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पाकिस्तान राजनीतिक संकट: इमरान ख़ान के लिए आगे की राह कैसी होगी?
पाकिस्तान में इमरान ख़ान सरकार को लेकर चल रहे राजनीतिक उथलपुथल ने पूरी दुनिया की निगाहें अपनी ओर खींची हैं. बीते कुछ दिनों से चल रहे पाकिस्तान के राजनीतिक घटनाक्रम से जुड़े कई तरह के सवाल भी आपके मन में आ रहे होंगे. यहां हम आपके उन कुछ सवालों के जवाब लाए हैं.
गुरुवार (7 अप्रैल, 2022) को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस उमर अता बांदियाल की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने संसद के डिप्टी स्पीकर के फ़ैसले को असंवैधानिक बताते हुए संसद को बहाल करने का फ़ैसला सुनाया और कहा है कि 9 अप्रैल को सदन की बैठक बुलाई जाए.
पाकिस्तान में क्या चल रहा है?
इस फ़ैसले के साथ ही पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की मुश्किलें बढ़ गई हैं. माना जा रहा है कि वो अब शनिवार तक अपनी सत्ता गंवा सकते हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल असेंबली को बहाल करने के साथ ही ही स्पीकर को शनिवार को असेंबली का सत्र बुलाने का आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा है कि प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव के नतीजे के बिना सत्र को स्थगित नहीं किया जा सकता.
विपक्ष के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को लोकतंत्र और संविधान की जीत बताया है.
इससे पहले रविवार (3 अप्रैल, 2022) को विपक्ष के नेता प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को सत्ता से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लेकर आए थे. लेकिन प्रस्ताव पर बहस और वोटिंग से पहले ही डिप्टी स्पीकर ने सबको हैरान करते हुए प्रस्ताव को ख़ारिज करते हुए कहा था कि एक बाहरी देश के साथ "स्पष्ट सांठगांठ" करके सरकार बदलने की कोशिश की जा रही है.
मतदान से पहले इमरान ख़ान ने विपक्ष पर विदेशी शक्तियों के साथ मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा था कि अमेरिका के साथ मिलकर उन्हें हटाने की साज़िश की गई है.
उन्होंने कहा था कि ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि उन्होंने रूस और चीन के ख़िलाफ़ मुद्दों पर उनके साथ खड़े होने से इनकार कर दिया. अमेरिका ने इन आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा कि इसमें कुछ सच्चाई नहीं है.
प्रस्ताव ख़ारिज होने के बाद प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने राष्ट्रपति आरिफ़ अल्वी से मुलाक़ात कर नेशनल असेंबली को भंग करने की सलाह दी थी. राष्ट्रपति ने इस सलाह पर अमल करते हुए नेशनल असेंबली भंग कर दी थी और अगले 90 दिन में मध्यावधि चुनाव कराना तय हुआ था.
विपक्षी पार्टियों ने डिप्टी स्पीकर के फ़ैसले को असंवैधानिक बताया और सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया था. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार की देर शाम अपना फ़ैसला सुनाया और डिप्टी स्पीकर के निर्णय को असंवैधानिक करार देते हुए सदन को बहाल करने और 9 अप्रैल यानी शनिवार को अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान कराने का निर्णय सुनाया.
पाकिस्तान में सियासी हालात कैसे बिगड़े?
इमरान ख़ान जुलाई 2018 में भ्रष्टाचार से निपटने और अर्थव्यवस्था की स्थिति सुधारने के वादे के आधार पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री चुने गए थे.
वो आबादी के बड़े हिस्से के बीच लोकप्रिय बने रहे, लेकिन आसमान छूती महंगाई और बढ़ते विदेशी कर्ज़ के कारण उनका समर्थन धीरे-धीरे कम हो गया.
कुछ पर्यवेक्षकों ने इस राजनीतिक अस्थिरता को इमरान खान और वहां की मज़बूत सेना के बीच तेज़ी से बिगड़ते संबंधों से जोड़ कर भी देखते हैं. इसका एक संभावित कारण ये भी माना गया कि अक्टूबर में इमरान ख़ान ने पाकिस्तान की शक्तिशाली ख़ुफ़िया एजेंसियों में से एक के नए प्रमुख की नियुक्ति पर सहमति देने से इनकार कर दिया था.
