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मोस्कवा युद्धपोत के डूबने का रूस-यूक्रेन युद्ध पर क्या असर होगा?
रूस का युद्धपोत मोस्कवा काले सागर में 'गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त' होने के बाद डूब गया है. जहाज़ के डूबने की बात तक रूस और यूक्रेन सहमत हैं, लेकिन इसकी वजहों को लेकर दोनों में मतभेद हैं.
रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि जहाज़ पर रखे गए गोला-बारूद में आग लगने की वजह से उसे नुकसान पहुंचा था जिसके बाद उसे बंदरगाह लाया जा रहा था लेकिन रास्ते में यह डूब गया.
वहीं, यूक्रेन का दावा है कि उसने नैपच्यून मिसाइल से इस युद्धक जहाज पर हमला किया था. अमेरिकी अधिकारियों ने नाम ज़ाहिर न करने की शर्त पर अमेरिकी मीडिया को बताया है कि वे यूक्रेन के दावे पर भरोसा करते हैं.
ग़ौरतलब है कि रूस के इस युद्धक जहाज़ पर 510 नौसैनिक तैनात थे. समुद्र के रास्ते यूक्रेन के ख़िलाफ़ अभियान का नेतृत्व इसी जहाज़ से हो रहा था. इस वजह से यह जहाज एक अहम सैन्य एवं प्रतीकात्मक निशाना था.
रूस ने यूक्रेन पर 24 फरवरी को जब हमला किया, तो उसी दिन मोस्कवा चर्चा में आ गया था. उसने काला सागर स्थित 'स्नेक' द्वीप की रक्षा में लगे यूक्रेनी सैनिकों के छोटे-से दल को सरेंडर करने को कहा था. लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया था.
और जवाब में जो कुछ कहा था, उसका मतलब कुछ ऐसा था - 'भाड़ में जाओ'.
बारूद में विस्फोट या मिसाइल हमला?
मोस्कवा के डूबने से पहले रूस के रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी करके कहा था कि "जहाज गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया है और सभी नौसैनिकों को बचा लिया गया है."
गुरुवार दोपहर रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि जहाज़ पर आग लग गई थी जिस पर काबू पा लिया गया है और अब उसे बंदरगाह लाया जा रहा है.
इसके बाद एक और बयान जारी करके कहा गया कि समुद्र में तूफ़ान जैसी स्थिति पैदा होने की वजह से जहाज डूब गया. बयान के अनुसार बंदरगाह लाते वक़्त "जहाज के ढांचे को नुकसान पहुंचने की वजह से संतुलन बिगड़ गया."
आख़िर में रूस ने जहाज डूबने के लिए गोला-बारूद में लगी आग को ज़िम्मेदार ठहराया और किसी मिसाइल हमले का ज़िक्र नहीं किया.
लेकिन इस युद्धक जहाज़ के डूबने की ज़िम्मेदारी यूक्रेन ने ली है. उसने दावा किया है कि उसने इस जहाज़ को यूक्रेन में ही बनाई गयी नेप्च्यून मिसाइलों से निशाना बनाया है.
जहाज़ डूबने से पहले यूक्रेनी अधिकारियों ने फ़ेसबुक पर लिखे एक पोस्ट में बताया था कि युद्धपोत पर हो रहे विस्फ़ोट और ख़राब मौसम के कारण युद्धपोत के चालक दल के सदस्यों को वहां से निकालने में काफ़ी मुश्किलें हुई.
बीते शुक्रवार, अमेरिकी अधिकारियों ने भी कहा था कि यूक्रेन की दो नैप्च्यून मिसाइलों ने इस जहाज़ पर हमला किया था. हालांकि इस हमले में कितने लोग हताहत हुए इसकी जानकारी नहीं दी गई. रूस ने अब तक किसी नौसैनिक की मौत होने की बात स्वीकार नहीं की है.
बीबीसी इन दावों की पुष्टि नहीं करता है.
