ब्रिटेन की जासूसी एजेंसियों पर आरोप, भारत को जगतार सिंह जौहल केस में दी जानकारी

MI6 मुख्यालय लंदन
इमेज कैप्शन, लंदन में ब्रिटेन की ख़ुफ़िया एजेंसी एमआई6 का मुख्यालय
    • Author, फ्रैंक गार्डनर
    • पदनाम, बीबीसी सुरक्षा संवाददाता

ब्रिटेन की खुफिया एजेंसियों पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने भारतीय मूल के एक ब्रिटिश नागरिक जगतार सिंह जौहल के बारे में भारतीय अधिकारियों को गुप्त सूचनाएं मुहैया कराई.

भारतीय अधिकारियों ने जौहल पर 'सिख राष्ट्रवाद' से जुड़ी हत्याओं में शामिल होने का आरोप लगाया है. हालांकि जौहल ने कोई भी ग़लत काम करने से इनकार किया है.

ब्रिटिश ख़ुफ़िया एजेंसी पर लगे आरोपों के अनुसार, ग़ैर क़ानूनी ढंग से मुहैया कराई गई इस सूचना के कारण भारत की पंजाब पुलिस ने जगतार सिंह जौहल का 'अपहरण' किया और उन्हें प्रताड़ित किया.

ब्रिटेन में स्कॉटलैंड के डंबर्टन शहर में रहने वाले जगतार सिंह जौहल पाँच साल पहले नवंबर 2017 में भारत आए थे.

उनके परिवार का आरोप है कि उस समय उन्हें एक अनजानी कार में ज़बरदस्ती बिठा लिया गया. तब से वे हिरासत में हैं और दिल्ली की तिहाड़ जेल में क़ैद हैं.

जौहल का आरोप है कि हिरासत के दौरान उन्हें कई दिनों तक कई तरीक़ों से प्रताड़ित किया गया. उन्हें बिजली के झटके भी दिए गए.

ब्रिटेन के कई प्रधानमंत्रियों ने भारत सरकार के सामने जगतार सिंह जौहल का मामला उठाया, लेकिन भारत सरकार ने उन्हें प्रताड़ित करने या उनके साथ बुरा व्यवहार करने के आरोपों से इनकार किया है.

इस साल मई में जौहल पर हत्या की साज़िश रचने और एक चरमपंथी संगठन का सदस्य होने के आरोप औपचारिक तौर पर लगाए गए.

उन्हें अगले महीने अदालत में पेश किया जाएगा. आरोप साबित हुए तो उन्हें मौत की सज़ा भी मिल सकती है.

जगतार सिंह जौहल

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इमेज कैप्शन, जगतार सिंह जौहल

मौत की सज़ा रोकने के लिए काम करने वाली ब्रिटेन की मानवाधिकार संस्था 'रिप्राइव' ने अब बीबीसी के साथ दस्तावेज़ साझा किए हैं. इसमें कहा गया है कि इस बात के पूरे प्रमाण हैं कि जौहल की गिरफ़्तारी ब्रिटेन के खु़फ़िया संस्था की जासूसी के बाद हुई है.

हालांकि ब्रिटेन की सरकार ने इस मामले को कोर्ट में विचाराधीन होने का हवाला देते हुए इस मामले पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है.

रिप्राइव का दावा है कि उसने इस केस से संबंधित कई ब्यौरों का मिलान खु़फ़िया एजेंसियों पर नज़र रखने वाली स्वतंत्र संस्था आईपीसीओ की उस रिपोर्ट से किया है, जिसमें खु़फ़िया एजेंसियों द्वारा किए जाने वाले दुर्व्यवहार की जानकारी दी गई है.

इन्वेस्टिगेटरी पावर्स कमिश्नर ऑफिस की रिपोर्ट के अनुसार- ''जांच के दौरान एमआई5 ने सीक्रेट इंटेलिजेंस सर्विस (एमआई6) के ज़रिए अपने सहयोगी को ख़ुफ़िया सूचना भेजी. 'सब्जेक्ट' को उनके देश में उनके सहयोगी ने गिरफ्तार कर लिया गया. उस व्यक्ति ने ब्रिटिश कॉन्सुलर अधिकारी को बताया कि उसे प्रताड़ित किया गया.''

वैसे इस रिपोर्ट में जगतार सिंह जौहल का नाम नहीं दिया गया है, लेकिन रिप्राइव अपने इस दावे को लेकर बिल्कुल अडिग है कि यह केस जौहल के केस से मिलता है.

