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अमेरिका ने अपनी इंडो पैसिफिक रिपोर्ट में भारत को लेकर कही कई बातें
अमेरिका ने हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) रणनीति पर अपनी रिपोर्ट जारी की है, जिसमें कहा गया है कि भारत इस समय अहम भूराजनीतिक चुनौतियों से घिरा हुआ है.
ये चुनौती ख़ासतौर पर चीन और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर उसके रुख़ से मिल रही है.
यह रिपोर्ट शुक्रवार को जारी की गई है और यह राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन की पहली क्षेत्रीय विशिष्ट रिपोर्ट है.
इस रिपोर्ट में जहाँ भारत और अमेरिका में बढ़ते सहयोग पर ज़ोर दिया गया है वहीं, चीन पर जमकर निशाना साधा गया है.
ये रिपोर्ट हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका की स्थिति को मज़बूत करने और इस प्रक्रिया में भारत की मज़बूती के साथ क्षेत्रीय नेतृत्व का समर्थन करने की बात करती है.
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने ये रिपोर्ट शेयर करते हुए ट्वीट किया, ''हमारी हिंद-प्रशांत रणनीति एक ऐसे क्षेत्र के लिए एक दृष्टिकोण तय करती है, जो स्वतंत्र और मुक्त, जुड़ा हुआ, समृद्ध, सुरक्षित और लचीला हो. हिंद-प्रशांत में एक राष्ट्र के तौर पर हम उस विजन को साकार करने के लिए अपने सहयोगियों और भागीदारों के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.''
व्हाइट हाउस ने कहा, ''हम एक रणनीतिक साझेदारी बनाना जारी रखेंगे, जिसमें अमेरिका और भारत दक्षिण एशिया में स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए एक साथ और क्षेत्रीय समूहों के ज़रिए काम करते हैं.''
''साथ ही हम स्वास्थ्य, अंतरिक्ष और साइबरस्पेस जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग करते हैं, हमारे आर्थिक और तकनीकी सहयोग को गहरा करने और एक मुक्त, खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बनाए रखने पर काम करते हैं.''
अपनी रिपोर्ट में अमेरिका ने भारत को समान विचारधारा वाला साझेदार भी कहा है.
भारत की हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भूमिका
व्हाइट हाउस ने अपने बयान में कहा, ''हम मानते हैं कि भारत दक्षिण एशिया और हिंद महासागर में एक समान विचारधारा वाला साझेदार है. वह दक्षिण पूर्व एशिया से सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है. वह क्वॉड और अन्य क्षेत्रीय मंचों के लिए प्रेरक शक्ति और क्षेत्रीय विकास के लिए एक इंजन की तरह है.''
समाचार एजेंसी पीटीआई से एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने पहचान छुपाने की शर्त पर कहा कि भारत महत्वपूर्ण चुनौतियों से जूझ रहा है.
अधिकारी ने कहा, ''भारत अहम चुनौतियों का सामना कर रहा है. एलएसी पर चीन के व्यवहार का भारत पर बड़ा प्रभाव पड़ा है. हमारे नज़रिए से हम दूसरे लोकतांत्रिक देशों के साथ काम करने के कई अवसर देखते हैं. एक ऐसे देश के साथ काम करना जो वैश्विक जनमानस को समझता है ताकि क्षेत्र में जरूरी मुद्दों पर काम किया जा सके.''
ट्रंप प्रशासन की भी तारीफ़
इस रिपोर्ट को जारी करते हुए अधिकारी ने कहा कि पूर्व अमेरिकी सरकारों, जिसमें ट्रंप सरकार भी शामिल है, ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बेहतरीन काम किया है.
ये रिपोर्ट ऐसे समय पर जारी की गई है जब क्वॉड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक चल रही है. क्वॉड देशों में अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं. इन देशों ने शुक्रवार को क्षेत्र में चीन के बढ़ते असर पर चिंता जताई.
रिपोर्ट में चीन को लेकर कहा गया है कि वह आर्थिक, कूटनीतिक, सैन्य और तकनीकी ताक़त के बल पर हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर प्रभाव डाल रहा है. वह दुनिया की सबसे प्रभावशाली शक्ति बनना चाहता है.
