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उत्तर कोरिया के राष्ट्रपति किम जोंग उन दबाव क्यों बढ़ा रहे हैं?
- Author, जीन मैकेन्ज़ी
- पदनाम, बीबीसी की सोल संवाददाता
उत्तर कोरिया को लेकर तनाव के दौर आते जाते रहते हैं, लेकिन अभी के हालत पिछले पांच सालों में सबसे बुरे दिख रहे हैं और आशंका जताई जा रही है कि ये और ख़राब होंगे.
पिछले कुछ महीनों में उत्तर कोरिया ने जापान के ऊपर से मिसाइलें दागी हैं, इसके कारण कई बाशिंदों को शेल्टर लेने के लिए मजबूर होना पड़ा.
उत्तर कोरिया ने कई बैलिस्टिक मिलाइलें लॉन्च की हैं, दक्षिण कोरिया की सीमा के क़रीब जंगी जहाज़ उड़ाए हैं और समुद्र में सैंकड़ों गोली बारूद दागे हैं जो कि मिलिट्री बफ़र ज़ोन में गिरे.
दोनों कोरियाई देशों ने शांति बनाए रखने के लिए 2018 में ये बफ़र ज़ोन बनाया था. दोनों देश तकनीकी रूप से अभी भी जंग में हैं.
सोमवार को उत्तर कोरिया के एक व्यवसायिक जहाज़ ने समुद्री सीमा पार की जिसके बाद दोनों ही ओर से चेतावनी के लिए फ़ायरिंग की गई.
दक्षिण कोरिया का कहना है कि जहाज़ जान-बूझ कर इस इलाक़े में घुसा था.
क्या चाहते हैं किम जोंग उन?
उत्तर कोरिया के मिसाइल छोड़ने की तीन वजहें होती हैं - अपने हथियारों की टेक्नॉलॉजी को टेस्ट करना, दुनिया को, ख़ासतौर पर अमेरिका को एक संदेश देना और अपने घर में लोगों को ख़ुश करना ताकि वो शासन पर भरोसा करते रहें.
उत्तर कोरिया ने इन तीन में से किस एक वजह से हाल के क़दम उठाए हैं, इसे समझना मुश्किल है, लेकिन इस बार किम खुलकर सामने हैं.
सरकारी मीडिया ने कई बार कहा है कि हाल के लॉन्च और ड्रिल दक्षिण कोरिया और जापान में हो रहे अमेरिकी सैन्य अभ्यास का जवाब है.
उत्तर कोरिया ने तनाव के लिए अपने दुश्मनों को ज़िम्मेदार ठहराया है और कहा है कि लॉन्च को अभ्यास रोकने की वॉर्निंग की तरह देखा जाना चाहिए.
अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान पिछले दो महीनों से बड़े स्तर पर अलग-अलग और साथ मिलकर सैन्य अभ्यास कर रहे हैं, ये दिखाने के लिए कि उत्तर कोरिया के न्यूक्लियर हमले के लिए वो तैयार हैं.
इसमें कोई शक़ नहीं है कि इस हरकत ने किम जोंग उन को नाराज़ किया है. किम इस तरह से अभ्यास को हमले की कोशिश की तरह देखते हैं.
एक और परमाणु टेस्ट की तैयारी?
उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार बनाने के पीछे की मंशा ख़ुद पर हमला होने के बचाने की थी. लेकिन अब उनके दबाव बढ़ाने के पीछे क्या कारण हैं.
कुछ लोगों को लगता है कि वो एक और टेस्ट के लिए ज़मीन तैयार कर रहे हैं, जैसे पांच साल में पहली पार परमाणु विस्फोट करना या दक्षिण कोरिया पर कोई छोटा हमला करना.
पिछले साल उन्होंने पांच साल के लिए एक प्लान सामने रखा था. इसमें उन सभी हथियारों की डिटेलिंग थी जो वो बनाना चाहते हैं, इसमें छोटे जंगों के लिए न्यूक्लियर बम और उन्हें ले जाने के लिए कम दूरी की मिसाइलों का ज़िक्र था.
