पाकिस्तान: सोशल मीडिया पर छाया कोर्ट का फ़ैसला, क्या कह रहे लोग

पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को नेशनल असेंबली के डिप्टी स्पीकर क़ासिम सूरी के फ़ैसले को असंवैधानिक करार दे दिया. सुप्रीम कोर्ट का ये फ़ैसला इमरान सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने स्पीकर को 9 अप्रैल को असेंबली का सत्र बुलाने और अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग कराने का आदेश भी दिया है. अब सबकी निगाहें अविश्वास प्रस्ताव पर टिक गई हैं क्योंकि सत्ताधारी पार्टी के पास विश्वास साबित करने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं है.

लेकिन, सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला आते ही उसे लेकर पाकिस्तान के सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई. कई हैशटैग चलने लगे.

किसी ने कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत किया है तो किसी ने कोर्ट पर बिका होने का आरोप तक लगा दिया. कुछ लोगों ने इसके लिए अमेरिका को ज़िम्मेदार ठहराया.

इस मामले पर इमरान समर्थक ट्विटर पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं और न्यायपालिक पर सवाल उठा रहे हैं. इसमें कुछ सेलिब्रिटी भी हैं.

आम लोग से लेकर किसने क्या कहा

गायिका कुर्तुलैन बलौच ने ट्वीट किया, ''क्या हम सब आगे आकर इस फ़ैसले को खारिज कर सकते हैं. ये किस तरह का लोकतंत्र है जहां लोगों के मतदान का सांसदों से ऊपर कोई महत्व नहीं है. वो सांसद जो अपनी आत्मा को और देश के लोगों को आसानी से बेच सकते हैं. मैं इमरान ख़ान के साथ खड़ी हूं. अपने लिए खड़े हों.''

एक यूज़र यामना ने लिखा, ''उन्हें अपने अगले कदम के बारे में बिल्कुल पता ना चलने दें. इमरान ख़ान हम आपके साथ हैं.''

यूज़र Zeitung ने अमेरिका को निशाना बनाते हुए लिखा, ''हमें अपने देश को अमेरिकी कठपुतलियों से मुक्त कराना होगा. हमें अपने देश को आज़ाद कराने के लिए इमरान ख़ान या स्वतंत्र रूप से असली और सच्चे संघर्ष की ज़रूरत है. हमें अपने लिए खुद फ़ैसले लेने होंगे. कोई दूसरा हमारा भाग्य तय नहीं कर सकता.''

शहज़ाद अहमद ने ट्वीट किया, ''इसे आप लोकतंत्र की जीत कैसे कह सकते हैं जब एक भी नागरिक ने शहबाज़ को पीएम या फज़लु को राष्ट्रपति बनाने के लिए वोट नहीं किया.''

एक और पीटीआई समर्थन ने न्यायाधीशों की तस्वीर पर 'बिके हुए' लिखकर ट्वीट किया, ''इसी कारण से 130वीं रैंक आई थी.'' दरअसल, पिछले साल पाकिस्तान न्याय व्यवस्था के मामले में 139 देशों में 130वें स्थान पर आया था.

खलीज मैग ने लिखा, ''सुप्रीम कोर्ट के मजबूत सहयोग से अमेरिका का 'सत्ता से हटाओ कारोबार' पाकिस्तान में सफ़ल होने जा रहा है.''

हालांकि, कुछ लोगों ने ऐसा ना करने की अपील भी की है.

शहर रश्मीन ने ट्वीट किया, ''पीएम इमरान ख़ान के समर्थकों से मेरा अनुरोध है कि सरकारी संस्थाओं के ख़िलाफ़ गलत भाषा का इस्तेमाल ना करें. राजनीति में कुछ भी हो सकता है. राजनीति में कुछ तय नहीं होता है. इस फ़ैसले के लिए न्यायपालिका को इसमें ना घसीटें. वो संविधान को हमसे ज़्यादा जानते हैं.''

उनके ट्वीट का कई दूसरे लोगों ने भी समर्थन किया.

कोर्ट की सराहना

वहीं, सोशल मीडिया पर इमरान के विरोध में भी प्रतिक्रिया नज़र आई. इसमें विपक्षी नेताओं ने भी ट्वीट किए.

यूज़र साद कैसर ने नवाज़ शरीफ़ के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले की सराहना करने वाले इमरान ख़ान के एक ट्वीट का हवाला देकर लिखा, ''तब इमरान ख़ान और पीटीआई के फैंस सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से खुश थे. उनके हर यू-टर्न पर एक ट्वीट है. इमरान ख़ान, अब आप कैसे इस्तीफ़ा देंगे?''

पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के प्रमुख बिलावल भुट्टो ने ट्वीट किया, ''लोकतंत्र सबसे अच्छा बदला है. जिया भुट्टो, जिया अवाम, पाकिस्तान ज़िंदाबाद.''

आवामी नेशनल पार्टी ने ट्वीट किया, ''दुनिया में कहीं भी कोर्ट को संविधान को बनाए रखने के लिए धन्यवाद नहीं दिया जाता है. ये उनका कर्तव्य है. आज हम इतिहास ना दोहराने के लिए सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद देते हैं. जब तक संविधान का उल्लंघन करने वालों को जेल नहीं भेजा जाएगा तब तक संविधान की पवित्रता बहाल नहीं होगी.''

विपक्ष के नेता शहबाज़ शरीफ़ ने गुरुवार को एक बयान में प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की तुलना जर्मनी के तानाशाह अडॉल्फ हिटलर से की.

उन्होंने नेशनल असेंबली भंग करने के फ़ैसले को लेकर कहा, ''नाज़ी हिटल ने जर्मन संसद को भंग करके जीत हासिल की और फिर संविधान को निरस्त करके और वाइमार गणराज्य को समाप्त करके अपनी स्थिति को मजबूत किया. इमरान पाकिस्तान में वही कर रहे हैं.''

लोगों ने ली चुटकियां

इस पूरे मामले पर कुछ लोग जमकर चुटकियां भी ले रहे हैं. ऐसी ही कुछ ट्वीट्स हम यहां दिखा रहे हैं.

एक यूज़र राणा मोहम्मद जीशान ने लिखा, ''कैसा ज़माना आ गया है कि पीटीआई वालों ने अपनी सरकार जाने पर जश्न मनाया और अब पीडीएम वाले पीटीआई सरकार के बहाल होने पर खुशियां मना रहे हैं. क्या ये विरोधाभास नहीं है.''

यूज़र असद अली ने लिखा, ''पीटीआई के समर्थकों ने असेंबली भंग होने पर जश्न मनाया... नहीं करना था.''

यूज़र ओशाज़ ने जियो न्यूज़ पर चुटकी ली, ''फ़ैसला सुनाते हुए जियो न्यूज़''

यूज़र मुबाशिर ज़ैदी ने फ़ैसले में समय लगने को लेकर ट्वीट किया, ''इस समय पाकिस्तान... फ़ैसला किधर है?''

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