शनिवार को रूसी रक्षा मंत्रालय ने नौसैनिकों का एक वीडियो फुटेज जारी किया जिसमें उसने दावा किया कि ये मोस्कवा जहाज़ का चालक दल था. इस वीडियो में सैनिक क्राइमिया के शहर सेवास्तोपोल में परेड में हिस्सा लेते दिख रहे हैं.
मोस्कवा का इतिहास
यह युद्धपोत मूलत: सोवियत संघ के जमाने में बना और इसने अस्सी के दशक में अपने मिशन की शुरुआत की थी. यह साल 2000 से ही काले सागर में रूस का प्रतिनिधित्व कर रहा है.
2014 में क्राइमिया को कब्ज़े में लेने के बाद से ही काले सागर में रूसी सेना का दबदबा रहा है. काले सागर में रूस के नौसेना बेड़े हमेशा ही प्रभावी रहे हैं.
मौजूदा संघर्ष के दौरान भी काले सागर में मौजूद इस बेड़े से यूक्रेन में कहीं भी मिसाइल दागी जा सकती है. इसके साथ ही मारियुपोल को अपने क़ब्ज़े में लेने के प्रयासों में भी इन नौसेना बेड़ों का काफी महत्व रहा है.
यूक्रेन के साथ चल रहे युद्ध में मोस्कवा को यूक्रेन के दक्षिणी शहर 'मायकोलाइव' के पास तैनात किया गया था. मालूम हो कि इस शहर में रूस ने हाल में भारी बमबारी की है.
इससे पहले रूस ने इस युद्धपोत को सीरिया के संघर्ष में तैनात किया था. वहां इसने सीरिया में मौजूद रूसी सेना को नौसैनिक सुरक्षा प्रदान की थी.
दावा किया जाता है कि इस युद्धपोत पर कथित तौर पर 16 वल्कन एंटी-शिप मिसाइलों के अलावा कई एंटी-सबमरीन और माइन-टॉरपीडो जैसे हथियार भी मौजूद थे.
ये भी कहा जा रहा है कि यदि इस युद्धपोत पर यूक्रेन के हमले की पुष्टि हो सकी तो दूसरे विश्व युद्ध के बाद दुश्मन के हमले के बाद डूबने वाला यह सबसे बड़ा जंगी जहाज होगा. इस युद्धपोत का वज़न 12,490 टन बताया जाता है.
यूक्रेन पर हमले के बाद रूस ने अपना यह दूसरा बड़ा जहाज़ खोया है. इससे पहले मार्च में यूक्रेन के हमले से 'सेराटोव' लैंडिंग जहाज बर्दियांस्क के बंदरगाह में बर्बाद हो गया था.
कितना मजबूत था मोस्कवा
बीबीसी से बात करते हुए इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फ़ॉर स्ट्रेटजिक स्टडीज़ से जुड़े नेवल एक्सपर्ट जोनाथन बेनथम ने बताया है कि मोस्कवा एक स्लावा-क्लास का युद्धक जहाज़ था जो कि रूस की एक्टिव फ़्लीट का सबसे सुरक्षित माना जाने वाला जहाज था.
ये जहाज़ ट्रिपल टियर एयर डिफेंस सिस्टम से लैस था जिसे ठीक से इस्तेमाल किए जाने पर नैप्च्यून से बचने के तीन मौक़े मिल सकते हैं.
मीडियम और शॉर्ट-रेंज डिफेंस क्षमताओं के अतिरिक्त यह छह शॉर्ट-रेंज क्लोज़-इन वेपन सिस्टम को इस्तेमाल कर सकता है.
बैनथम के मुताबिक़, मोस्कवा पर 360 डिग्री एंटी एयर डिफेंस कवरेज़ होनी चाहिए थी. वह कहते हैं, "क्लोज़-इन वेपन सिस्टम एक मिनट में 5000 राउंड फायर कर सकता है जो कि इस युद्धपोत के चारों ओर एक तरह का रक्षा कवच बना सकता है. ये इस जहाज़ का आख़िरी सुरक्षा घेरे जैसा है."
