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पाकिस्तान टेररिस्तान बन चुका है: यूएन में पाकिस्तान को भारत का जवाब
संयुक्त राष्ट्र में भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर से आरोप प्रत्यारोप का दौर देखने को मिला.
पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद ख़क़ान अब्बासी ने अपने संबोधन में भारत प्रशासित कश्मीर का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि वहां भारत की सेना आम लोगों पर पैलेट गन बरसा रही है.
इसके अलावा पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने भारत पर पाकिस्तान के अंदर चरमपंथी ताक़तों की मदद करने का आरोप भी लगाया.
इस पर कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए भारत ने पाकिस्तान को 'टेररिस्तान' कहा है,
पढ़िए भारत के जवाब की 5 अहम बातेंः
1. पाकिस्तान वह देश है जिसने ओसामा बिन लादेन को बचाया और मुल्ला उमर को अपने यहां शरण दी, अब वह चरमपंथ पर तर्क दे रहा है और खुद को पीड़ित बता रहा है. अपने छोटे से इतिहास में ही पाकिस्तान की ज़मीन चरमपंथ का पर्याय बन चुकी है. पाकिस्तान अब टेररिस्तान बन चुका है. जहां से लगातार चरमपंथ का उदय हो रहा है.
2. पाकिस्तान की हालत इसी बात से आंकी जा सकती है कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आंतकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का मुखिया हाफिज़ मोहम्मद सईद पाकिस्तान में एक राजनीतिक पार्टी का नेता है. पाकिस्तान की चरमपंथ के ख़िलाफ़ रणनीति कुछ ऐसी होती है, जिसमें चरमपंथी नेताओं को पाकिस्तान के मिलिट्री टाउन में शरण दी जाती है और उनका राजनीतिक करियर बनाया जाता है.
3. जहां तक भारत का सवाल है तो पाकिस्तान को यह समझ लेना चाहिए कि जम्मू-कश्मीर राज्य भारत का अभिन्न हिस्सा है और हमेशा रहेगा. पाकिस्तान सीमा पार से जितनी चाहे घुसपैठ करता रहे, लेकिन वह भारत की अखंडता को कम नहीं कर पाएगा.
4. पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मदद के रूप में मिलने वाले डॉलरों के ज़रिए अपनी जमीन में चरमपंथ को पनपने दिया और आज पाकिस्तान उसी का नतीजा भुगत रहा है. पाकिस्तान की सड़कों पर चरमपंथी बेखौफ घूमते हैं, वह आज भारत में मानवाधिकार सुरक्षा की बात कर रहा है. जो देश खुद एक तरह से असफल घोषित हो चुका है, दुनिया उसके मुंह से लोकतंत्र और मानवाधिकारों का पाठ नहीं पढ़ना चाहती.
5. पाकिस्तान को सिर्फ यही सलाह दी जा सकती है कि वह अपने विनाशकारी कदमों पर रोक लगाए. अगर पाकिस्तान मानवता और शांति की तरफ किसी भी तरह से प्रतिबद्ध नज़र आया तो शायद उसे अन्य राष्ट्रों के समान स्थान दिया जा सकेगा.
क्या थे पाकिस्तानी पीएम के आरोप
इससे पहले न्यू यॉर्क में चल रहे संयुक्त राष्ट्र के 72वें अधिवेशन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रूप में पहली बार हिस्सा लेते हुए पाकिस्तानी पीएम अब्बासी ने कहा कि विश्व समुदाय को कश्मीर समस्या का हल निकालना चाहिए.
अब्बासी ने भारत प्रशासित कश्मीर में भारतीय सेना और कश्मीरी आवाम के बीच चल रहे संघर्ष का मुद्दा उठाया. अब्बासी ने कहा, ''भारतीय सेना भारत प्रशासित कश्मीर की जनता पर पैलेट गन का इस्तेमाल कर रही है, इसका शिकार हज़ारों कश्मीरी और बच्चे हो रहे हैं.''
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा कि वे भारत के साथ कश्मीर मुद्दे का समाधान निकालने के लिए तैयार हैं. लेकिन इससे पहले भारत को पाकिस्तान में चरमपंथी गतिविधियों में मदद रोकनी होगी.
संयुक्त राष्ट्र करे जांच
20 मिनट लंबे अपने भाषण में अब्बासी ने भारत सरकार से भारत प्रशासित कश्मीर में हुए हमलों की जांच करवाने की मांग की.
इसके साथ ही उन्होंने कहा, ''संयुक्त राष्ट्र के महासचिव और मानवाधिकार आयोग के उच्चायुक्त को भारत प्रशासित कश्मीर में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच करनी चाहिए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए.''
उन्होंने विश्व समुदाय से भारत पर इस बात के लिए दबाव बनाने की अपील की कि भारतीय सेना भारत प्रशासित कश्मीर की जनता पर किसी प्रकार के हथियारों का प्रयोग न करे.
भारत ने तोड़ा संघर्षविराम
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में सीमा पार से हो रहे संघर्ष विराम उल्लंघन का जिक्र भी किया. उन्होंने कहा कि इस साल भारत की तरफ़ से कुल 600 बार संघर्षविराम का उल्लंघन किया गया.
उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, ''मै बता देना चाहता हूं, अगर भारत की तरफ़ से एलओसी पार करने की कोशिशें की गई या छद्म युद्ध किया गया तो पाकिस्तान भी इसका भरपूर जवाब देगा.''
पाकिस्तान नहीं है बलि का बकरा
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा कि वह किसी के लिए बलि का बकरा बनने के लिए तैयार नहीं है. अपने भाषण में अब्बासी ने कहा, ''पाकिस्तान लगातार चरमपंथ के ख़िलाफ़ लड़ रहा है, और चरमपंथ से सबसे अधिक त्रस्त उनका ही देश है.''
पड़ोसी मुल्क अफ़ग़ानिस्तान पर बोलते हुए अब्बासी ने कहा, ''अफ़ग़ानिस्तान में शांति चाहने वालें में पाकिस्तान सबसे पहला देश है, लेकिन इसके लिए हम अफ़ग़ान की लड़ाई अपनी ज़मीन पर नहीं लड़ने देंगे.''
उन्होंने म्यांमार में चल रही हिंसा पर कहा कि म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों का सामूहिक नरसंहार किया जा रहा है और इसके ख़िलाफ़ उचित क़दम भी नहीं उठाए जा रहे.
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