मुसलमान शरणार्थियों को क्या पोलैंड के सांसद ने अपने देश में न आने को कहा था? फ़ैक्ट चेक

यूक्रेन संकट

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    • Author, मेधावी अरोड़ा
    • पदनाम, बीबीसी डिसइन्फ़ॉर्मेशन यूनिट

यूक्रेन पर रूस का हमला जब से हुआ है तब से पोलैंड के एक राजनेता और यूरोपीय संसद के सदस्य (MEP) दॉमिनिक तार्चियंस्की का एक वीडियो ऑनलाइन फैल रहा है.

इस वीडियो में वे कहते हुए दिखते हैं कि, "हमने 20 लाख यूक्रेनियों को लिया है लेकिन हम एक भी मुसलमान को नहीं लेंगे."

वे कहते हैं, "इसी वजह से पोलैंड सुरक्षित है. इसी वजह से हम पर आज तक एक भी आतंकी हमला नहीं हुआ."

अमेरिकी सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक़ यूक्रेन की मुस्लिम आबादी तक़रीबन 5 लाख है.

इस वीडियो को सोशल मीडिया पर दक्षिणपंथी हिंदू अकाउंट्स से शेयर किया जा रहा है जिसको हिंदू राष्ट्रवादी समूह यूक्रेन पर रूस के हालिया हमले के बाद का बता रहे हैं. कई बार इस वीडियो में मुस्लिम विरोधी रुख़ अपनाने के लिए पोलिश राजनेता की तारीफ़ की जा रही है.

एक उदाहरण को अगर लें तो 28 फ़रवरी को एक वेरिफ़ाइड ट्विटर अकाउंट से इसे इस कैप्शन- 'यह हुई ना बात पोलैंड दादा', के साथ शेयर किया गया. इसे 48,000 से अधिक बार देखा गया था.

इसी मैसेज के साथ कई ट्विटर अकाउंट्स पर इसे शेयर किया गया जिन पर दस हज़ार से अधिक फ़ॉलोअर्स थे. इसी पोस्ट को फ़ेसबुक और यूट्यूब पर भी पाया गया.

वीडियो

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यूक्रेन संकट पर पोलैंड की क्या यही वास्तविक स्थिति है?

रिवर्स इमेज सर्च से पाया गया कि यह 2018 का एक पुराना वीडियो है न कि यूक्रेन में जारी हालिया संकट के बाद का.

इस वीडियो में पोलैंड में सत्तारुढ़ रुढ़िवादी-राष्ट्रवादी लॉ एंड जस्टिस पार्टी की आप्रवासन नीति का हवाला दिया गया था. 2015 के यूरोपीय प्रवासी संकट के बाद जब 10 लाख से अधिक शरणार्थी मध्य पूर्व और अफ़्रीकी देशों से यूरोप में दाख़िल हुए थे तब इन नीतियों को सख़्त कर दिया गया था.

पोलैंड में मुस्लिम विरोधी बयानबाज़ी की शिक्षाविद और मानवाधिकार संस्थाएं निंदा करती रही हैं और इसे नस्लवादी और भेदभावपूर्ण बताते रहे हैं.

यूक्रेन में हालिया संकट के समय ऐसी रिपोर्टें और आरोप सामने आए हैं कि यूक्रेन के कुछ नागरिकों को धर्म और नस्ल के आधार पर यूक्रेन-पोलैंड सीमा पर रोका गया है.

पोलैंड में यूक्रेन से आए भारतीय छात्र

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इमेज कैप्शन, पोलैंड में यूक्रेन से आए भारतीय छात्र

पोलैंड का क्या है कहना?

28 फ़रवरी को शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्विटर पर आरोप लगाया था कि भारतीय छात्रों को पोलैंड में दाख़िल होने से रोका गया है. हालांकि, पोलैंड सरकार ने इसे ख़ारिज किया था.

28 फ़रवरी को संयुक्त राष्ट्र महासभा में पोलैंड के स्थाई प्रतिनिधि शिस्तोफ़ श्चर्स्की ने कहा, "रूसी हमले से सभी देशों के नागरिक जो पीड़ित हैं या जिनकी ज़िंदगियों को ख़तरा है वो पोलैंड में शरण ले सकते हैं."

उन्होंने बताया कि यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद 125 देशों के 3 लाख लोगों ने पोलैंड में शरण ली है.

भारत में पोलैंड के राजदूत अदम बुराकोव्स्की ने प्रियंका चतुर्वेदी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा था कि यह सच नहीं है.

आप्रवासन नीति को लेकर पोलिस सरकार मुस्लिम विरोधी बयानबाज़ी करती रही है लेकिन यूक्रेन में हालिया युद्ध को देखते हुए लगता है कि इस नीति में बदलाव आया है.

हालांकि मध्य पूर्व और अफ़्रीका के शरणार्थियों और यूक्रेन के शरणार्थियों के साथ व्यवहार की तुलना की जा रही है.

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