वो कहते हैं, "अगर ये हमला एक मिसाइल से किया गया है तो ये रूसी सरफेस फ़्लीट के आधुनिकीकरण की क्षमताओं पर सवाल उठाता है: कि क्या उसके पास पर्याप्त गोला-बारूद था, या इसमें इंजीनियरिंग से जुड़ी खामियां थीं. क्योंकि तीन स्तरीय एंटी-एयर डिफेंस सिस्टम के बाद इस युद्धक जहाज़ पर हमला करना बेहद मुश्कल होता."
नेप्च्यून मिसाइलों की ख़ासियत
यूक्रेन का दावा है कि उसके दो नेप्च्यून मिसाइलों ने रूस के प्रमुख युद्धपोत को निशाना बनाया है.
साल 2014 में क्राइमिया पर क़ब्ज़ा करने के बाद काले सागर में रूस के बढ़ते नौसैनिक ख़तरे के जवाब में कीएव के सैन्य इंजीनियरों ने इस मिसाइल सिस्टम को तैयार किया था.
कीएव पोस्ट के अनुसार, पिछले साल मार्च महीने में यूक्रेन की नौसेना को 300 किलोमीटर रेंज पर निशाना लगाने वाली नेप्च्यून मिसाइलों की पहली खेप मिली थी.
रूस के हमले के बाद यूक्रेन को पश्चिमी देशों से सैन्य मदद और हथियार मिल रहे हैं. इस सहायता में 10 करोड़ डॉलर के एंटी-एयरक्राफ़्ट और एंटी टैंक मिसाइलें भी शामिल हैं. ब्रिटेन ने पिछले सप्ताह ही घोषणा की थी वो ये सारी सहायता भेज रहा है.
संघर्ष बढ़ने की आशंका
इस युद्धक जहाज़ के नष्ट होने के बाद यूक्रेन और रूस के बीच बीते 50 दिनों से जारी संघर्ष में एक नया दौर शुरू होने की आशंका जताई जा रही हैं. इसकी बानगी कीएव एवं लवीव पर हुए ताजा हमलों में मिलती है.
रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीएव और लवीव पर किए ताजा हमलों में यूक्रेन के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है.
रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता आइगोर कोनशेन्को़फ ने बताया है कि बेहद सटीक निशाना लगाने में सक्षम मिसाइलों से 16 ठिकानों पर हमला किया गया है. इन ठिकानों नें नेप्च्यून मिसाइल बनाने की फैक्ट्री से लेकर हथियारों की फैक्ट्री और वेयरहाउस शामिल हैं.
इसके साथ ही निप्रो में मौजूद बबीसी संवाददाता टॉम बेटमेन की ख़बर के मुताबिक़, रूस आगामी सोमवार से मारियुपोल आने औऱ शहर से बाहर जाने को पूरी तरह प्रतिबंधित करने की योजना बना रहा है.
मारियुपोल के मेयर पेट्रो एंड्रीश्चेंको ने टेलिग्राम पर बताया है कि रूसी सैन्यबल 18 अप्रैल से लोगों के शहर में घुसने और निकलने पर प्रतिबंध लगाने की योजना बना रहे हैं.
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार सैमुअल रमानी ने ट्विटर पर लिखा है कि मोस्कवा के नष्ट होने की वजह से रूस में "स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन" को यूक्रेन के साथ युद्ध का औपचारिक दर्जा दिए जाने की मांग उठने लगी है.
कहा जा रहा है कि अगर रूस ये रास्ता अख़्तियार करता है तो इस युद्ध में ज़्यादा सैनिकों की भर्ती करने से लेकर अपने सहयोगियों से मदद लेने जैसे विकल्प खुल सकते हैं. हालांकि, इस मुद्दे पर रूस की ओर से किसी तरह का आधिकारिक बयान नहीं आया है.
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