उनके राजनीतिक विरोधियों ने इस कथित कमज़ोरी को पकड़ लिया और उनके कई गठबंधन सहयोगियों को अपने साथ आने के लिए राज़ी कर लिया, जिसने बहुमत को विपक्ष के पक्ष में कर दिया और इमरान ख़ान के सहयोगियों की संख्या कम रह गई. विपक्ष को उम्मीद थी कि अविश्वास प्रस्ताव के नतीजे उनके पक्ष में आएंगे, लेकिन सबकुछ नाटकीय तरीक़े से बदल गया.
पाकिस्तान में आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद अब 9 अप्रैल को अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान होगा और उसका नतीजा इमरान ख़ान के ख़िलाफ़ आने की सूरत में संसद को नया प्रधानमंत्री नियुक्त करना होगा.
इमरान ख़ान कौन हैं?
इमरान ख़ान पूर्व क्रिकेटर कप्तान रहे हैं जिनकी कप्तानी में पाकिस्तान ने 1992 में क्रिकेट वर्ल्ड कप जीता. बाद में वो राजनीति में आ गए. वो भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद से निपटने के वादे के साथ जीत कर 2018 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने.
उनके अभी भी कई समर्थक हैं, लेकिन बढ़ती महंगाई और विदेशी कर्ज़ और अन्य घोटालों के बीच उनकी लोकप्रियता कम हुई है.
विश्लेषकों को ये भी लगता है कि इमरान ख़ान ने सेना का समर्थन भी खो दिया है, जो पाकिस्तानी में सत्ता पर काबिज़ किसी भी नेता के लिए बेहद अहम है.
सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद पाकिस्तान की राजनीतिक उथल-पुथल में एक और अध्याय जुड़ गया है. देश के किसी भी प्रधानमंत्री ने अब तक पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं किया है. इसके पीछे राजनीतिक घोटाले और बीते दशकों में सेना की भूमिका रही है.
सैन्य तख्तापलट और लोकतांत्रिक तरीक़े से चुने हुए नेताओं को हटाने की वजह से पाकिस्तान में स्वतंत्रता के 75 सालों में से 33 साल तक सेना का राज रहा.
हालांकि मौजूदा सैन्य नेतृत्व का दावा है कि हाल के राजनीतिक घटनाक्रम में उनका कोई हस्तक्षेप नहीं है.
पाकिस्तान में अगला प्रधानमंत्री कौन हो सकता है?
संयुक्त विपक्ष की तरफ़ से मियां शाहबाज़ शरीफ़ को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार नॉमिनेट किया गया है, इनका चुनाव ओपन वोट से होगा, क्योंकि पाकिस्तान में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों का चुनाव ओपन वोट के ज़रिए होता है.
अविश्वास प्रस्ताव के कामयाब होने पर स्पीकर उसी दिन नामांकन दाख़िल कराने की घोषणा करेंगे. उसके बाद अगले दिन दोपहर 12 बजे प्रधानमंत्री का चुनाव होगा.
पाकिस्तान के राष्ट्रपति नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री से शपथ लेंगे, जिसके बाद एक तत्काल कैबिनेट का गठन किया जाएगा, इसके बाद राष्ट्रपति संघीय मंत्रियों और राज्य मंत्रियों से शपथ लेंगे, जबकि सलाहकार और सहयोगियों से शपथ नहीं ली जाती है.
पाकिस्तान में आम चुनाव कब होंगे?
प्रधानमंत्री इमरान ख़ान जल्दी आम चुनाव कराना चाहते थे. लेकिन अगर उनके ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव सफल हो जाता है तो फिर इसका फ़ैसला संयुक्त विपक्ष करेगा कि चुनाव कब कराना है.
अगर संयुक्त विपक्ष चुनाव कराने का निर्णय लेता है तो भी जैसा कि चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में बयान दिया है कि इसमें चार महीने का समय लगेगा. तो अगर चुनाव हुआ भी तो ये अक्टूबर तक ही संभव होगा.
इस सूरत में चुनाव से पहले नए प्रधानमंत्री विपक्ष के नेता की सलाह से कार्यवाहक सरकार बनाएंगे, जो आम चुनाव कराएगी और बहुमत हासिल करने वाली पार्टी को सत्ता सौंपेगी.
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