हाल में किए गए टेस्ट ये सबूत हैं कि किम सिर्फ़ लिस्ट में मौजूद हथियार बनाने के लिए काम नहीं कर रहे, इसके लिए सैनिकों को ट्रेनिंग भी दे रहे हैं. उन्होंने परमाणु हमले जैसी स्थिति के लिए भी कुछ ड्रिल किए हैं.
अब किम को ध्यान आकर्षिक करना है. वो चाहते हैं कि दुनिया ध्यान दे कि उन्होंने क्या प्रगति की है. अगर वो चाहते हैं कि उन पर से प्रतिबंध हटाए जाएं, तो ये बहुत ज़रूरी है.
प्रतिबंधों से उत्तर कोरिया के हथियार बनाने के प्लान पर कोई असर नहीं पड़ा है, लेकिन इससे अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है.
प्रतिबंध कम करने को लेकर बातचीत काफ़ी समय से बंद है और दुनिया के एजेंडे में अब उत्तर कोरिया नीचे खिसकता जा रहा है.
दुनिया अब यूक्रेन में जंग को लेकर और चीन के बढ़ते प्रभुत्व को लेकर चिंतित है. अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन का कहना है कि उत्तर कोरिया से प्रतिबंध तभी हटेंगे जब वो अपने सारे परमाणु हथियार को ख़त्म करने के लिए तैयार हो जाएगा.
इसी बीच अमेरिका और दक्षिण कोरिया कोरियाई प्रायद्वीप में अपनी क्षमता को मज़बूत करने के लिए मिलिट्री अभ्यास के लिए राज़ी हुए.
उत्तर कोरिया इससे इतनी नफ़रत करता है कि वो इसका जवाब सैन्य तरीके से दे रहा है. हाल के मिसाइल लॉन्च और ड्रिल के बाद दक्षिण कोरिया ने भी जंगी जहाज़ भेजे और गोलीबारी की.
मुखर हो गए हैं किम
किम को अगर अमेरिका से अपनी शर्तों पर बात करनी है, तो उन्हें साबित करना होगा कि उनका देश ख़तरनाक बन गया है.
पिछले महीने उन्होंने उत्तर कोरिया को एक न्यूक्लियर वेपन स्टेट घोषित किया, एक स्टेटस जो उनके मुताबिक़ अब नहीं बदला जाएगा.
दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय के एक पूर्व सहालकार का मानना है कि हमें इस बात से डरना चाहिए कि वो कितने मुखर हो गए हैं.
उन्होंने कहा कि पहले उत्तर कोरिया अमेरिका के सैन्य अभ्यास के ख़त्म होने का इंतज़ार करता था, फिर जवाब देता था. इस बार वो ऐसे समय में जवाब दे रहा है जब समुद्र में अभ्यास जारी है.
वो कहते हैं, "हमने पहले कभी ऐसी हिम्मत और इतना आक्रमक रवैया नहीं देखा. उत्तर कोरिया एक न्यूक्लियर स्टेट की तरह काम कर रहा है."
अमेरिका और दक्षिण कोरिया की सरकारें मानती हैं कि उत्तर कोरिया ने सातवें परमाणु हथियार का परीक्षण पूरा कर लिया है और अगले रणनीतिक क़दम के लिए इंतज़ार कर रहा है.
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का कॉन्फ्रेंस ख़त्म हो चुका है और अमेरिका में मिड टर्म चुनाव आने वाले हैं, इसलिए उन्हें एक अच्छा मौका मिल सकता है.
दक्षिण कोरिया इसी बीच फिर जंग के डर में जी रहा है और अमेरिका इससे जुड़ रहा है. हो सकता है कि ये किम को एक मौका दे जिनका उन्हें इंतज़ार है.
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