वो कोर्ट केस हार जाएंगे. उन्हें ट्विटर की अर्ज़ी के मामले में अपना बयान दर्ज कराना था. शायद उन्हें डर था कि वकीलों के सामने सवाल-जवाब से कई बातें सार्वजनिक हो जाएंगी.
कारण कुछ भी हो, लेकिन इस मामले में ट्विटर ने बड़ी ही शांतिपूर्ण तरीके से प्रतिक्रिया दी. टेलर ने ट्वीट किया कंपनी "मस्क के साथ तय हुई कीमत और शर्तों पर डील पूरी करने के लिए प्रतिबद्ध है."
एलन मस्क के पास ये सौदा पूरा करने के लिए 28 अक्टूबर तक का समय था और मस्क ने भी ना-ना करते हुए आख़िरकार ये करार कर ही लिया.
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