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इराक़: हिंसा के बाद धर्मगुरु का अल्टीमेटम, 60 मिनट में बंद हो हंगामा वरना...
बग़दाद के सुरक्षित माने जाने वाले इलाके ग्रीन ज़ोन में हिंसा भड़कने के बाद इराक़ के ताक़तवर शिया नेता और मौलवी मुक़्तदा अल-सद्र ने अपने समर्थकों से विरोध प्रदर्शन ख़त्म करने की अपील की है.
उन्होंने अपनी अपील में कहा है, "मैं इराक़ के लोगों से, जो लोग हिंसा से प्रभावित हुए है, उनसे माफी मांगता हूं. मेरा अभी भी यकीन है कि सैडरिस्ट पार्टी अनुशासन को मानती है. इसलिए अगर 60 मिनट के भीतर आप लोग ग्रीन ज़ोन, यहां तक कि संसद के बाहर धरने से भी पीछे नहीं हटे तो मैं आपको और पार्टी दोनों को छोड़ दूंगा."
मुक़्तदा अल-सद्र के राजनीति से संन्यास लेने के एलान के बाद उनके समर्थकों और सुरक्षाकर्मियों के बीच बग़दाद में लगातार दूसरे दिन ज़ोरदार हिंसक झड़प हो रही है. हिंसा में अब तक कम-से-कम 20 लोगों की मौत हो गई है और सैकड़ों लोग घायल बताए जा रहे हैं.
बग़दाद के अलावा बसरा, नजफ़, नासिरिया और हिल्ला शहरों से भी हिंसा की ख़बरें आ रही हैं. हिंसा की शुरूआत मुक़्तदा अल-सद्र के राजनीति से संन्यास लेने के एलान के बाद हुई.
पिछले वर्ष अक्टूबर में इराक़ में हुए संसदीय चुनाव में उनके गुट को सबसे ज़्यादा सीटें मिली थीं, मगर उन्होंने सरकार बनाने के लिए दूसरे ईरान-समर्थित शिया गुटों से वार्ता करने से इनकार कर दिया.
इऱाक़ में 10 महीने बाद भी नई सरकार नहीं बन पाने से कायम राजनीतिक गतिरोध के बीच महंगाई और बेरोज़गारी चरम पर है. इससे लोगों में अंतरिम सरकार के प्रति काफ़ी नाराज़गी है.
सोमवार को मुक़्तदा सद्र के संन्यास के एलाने के बाद राजधानी बग़दाद में रात भर हिंसक घटनाएं होती रहीं. इसे पिछले कुछ सालों में वहाँ हुई सबसे बड़ी हिंसक घटनाओं में से एक बताया जा रहा है.
इराक़ के अंतरिम प्रधानमंत्री और सद्र के सहयोगी मुस्तफ़ा अल-कदीमी ने लोगों से शांति क़ायम करने की अपील की है. बग़दाद के अलावा कई और शहरों में भी हिंसक घटनाएं होने के बाद सेना ने पूरे देश में कर्फ्यू लगाने का एलान कर दिया है.
बग़दाद की सड़कों पर रात भर हिंसक झड़पें होती रहीं. मुक़्तदा अल-सद्र के लड़ाकों और सुरक्षाकर्मियों के बीच जमकर गोलियां चलती रहीं. वहीं लड़ाकों का पता लगाने के लिए छोड़े गए पटाखों से आसमान रात भर रोशन होता रहे.
पूरे देश में कर्फ़्यू
हिंसा की ज़्यादातर घटनाएं शहर के महत्वपूर्ण ग्रीन ज़ोन में घटी हैं. इस इलाक़े में सरकारी इमारतें और विदेशी दूतावास स्थित हैं.
सुरक्षा अधिकारियों ने बताया है कि जो झड़पें हुई हैं उनमें से कई मुक़्तदा अल-सद्र की मिलिशिया संस्था 'पीस ब्रिगेड्स' और इराक़ की सेना के बीच घटी हैं.
सोशल मीडिया पर डाले गए वीडियो में कई लड़ाके रॉकेट से चलाए जाने वाले ग्रेनेड जैसे बड़े हथियार के साथ दिख रहे हैं.
उधर इन घटनाओं के बाद ईरान ने इराक़ से लगने वाली अपनी सीमा को बंद कर दिया है. वहीं कुवैत ने अपने नागरिकों से तत्काल इराक़ छोड़ देने का आग्रह किया है.
समाचार एजेंसी एएफ़पी ने 'डॉक्टरों के हवाले से बताया है कि गोली लगने से मुक़्तदा अल-सद्र के कम-से-कम 20 समर्थकों की मौत हो गई है और क़रीब 350 प्रदर्शनकारी घायल हो गए हैं.
संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा है कि वे इस घटना से चिंतित हैं. हालात सुधारने के लिए उन्होंने तत्काल क़दम उठाने का अनुरोध किया है.