संस्था का कहना है कि तारीख़, ब्रिटेन के कई प्रधानमंत्रियों की पैरवी और भारतीय मीडिया में आई जानकारी, इस मिलान के आधार हैं.

इससे पहले भारत के जाने माने अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स ने 2017 में अपनी एक रिपोर्ट में बताया था, ''ब्रिटेन के एक स्रोत द्वारा पंजाब पुलिस को एक प्रमुख व्यक्ति 'जौहल' के बारे में 'अस्पष्ट जानकारी' देने के बाद वे जांच के दायरे में आए.''

भारतीय अधिकारियों ने जौहल पर 'सिक्ख नेशलिज़्म' से जुड़ी हत्याओं में शामिल होने का आरोप लगाया है. हालांकि जौहल ने कोई भी ग़लत काम करने से इनकार किया है.

जगतार सिंह जौहल सबसे दाएं
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कौन हैं जौहल

जगतार सिंह जौहल एक सक्रिय ब्लॉगर हैं और सिखों के लिए काम करते रहे हैं. बताया जाता है कि इस कारण ही भारतीय अधिकारियों की उन पर नज़र गई.

हालांकि उनके भाई गुरप्रीत ने बीबीसी को बताया कि उन्हें ऐसी किसी भी गतिविधि की जानकारी नहीं है, जिसे अवैध माना जा सके.

जौहल का आरोप है कि उन्हें गिरफ़्तार करने के बाद औरों से अलग थलग रखा गया और घंटों तक बेरहमी से पूछताछ की गई. उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि शुरू में उन्हें वकीलों या ब्रिटेन के कॉन्सुलर अधिकारियों से मिलने नहीं दिया गया.

उनका आरोप है कि उनसे कोरे काग़ज़ों पर दस्तख़त करवाए गए और फर्ज़ी तौर पर उनसे गुनाह क़बूल करने का दावा किया गया.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने बताया था कि जब वे इस साल अप्रैल में भारत गए थे, तब उन्होंने अपने भारतीय समकक्ष नरेंद्र मोदी के सामने इस मसले को उठाया था.

उनके पहले की ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरेसा मे ने भी भारत सरकार के सामने इस केस को उठाया था.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने अप्रैल में भारत यात्रा के दौरान अपने भारतीय समकक्ष नरेंद्र मोदी के सामने इस मसले को उठाया था.

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इमेज कैप्शन, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने अप्रैल में भारत यात्रा के दौरान अपने भारतीय समकक्ष नरेंद्र मोदी के सामने इस मसले को उठाया था.

ब्रिटेन की अदालत में जौहल की याचिका

जौहल ने 12 अगस्त को ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय और अटॉर्नी जनरल के खि़लाफ़ वहां के हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है.

इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि ब्रिटेन की ख़ुफ़िया एजेंसियों ने भारतीय अधिकारियों के साथ गोपनीय सूचनाओं को ग़ैर क़ानूनी ढंग से साझा किया. याचिका के अनुसार, यह तब हुआ जबकि इस सूचना के आधार पर प्रताड़ित किए जाने की आशंका थी.

रिप्राइव का कहना है कि इस मामले से यह पता चलता है कि ब्रिटेन की सरकार प्रताड़ना और मौत की सज़ा को लेकर लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को दूर करने में नाकाम रही है.

उसका यह भी कहना है कि ब्रिटेन ने अपने पुराने अनुभव से नहीं सीखा, जब एमआई6 की सूचना के आधार पर लीबिया के असंतुष्ट अब्दुलहकीम बेलहाज को प्रताड़ित किया गया.

ब्रिटेन के ख़ुफ़िया एजेंसियों पर लगे ताज़ा अरोपों पर वहां के सांसद स्टीव बेकर ने कहा है, ''यह भयावह मामला, जहां ब्रिटेन की खुफिया जानकारी को क्रूर यातना से जोड़ा गया है, जो स्पष्ट रूप से दिखाता है कि नेशनल सिक्योरिटी बिल में सुधार की ज़रूरत है.''

सरकार के जिन तीनों विभाग पर इस केस में आरोप लगाए गए हैं, उनकी ओर से जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा है, ''अभी चल रहे क़ानूनी मामले में कोई प्रतिक्रिया देना उचित नहीं होगा.''

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