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पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने भारत का लिया नाम तो बिलावल भुट्टो को क्यों देनी पड़ी सफ़ाई - उर्दू प्रेस रिव्यू
- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा है कि अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग से पहले उनके सभी नाराज़ सांसद वापस आ जाएंगे.
अख़बार डॉन के अनुसार शनिवार को एक सड़क परियोजना की बुनियाद रखते हुए इमरान ख़ान ने यह बातें कहीं.
इमरान ख़ान का कहना था, "लोगों को कभी ना कभी पता चलना ही था कि पाकिस्तान में पैसे की सियासत आ गई है. पैसे की सियासत इतना खुल कर सामने आ गई है कि ज़मीर ख़रीदने के लिए मंडी लगी हुई है."
दरअसल इमरान ख़ान इस वक़्त अपने राजनीतिक करियर के सबसे मुश्किल दौर से गुज़र रहे हैं.
विपक्षी पार्टियों ने एक साथ मिलकर इमरान ख़ान की सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दे दिया है और इमरान ख़ान की पार्टी के क़रीब दर्जन भर सांसद असंतुष्ट बताएं जा रहे हैं. सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में उन सांसदों को राजधानी इस्लामाबाद स्थित सिंध हाउस के अंदर बैठे हुए देखा जा सकता है.
इमरान ख़ान ने कहा कि इस वक़्त सिंध हाउस में जो हो रहा है वो किसी भी सूरत में लोकतंत्र नहीं है. उनके अनुसार लोकतंत्र किसी और चीज़ का नाम है.
इमरान ख़ान को सांसदों से है उम्मीद
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने लोकतंत्र का मॉडल ब्रिटेन से लिया है लेकिन ब्रिटेन में कोई सांसद अपने सपने में भी नहीं सोच सकता है कि वो पैसे लेकर दूसरी तरफ़ चला जाए और फ़्लोर क्रॉस कर ले.
लेकिन उन्होंने विश्वास जताया कि उनके सभी असंतुष्ट सांसद वापस आ जाएंगे.
इमरान ख़ान का कहना था, "आप दिन नोट कर लें, मैं आज भविष्यवाणी कर रह हूं. जैसे-जैसे अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग का दिन क़रीब होगा तो ज़मीरफ़रोशी पर जो मैं क़ौम का ग़ुस्सा देख रहा हूं. मुझे पूरा यक़ीन है हमारे जो भी लोग (सांसद) उनसे बात कर रहे हैं, उनमें से ज़्यादातर लोग वापस आएंगे क्योंकि यह लोग जनता का दबाव देखेंगे."
बिलावल भुट्टो की धमकी के बाद 25 मार्च को सदन बुलाने का फ़ैसला
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो की धमकी के बाद सरकार ने 25 मार्च को संसद का सेशन बुलाने का फ़ैसला कर लिया है.
शनिवार को बिलावल भुट्टो ने कहा था कि अगर सोमवार को सदन में अविश्वास प्रस्ताव नहीं रखा गया तो विपक्षी सांसद सदन के अंदर धरने पर बैठ जाएंगे और फिर इस्लामी देशों के समूह ओआईसी की इस्लामाबाद में होने वाली बैठक में भी बाधा डालेंगे.
अख़बार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि विपक्ष के प्रेस कॉन्फ़ेंस के बाद इमरान ख़ान ने अपने दूसरे मंत्रियों समेत संसद अध्यक्ष से बातचीत की और फिर 25 मार्च को सदन बुलाने का फ़ैसला किया गया.
इसका मतलब है कि ओआईसी की बैठक के बाद ही अब संसद का अधिवेशन शुरू होगा. ओआईसी की दो दिवसीय बैठक इस्लामाबाद में 22 और 23 मार्च को होने वाली है.
ओआईसी की बैठक पर विपक्ष का यू-टर्न
विपक्ष ने ओआईसी की बैठक को लेकर यू-टर्न ले लिया है. बिलावल भुट्टो ने शनिवार को धमकी दी थी कि अगर सोमवार तक अविश्वास प्रस्ताव पेश करने की अनुमति नहीं दी गई तो फिर वो देखेंगे कि ओआईसी की बैठक कैसे होती है.
डॉन अख़बार के अनुसार विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने बिलावल भुट्टो के बयान को नासमझदारी क़रार दिया था.
उन्होंने कहा कि सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस तो अभी दिया गया है जबकि यह तो ओआईसी की 47वीं बैठक में तय हो गया था कि 48वीं बैठक इस्लामाबाद में होगी.
क़ुरैशी ने बिलावल पर हमला करते हुए कहा, "विदेश मंत्री होने के नाते मैं देश को बताना चाहता हूं कि भारत इस (ओआईसी) कॉन्फ़्रेंस को नहीं होने देना चाहता है. मुझे उम्मीद है कि बिलावल भारत के एजेंडे का हिस्सा नहीं बनेंगे."
कुछ ही घंटे बाद विपक्ष ने बिलावल भुट्टो के बयान पर अपनी सफ़ाई देते हुए एक संयुक्त बयान जारी किया.
विपक्ष ने अपने ताज़ा बयान में कहा कि ओआईसी के सभी मेहमानों का पाकिस्तान आगमन पर वो दिल से स्वागत करते हैं.
बयान में कहा गया है कि ओआईसी की बैठक को देखते हुए ही विपक्ष ने अपने लॉन्ग मार्च की तारीख़ में बदलाव किया है और अब अपने सभी समर्थकों को निर्दश दिया है कि वो 25 मार्च से पहले इस्लामाबाद में दाख़िल ना हों.
विपक्ष ने विश्वास दिलाया कि पाकिस्तान की अंदुरूनी सियासी लड़ाई का असर किसी भी हालत में ओआईसी की बैठक पर नहीं पड़ने दिया जाएगा.
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