सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को मिले निमंत्रण पर छिड़ा विवाद

इमेज स्रोत, Getty Images
- Author, फ्रैंक गार्डनर
- पदनाम, बीबीसी रक्षा संवाददाता
ब्रिटेन सरकार ने महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय की अंत्येष्टि के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को निमंत्रण दिया है, जिसे लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में नाराज़गी देखी जा रही है.
सीआईए की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि साल 2018 में तुर्की के इस्तांबुल में सऊदी वाणिज्यिक दूतावास में जानेमाने सऊदी पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या कर दी गई थी और उनके शव को टुकड़ों में काट दिया गया था. रिपोर्ट के अनुसार ये हत्या सऊदी क्राउन प्रिंस के आदेश पर हुई थी.
सऊदी क्राउन प्रिंस और सऊदी अरब सरकार ने इन आरोपों से इनकार किया था. लेकिन इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद से पश्चिमी देशों में उन्हें एक ज़ालिम शासक के रूप में देखा गया और उसके बाद से अब तक उन्होंने ब्रिटेन का दौरा भी नहीं किया था.
ब्रिटेन में मौजूद सऊदी दूतावास के एक प्रवक्ता ने पुष्टि की कि इस सप्ताह रविवार को सऊदी क्राउन प्रिंस लंदन पहुंचेंगे. हालांकि एमबीएस के नाम से जाने जाने वाले सऊदी क्राउन प्रिंस महारानी की अंत्येष्टि के कार्यक्रम में शामिल होंगे या नहीं इसकी अभी पुष्टि नहीं हो सकी है.
इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट YouTube समाप्त
सऊदी अरब ब्रिटेन का अहम सहयोगी
जमाल ख़ाशोज्जी की मंगेतर हेतीज चंगेज़ ने कहा है कि ये निमंत्रण महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय की याद पर एक धब्बे की तरह होगा. उन्होंने कहा कि जब सऊदी युवराज लंदन की ज़मीन पर उतरें उन्हें गिरफ़्तार किया जाना चाहिए. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें संशय है कि ऐसी कभी हो सकेगा.
वहीं कैंपेन अगेन्स्ट द आर्म्स ड्रेड नाम के संगठन ने सऊदी क्राउन प्रिंस और खाड़ी देशों के दूसरे तानाशाह मुल्कों पर महारानी की अंत्येष्टि के कार्यक्रम का इस्तेमाल अपने मानवाधिकार रिकॉर्ड्स को "ढंकने" के लिए करने का आरोप लगाया है.
इस संगठन का कहना है कि आठ साल पहले यमन में शुरू हुए तबाही के युद्ध से लेकर अब तक ब्रिटेन सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन को 23 अरब डॉलर के हथियार दे चुका है.
साल 2017 में मोहम्मद बिन सलमान क्राउन प्रिंस बने. तब से लेकर अब तक देश के नेताओं को थोड़ी-बहुत राजनीतिक स्वतंत्रता मिली हुई थी वो भी अब ख़त्म हो गई है. सरकार की आलोचना करने वालों यहां तक कि सोशल मीडिया पर इस तरह का पोस्ट डालने वालों को भी यहां जेल की सज़ा दी जाती है.
लेकिन विडंबना ये है कि ऐसे वक़्त में एक तरफ़ जहां लोगों की आज़ादी छीनने की ख़बरें मिल रही हैं वहीं क्राउन प्रिंस ने सामाजिक उदारीकरण की एक मुहिम शुरू की है. देश में लंबे वक़्त से सिनेमा और सार्वजनिक स्थलों पर मनोरंजन की सुविधाओं पर लगी रोक को हटा दिया गया है.

इमेज स्रोत, AFP PHOTO / SAUDI ROYAL PALACE
क्राउन प्रिंस एमबीएस के आदेश पर अब महिलाओं के लिए गाड़ी चलाना संभव हो गया है. हाल में देश में अंतरराष्ट्रीय स्पोर्ट्स और म्यूज़िक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया है, इसमें जानेमाने डीजे डेविड गुएटा का एक कॉन्सर्ट भी शामिल है.
हालांकि इस सबके बीच इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि मानवाधिकारों के लिए गंभीर आलोचना झेल रहा सऊदी अरब खाड़ी में ब्रिटेन का अहम सहयोगी है. ईरान की आक्रामक विस्तारवाद नीति के ख़िलाफ़ पश्चिमी मुल्क इसे एक सुरक्षा कवच के रूप में देखते हैं.
सऊदी अरब पश्चिमी मुल्कों से हथियार तो ख़रीदता ही है, ये हज़ारों प्रवासी मज़दूरों को रोज़गार देता है, सालाना हज का आयोजन करता है और साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की क़ीमतों को बैलेंस करने में भी मदद करता है. इस सभी कारणों के मद्देनज़र ये समझा जा सकता है कि इस घटना को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई ख़ास प्रतिक्रिया क्यों देखने को नहीं मिल रही है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)