देश के अंतरिम प्रधानमंत्री मुस्तफ़ा अल-कदीमी ने इस घटना के बाद पूरे देश में कर्फ़्यू लगाने का एलान किया है. उन्होंने कैबिनेट की बैठकें निलंबित कर दी हैं. उन्होंने मुक़्तदा अल-सद्र से हिंसा रोकने के लिए दख़ल देने का अनुरोध किया है.
वहीं मुक़्तदा अल-सद्र ने हिंसा रुकने और हथियारों के इस्तेमाल थमने तक उपवास करने का एलान किया है.
इससे पहले सोमवार को मुक़्तदा अल-सद्र ने कहा, ''मैंने पहले ही राजनीतिक मामलों में दख़ल न देने का फ़ैसला लिया था, लेकिन अब मैं अपने रिटायरमेंट और सद्र समर्थक आंदोलन से जुड़े सभी संस्थानों को बंद करने का एलान करता हूं.''
हालांकि उनके आंदोलन से जुड़े मज़हबी संस्थान खुले रहेंगे.
कौन हैं मुक़्तदा अल-सद्र
48 साल के मुक़्तदा अल-सद्र पिछले दो दशक से इराक़ के सार्वजनिक और राजनीतिक परिदृश्य की बड़ी शख़्सियत रहे हैं. उनकी 'मेहदी सेना' देश के पूर्व तानाशाह सद्दाम हुसैन के जाने के बाद इराक़ के सबसे ताक़तवर हथियारबंद संगठन के रूप में उभरी थी.
सद्दाम हुसैन को सत्ता से हटाने के लिए अमेरिका ने मार्च 2003 में इराक़ पर हमला किया था. लेकिन उनके हटने के बाद सद्र की मेहदी सेना ने अमेरिकी और तत्कालीन इराक़ी सेना से जमकर लोहा लिया था.
बाद में उन्होंने अपने संगठन का नामकरण 'पीस ब्रिगेड्स' के रूप में कर दिया. अभी भी यह देश के सबसे बड़े हथियारबंद संगठनों में से एक है जो अब इराक़ के सशस्त्र बलों का हिस्सा है.
मुक़्तदा अल-सद्र ने बेरोज़गारी, बिजली कटौती और भ्रष्टाचार से परेशान इराक़ के आम लोगों को अपने साथ जोड़ने में कामयाबी हासिल की.
वे इराक़ के उन गिने चुने लोगों में से एक हैं, जो बहुत जल्दी सड़कों पर अपने हज़ारों समर्थक उतार सकते हैं और फिर उन्हें लौटा भी सकते हैं.
देश में पिछले 10 महीने से जारी राजनीतिक गतिरोध के बीच जुलाई और अगस्त में संसद पर धावा बोलने के बाद उनके सैंकड़ों समर्थक संसद के बाहर डेरा डाले हुए हैं. उस समय उनके समर्थक संसद के सुरक्षा घेरे को तोड़कर संसद के भीतर घुस गए थे.
प्रदर्शनकारी मोहम्मद अल-सुदानी को प्रधानमंत्री उम्मीदवार के तौर पर नामांकन का विरोध कर रहे थे. उनका मानना है कि वो ईरान के करीबी हैं. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया था.
कभी ईरान के समर्थक रहे सद्र अब उससे दूरी बना चुके हैं. इराक़ के घरेलू मामलों पर से अमेरिका और ईरान का दख़ल ख़त्म करने के लिए उन्होंने बाद में ख़ुद को राष्ट्रवादी नेता के तौर पर पेश किया.
10 महीने से राजनीतिक गतिरोध
इराक़ में पिछले साल अक्टूबर में हुए संसदीय चुनाव में मुक़्तदा अल-सद्र के गठबंधन को सबसे ज़्यादा सीटें मिली थीं.
अक्टूबर 2021 में हुए चुनाव में मुक़्तदा अल-सद्र की पार्टी 73 सीटों के साथ सबसे आगे रही थी. लेकिन, 329 सीटों वाली इराक़ी संसद में सरकार बनाने के लिए 165 सीटें होना ज़रूरी है. लेकिन, मौलाना सद्र के अन्य दलों के साथ काम करने से इनकार करने के चलते गठबंधन की सरकार का गठन नहीं हो पाया.
पिछले 10 महीने से वहाँ सांसद राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री चुने नहीं जा सके हैं. इस वजह से वहाँ राजनीतिक गतिरोध की स्थिति बन गई है और वहाँ न कोई राष्ट्राध्यक्ष है न मंत्रिमंडल. फ़िलहाल वहाँ निवर्तमान प्रधानमंत्री मुस्तफ़ा अल-कदीमी की सरकार देश चला रही है.
अगर वहाँ पिछले चुनाव में जीती पार्टियों के बीच राजनीतिक सहमति नहीं हो पाती है तो कदीमी अगला चुनाव होने तक प्रधानमंत्री बने रह सकते हैं. इससे पहले 2010 में भी इराक़ में ऐसी ही स्थिति बनी थी जब 289 दिनों के गतिरोध के बाद नूरी अल मलिकी दूसरी बार प्रधानमंत्री बने.
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