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चीन ने की इस छोटे से देश से डील, उड़ी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड की नींद
चीन ने सोलोमन आइलैंड्स के साथ एक सुरक्षा समझौता किया है जिसे लेकर ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड और अमेरिका ने चिंता प्रकट की है.
ये समझौता इस हफ़्ते हुआ है, जिसके बाद इन देशों में डर बढ़ गया है कि चीन प्रशांत सागर में स्थित इस देश में नौसैनिक अड्डा बना सकता है.
सोलोमन आइलैंड्स को सबसे ज़्यादा मदद देनेवाले ऑस्ट्रेलिया ने आख़िर-आख़िर तक इस समझौते को रुकवाने की कोशिश की थी मगर सोलोमन आइलैंड्स इसके लिए तैयार नहीं हुआ.
सोलोमन आइलैंड्स के प्रधानमंत्री मानासे सोगोवारे ने कहा कि इस समझौते से क्षेत्र में 'शांति और सौहार्द को कोई नुक़सान नहीं पहुंचेगा'.
उन्होंने कहा कि वो समझौते की शर्तों को जाहिर नहीं करेंगे. उन्होंने जोर दिया किया ये राष्ट्र हित में फ़ैसला लिया गया है.
समझौते के लीक हुए एक मसौदे के मुताबिक चीन के जंगी जहाजों को सोलोमन आइलैंड्स में ठहरने की इजाजत होगी और बीजिंग तनाव की स्थिति में सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए यहां सुरक्षा बल भेज सकता है. इस मसौदे कि ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने पुष्टि की है.
लगभग सात लाख की आबादी वाला सोलोमन आइलैंड्स द्वीपों से समूहों से बना एक छोटा सा देश है जहाँ के कई टापुओं पर विशाल ज्वालामुखी हैं.
हाल के सालों में प्रधानमंत्री सोगोवारे के खिलाफ यहां विरोध प्रदर्शन हुए हैं. पिछले साल नवंबर में ऑस्ट्रेलिया ने राजधानी होनिआरा में हुए दंगों को रोकने के लिए सुरक्षा बल भी भेजे थे. अब इसी तरह चीन भी सोलोमन आइलैंड्स में सुरक्षा बल भेज सकता है.
सोलोमन आइलैंड्स और चीन के संबंध
सोलोमन आइलैंड्स की सरकार ने 2019 में ताइवान से अपने कूटनीतिक संबंध तोड़ा और चीन के साथ चले गए.
सोलोमन आइलैंड्स और ताइवान के संबंध 36 साल पुराने थे. मगर चीन कहता रहा है कि यदि कोई देश उसके साथ कूटनीतिक संबंध रखना चाहता है तो उसे ताइवान को औपचारिक तौर पर मान्यता देना बंद करना होगा.
पिछले वर्ष नवंबर में सोलोमन आइलैंड्स में भारी विरोध हुआ और प्रदर्शनकारियों ने संसद पर धावा बोल प्रधानमंत्री को हटाना चाहा. हंगामा तीन दिन तक होता रहा.
विपक्ष ने तब आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री अपनी राजनीति को मज़बूत करने के लिए चीन से पैसे ले रहे हैं और वो एक "विदेशी ताक़त के लिए काम कर रहे हैं".
वहीं प्रधानमंत्री सोगोवारे का कहना था कि उन्होंने चीन के साथ कूटनीतिक संबंध इसलिए बनाए क्योंकि चीन एक आर्थिक महाशक्ति है.
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी मंगलवार को इस बात की पुष्टि की है कि समझौते के प्रावधानों में 'सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने' का ज़िक्र है.
ऑस्ट्रेलिया की विदेश नीति की असफलता
ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री मैरिस पैन और पैसिफिक मंत्री ज़ेड सिसिलजिया ने कहा कि इस समझौते को बहुत निराशाजनक कहा है. उन्होंने कहा कि ''वो समझौते की पारदर्शिता को लेकर चिंतित हैं.''
उन्होंने कहा, ''हमारा यही मानना है, ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्र हित के नज़रिए से भी कि प्रशांत क्षेत्र परिवार अपनी सुरक्षा ज़रूरतें पूरा करने के लिए काफ़ी है.''
ऑस्ट्रेलिया में विपक्ष ने सोलोमन आइलैंड्स और चीन के बीच इस समझौते को 80 साल में विदेश नीति की सबसे बढ़ी असफलता कहा है.
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिस ने इस बात से इनकार किया है कि सोलोमन आइलैंड्स के साथ राजनयिक रिश्तों पर कोई असर पड़ा है. दरअसल, ऑस्ट्रेलिया में चुनाव होने वाले हैं जिसके चलते भी प्रधानमंत्री की मुश्किलें बढ़ी हुई हैं.
उन्होंने कहा कि वो सोलोमन आइलैंड्स के नेताओं को ये नहीं बता सकते कि उन्हें क्या करना चाहिए और क्या नहीं.
न्यूज़ीलैंड के विदेश मंत्री ननाया महुता ने भी इस समझौते को लेकर दुख जाहिर किया.
सोलोमन आइलैंड्स ने पिछले महीने इस बात की पुष्टि कर दी थी कि वो चीन के साथ सुरक्षा समझौता करने जा रहा है.
इससे ऑस्ट्रेलिया की खासतौर पर मुश्किलें बढ़ गई हैं जो सोलोमन आइलैंड्स से सिर्फ़ दो हज़ार किमी. दूर है.
आने वाले दिनो में अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अधिकारी भी उच्च-स्तरीय वार्ता के लिए सोलोमन आइलैंड्स पहुंचने वाले हैं.
सोलोमन आइलैंड्स में चीन के बढ़ते दखल के बाद अमेरिका ने भी यहां अपना दूतावास खोलने का फ़ैसला किया था. ये दूतावास 1993 से बंद था.
अमेरिका के एक अधिकारी ने कहा था कि चीन सोलोमन्स के राजनीतिक और व्यावसायिक नेताओं के साथ "संपर्क साधने की जी-जान से कोशिश कर रहा है" और उसकी हरकतें "वाक़ई चिंताजनक" हैं.
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