पाकिस्तान में गिरी इमरान ख़ान सरकार, सोमवार को चुना जाएगा अगला पीएम

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पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में अविश्वास प्रस्ताव सफल रहने के बाद प्रधानमंत्री इमरान ख़ान सत्ता से बाहर हो गए हैं.
शनिवार देर रात नेशनल असेंबली में उनकी सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग हुई जिसमें 174 सदस्यों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया.
इमरान ख़ान ने दावा किया है कि उन्हें सत्ता से बाहर निकालने के लिए अमेरिका के नेतृत्व में साजिश रची गई थी. उन्होंने किसी भी नई सरकार को स्वीकार करने से इनकार किया है.
पाकिस्तान के इतिहास में यह पहली बार है कि किसी प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव सफल रहा है.
इसके बाद अब सोमवार को पाकिस्तान असेंबली का एक अहम सत्र होने वाला है जिसमें नया प्रधानमंत्री चुना जाना है. नए प्रधानमंत्री अगले चुनावों तक यानी अक्तूबर 2023 तक कार्यभार संभालेंगे.
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अविश्वास प्रस्ताव
असेंबली में अविश्वास प्रस्ताव के सफल होने के बाद सदन को संबोधित करते हुए पीएमएल-एन के अध्यक्ष शाहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि आज पाकिस्तान संविधान और क़ानून को फिर से स्थापित करना चाहता है.
पीएमएल-एन के अध्यक्ष शाहबाज़ शरीफ़ ने कहा है कि हम किसी से बदला नहीं लेंगे लेकिन क़ानून अपना काम करेगा.
नेशनल असेंबली में अविश्वास प्रस्ताव के सफल होने के बाद सदन को संबोधित करते हुए पीपीपी अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने कहा कि 10 अप्रैल का ऐतिहासिक महत्व है.
उन्होंने सदन को याद दिलाया कि 10 अप्रैल को ही सदन ने 1973 का संविधान पारित किया था. उन्होंने कहा, "पुराने पाकिस्तान में आपका स्वागत है!"
वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल ख़ालिद जावेद ख़ान ने इस्तीफ़ा दे दिया है.

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वोटिंग से पहले असेंबली के अध्यक्ष ने दिया इस्तीफ़ा
वोटिंग से पहले नेशनल असेंबली के अध्यक्ष असद कैसर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया.असद कैसर के बाद अब पीएमएल-एन नेता अयाज़ सादिक नेशनल असेंबली के सत्र की अध्यक्षता कर रहे हैं.
असद कैसर ने कहा, "ज़मीनी वास्तविकताओं और घटनाओं को देखते हुए, मैंने तय किया है कि जो दस्तावेज़ मेरे पास पहुंचे हैं, मैं विपक्ष के नेता से अनुरोध करूंगा कि इसे मेरे कार्यालय में रखा जाए, मैं इसे सुप्रीम कोर्ट में भेजूंगा. मुझे इस देश की संप्रभुता के लिए खड़े होने की ज़रूरत है और मैंने फैसला किया है कि मैं अब अध्यक्ष नहीं बन सकता."
नए प्रधानमंत्री का चुनाव
इसी के साथ ही पीएमएल-एन के नेता शाहबाज़ शरीफ़ का पाकिस्तान का नया पीएम बनना तय माना जा रहा है. शाहबाज़ शरीफ़ अभी पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता हैं.
सोमवार को इस संबंध में सदन की एक बैठक बुलाई गई है. इस बैठक में नए प्रधानमंत्री के नाम पर मुहर लग सकती है.
नेशनल असेंबली के कार्यकारी अध्यक्ष अयाज़ सादिक ने कहा है कि रविवार स्थानीय समय 11.00 तक (06.00 जीएमटी) उम्मीदवारों को अपना नामांकन दाखिल करना होगा.
पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान रहे इमरान ख़ान 2018 में देश के प्रधानमंत्री बने और उन्होंने भ्रष्टाचार से लड़ने और अर्थव्यवस्था में सुधार का वादा किया.
लेकिन आर्थिक संकट में घिरे पाकिस्तान के लिए मुश्किलें बढ़ती गईं. बीते साल मार्च में उनकी पार्टी के कई नेताओं ने पार्टी छोड़ दी थी जिसके बाद उनके लिए एक नया राजनीतिक संघर्ष शुरू हो गया था.
बीबीसी संवाददाता सिकंदर किरमानी कहते हैं कि माना जाता है कि इमरान ख़ान को पाक सेना का समर्थन हासिल था लेकिन अब पर्यवेक्षकों का कहना है कि सेना से उनकी दूरियां बढ़ी हैं.
इमरान ख़ान बार-बार ये आरोप लगाते रहे हैं कि देश का विपक्ष विदेशी ताकतों के साथ मिल कर काम कर रहा है. उनका कहना है कि रूस और चीन के मामले में उन्होंने अमेरिका के साथ खड़े होने से इनकार कर दिया था जिसके बाद उन्हें सत्ता से निकालने के लिए अमेरिका के नेतृत्व में साजिश रची जा रही थी.
अमेरिका ने कहा है कि इमरान ख़ान के आरोपों में 'कोई सच्चाई' नहीं है और कहा है कि उन्होंने इसके पक्ष में कभी कोई सबूत नहीं दिया है.
यूक्रेन के ख़िलाफ़ युद्ध छिड़ने के बाद इमरान ख़ान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाक़ात करने रूस पहुंचे थे.

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किसने क्या कहा
इस मामले में मरियम नवाज़ ने ट्वीट किया है. उन्होंने लिखा है,"नवाज़ शरीफ़ साहब, हर दबाव के खिलाफ़ आपका सब्र जीत गया."
फ़ैसल सब्जवारी का कहना है कि तेल की कीमतें नई सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी.
इस अवसर पर बोलते हुए नेशनल असेंबली के सदस्य मोहसिन डावर ने कहा कि 2018 में हम पर थोपी गई इस हाइब्रिड सरकार से आज मुक़्ति मिली है.
उन्होंने कहा कि जो सरकार बैसाखी के सहारे सत्ता में आने की कोशिश करती है, यही उनकी किस्मत है. उन्होंने कहा कि पिछले तीन साल मीडिया और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए सबसे खराब रहे.
वहीं, पीटीआई के अली मोहम्मद खान ने कहा, "मुझे खुशी है कि मैं जिस शख्स के साथ खड़ा हूं, उसने सरकार को कुर्बान कर दिया, लेकिन गुलामी को स्वीकार नहीं किया."
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