रूस-यूक्रेन युद्धः नोवैं दिन क्या-क्या हुआ, बीबीसी संवाददाताओं ने क्या देखा?

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यूक्रेन-रूस युद्ध के नौवें दिन की शुरुआत यूक्रेन के ज़ापोरज़िया में यूरोप के सबसे बड़े परमाणु संयंत्र पर हमले से हुई.
बीती रात ज़ापोरज़िया परमाणु संयंत्र के 6 रिएक्टरों में से एक के पास विस्फोटक गिरा जिससे आग लग गई. बाद में आग को बुझा दिया गया.
शुरुआत में रेडिएशन फ़ैलने का ख़ौफ छा गया और पश्चिमी देशों ने रूस की कड़ी आलोचना की. लेकिन बाद में वैश्विक परमाणु नियामक संस्था ने कहा कि प्लांट के किसी रिएक्टर को कोई नुक़सान नहीं पहुंचा है और किसी तरह का रेडिएशन नहीं हुआ है.
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने रूस पर 'परमाणु आतंकवाद' का आरोप लगाया.
वहीं ब्रितानी प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा कि ऐसी लापरवाह कार्रवाई समूचे यूरोप को ख़तरे में डाल सकती है.
परमाणु विशेषज्ञों ने बीबीसी से कहा कि इस हमले ने बेहद ख़तरनाक़ हालात पैदा कर दिए थे.
यूनिवर्सिटी ऑफ़ शेफ़ील्ड की प्रोफ़ेसर क्लेयर कॉर्कहिल ने कहा, "आज सुबह पहली बार ऐसा हुआ कि मैं बहुत डर गई थी."

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दक्षिण की लड़ाई क्यों है अहम?
रूस की सेनाओं ने दक्षिणी यूक्रेन की तरफ़ अपने क़दम बढ़ाते हुए ज़ापोरज़िया परमाणु प्लांट पर क़ब्ज़ा कर लिया है.
यूक्रेन के दक्षिण में रूसी सेना के अभियान उत्तर और पूर्व के मुक़ाबले अधिक असरदार रहे हैं.
बीबीसी संवाददाता बेन टोबियास के मुताबिक़ रूस को लगता है कि आक्रामण की कामयाबी के लिए दक्षिण पर नियंत्रण ज़रूरी है.
रूस के सैनिक क्राइमिया के रास्ते दक्षिणी यूक्रेन में घुसे हैं. रूस ने 2014 में इस प्रायद्वीप पर क़ब्ज़ा कर लिया था और यहां बड़ी तादाद में रूसी सेना तैनात है.
जहां नाइपर नदी काले सागर से मिलती है, उसके मुहाने पर बसा खेरसोन शहर गुरुवार को रूस की सेना के नियंत्रण में आ गया. ये यूक्रेन का पहला बड़ा शहर है जिसपर रूस का क़ब्ज़ा हो गया है.
रूस की सेना पूर्व में मारियुपोल और पश्चिम में ओडेसा की तरफ़ भी बढ़ रही है. यदि इन शहरों पर रूस का नियंत्रण हो जाता है तो यूक्रेन का समंदर से संपर्क कट जाएगा.

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वो हम पर बमबारी क्यों कर रहे हैं?
रूस की सेनाओं ने देश के उत्तरी शहरों पर पर भी हमले तेज़ कर दिए हैं.
गुरुवार को चेर्नीहीव पर हुए हवाई हमलों में एक ऊंची रिहायशी इमारत, अस्पताल और क्लिनिक बर्बाद हो गए. इन हमलों में कम से कम 47 लोग मारे गए.
यहां मौजूद बीबीसी संवाददाता जोएल गुंटर का कहना है कि आम लोग बहुत डरे हुए हैं और एक तरह से बंकरों में क़ैद हैं.
40 वर्षीय स्वितलाना ने बीबीसी से कहा, "यहां कोई सैन्य अड्डा नहीं है, बस क़ब्रिस्तान, रिहायशी इमारतें, क्लिनिक और अस्पताल हैं. वो हम पर बमबारी क्यों कर रहे हैं?"
स्वितलाना अपने दो बच्चों और पड़ोसियों के साथ घर में डायनिंग टेबल के नीचे समय बिता रही हैं.