चीन पर प्रहार
इसमें कहा गया है कि चीन की आक्रामकता दुनिया भर में फैली हुई है, लेकिन यह हिंद-प्रशांत में सबसे तेज़ है.
ऑस्ट्रेलिया पर आर्थिक दबाव से लेकर भारत के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर संघर्ष, ताइवान पर बढ़ते दबाव और पूर्वी-दक्षिण चीन सागर में पड़ोसियों को डराने-धमकाने तक, इस क्षेत्र में हमारे सहयोगी और भागीदारों को चीन के इस व्यवहार को सबसे ज़्यादा झेलना पड़ता है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का भी उल्लंघन कर रहा है. जिसमें नेविगेशन की स्वतंत्रता और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, समृद्धि लाने वाले अन्य सिद्धांत शामिल हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, ''अगले दशक में हमारे सामूहिक प्रयास यह तय करेंगे कि क्या चीन उन नियमों और मानदंडों को बदलने में सफल होता है, जिनसे हिंद-प्रशांत क्षेत्र और दुनिया को फ़ायदा हुआ है.''
''अमेरिका अपने प्रयासों के तहत हमारी मज़बूती की नीव में निवेश कर रहा है, विदेशों में अपने सहयोगियों और भागीदारों के साथ अपने दृष्टिकोण को मिलाने की कोशिश कर रहा है और हमारे साझा हितों, भाविष्य के दृष्टिकोण की रक्षा के लिए चीन से प्रतिस्पर्धा कर रहा है.''
रिपोर्ट कहती है, ''हम अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मज़बूत करेंगे, इसे साझा मूल्यों पर आधारित रखेंगे और 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना करने के लिए इसमें सुधार करेंगे. हमारा उद्देश्य चीन को बदलना नहीं है बल्कि उस रणनीतिक वातावरण को आकार देना है, जिसमें वह काम करता है. साथ ही दुनिया में प्रभाव का संतुलन बनाना है जो अमेरिका, हमारे सहयोगियों और भागीदारों के अधिकतम अनुकूल हो.''
रिपोर्ट में कहा गया है कि 75 सालों से संयुक्त राज्य अमेरिका ने क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि का समर्थन करने के लिए एक मज़बूत और निरंतर रक्षा उपस्थिति बनाए रखी है. हम उस भूमिका का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रहे हैं. साथ ही अपने हितों की रक्षा करने और अमेरिकी क्षेत्र व अपने सहयोगियों एवं भागीदारों के ख़िलाफ़ आक्रामकता को रोकने के लिए अपनी क्षमताओं को बढ़ा रहे हैं.
एकजुट विरोध को बढ़ाना
रिपोर्ट के मुताबिक क्षेत्रीय आक्रामकता के ख़िलाफ़ एकजुटता को बढ़ाने पर ज़ोर दिया गया है. इस एकजुटता के लिए सहयोगियों और भागीदारों के साथ सहयोग को गहरा करना शामिल है.
साथ ही ताइवान जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता बनाए रखना. हमारे कोरियाई और जापानी सहयोगियों के साथ विस्तारित प्रतिरोध और सहयोग को मज़बूत करना और कोरियाई प्रायद्वीप के पूर्ण ग़ैर-परमाणुकरण को आगे बढ़ाना शामिल है.
एक सवाल के जवाब में वरिष्ठ अधिकारी ने संवाददाताओं से कहा कि अमेरिका की पिछली चार सरकारों ने भारत के साथ संबंध सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
अधिकारी ने कहा, ''क्वॉड में भारत की भूमिका बेहद अहम है जिसमें क्षेत्रीय मुद्दों पर खुलकर बोलने की क्षमता, ज़रूरी सार्वजनिक वस्तुओं को वितरित करने के लिए मिलकर काम करना और सहयोग के तरीक़ों को बढ़ाना भी शामिल है.''
वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारत कई मायनों में ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों की तुलना में बहुत अलग जगह रखता है.
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