पूरा शहर बंकरों में तब्दील
बीबीसी संवाददाता सारा रेन्सफ़र्ड यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर खारकीएव में हैं. यहां लोग मेट्रो स्टेशनों और बंकरों में रह रहे हैं. शहर पर लगातार बमबारी हो रही है.
रेंसफर्ड कहती हैं, "ये शहर रूस से बस चालीस किलोमीटर दूर है और यहां रहने वाले अधिकतर लोग रूसी भाषा बोलते हैं. लोग ये नहीं समझ पा रहे हैं कि रूस उन पर हमला क्यों कर रहा है."
वो कहती हैं, "एक बुज़ुर्ग महिला ट्रेन कैरिएज में रातें गुज़ार रही है, उनके पास कुछ भी नहीं है और वो इतनी डरी हुई हैं कि बाहर निकल ही नहीं रही हैं. वो बताती हैं कि इस हमले से पहले खारकीएव के लोग व्लादिमीर पुतिन का भी सम्मान करते थे. वो कहती हैं कि अब लोग उन पर बहुत ग़ुस्सा हैं और सम्मान नहीं करते हैं."
'मां को मुझ पर यक़ीन नहीं हो रहा था'
बीबीसी वर्ल्ड सर्विस की डिसइंफोर्मेशन यूनिट से जुड़ी मारिया कोरेनयुक और जैक गुडमैन ने खारकीएव में एक महिला से बात की है जो मॉस्को में रह रहीं अपनी मां को ये नहीं समझा पा रही हैं कि रूस के हमलों में आम नागरिक भी मारे जा रहे हैं.
25 वर्षीय ओलेकसांद्रा कहती हैं, "हालांकि उन्हें मेरी चिंता है लेकिन वो कहते हैं कि ऐसा दुर्घटनावश हो रहा होगा. रूस की सेना कभी भी नागरिकों पर हमले नहीं करेगी. यूक्रेन के लोग ही अपने लोगों को मार रहे हैं."
उन्हें लगता है कि युद्ध को लेकर उनकी मां की समझ रूस के मीडिया की रिपोर्टों के आधार पर बनी हैं, जो उन्हें दिखाया जा रहा है वो उसे ही सच मान रही हैं.
इसी बीच रूस में स्वतंत्र पत्रकारिता को सीमित किया जा रहा है. राष्ट्रपति पुतिन ने ऐसा क़ानून पारित किया है जिसके तहत सेना के बारे में फ़ेक न्यूज़ दिखाने पर 15 साल तक की क़ैद हो सकती है.
इसके बाद बीबीसी, सीएनएन और ब्लूमबर्ग ने रूस में अपना काम रोक दिया है.
यही नहीं रूस ने फ़ेसबुक पर प्रतिबंध लगा दिया है और ट्विटर और यूट्यूब को भी ब्लॉक कर दिया है.
देश के लिए लड़ने लौटा कोच
मोल्दोवा के फुटबॉल क्लब शेरिफ टीरासपोल के मैनेजर यूरी वेर्नीडब अपना पद छोड़कर वापस देश लौट गए हैं ताकि रूस के ख़िलाफ़ लड़ सकें.
56 वर्षीय वेर्नीडब के नेतृत्व में उनकी टीम ने पिछले साल रियल मैड्रिड के ख़िलाफ़ चैपियंस लीग में जीत हासिल की थी.
उन्होंने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि उन्हें डर नहीं लग रहा है. उन्होंने कहा, "मेरे बेटे ने सुबह साढ़े चार बजे फ़ोन करके बताया कि रूस ने हमला कर दिया है. मैं उसी पल जान गया था कि मुझे देश लौटना है और लड़ाई में शामिल होना है."
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