यूक्रेन संकट: बाइडन ने आज संसद में जो कहा, वह पुतिन के लिए कितनी बड़ी चुनौती?

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- Author, एंथनी ज़र्चर
- पदनाम, नॉर्थ अमेरिका रिपोर्टर
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने मंगलवार रात संसद में दिए अपने स्टेट ऑफ़ द यूनियन के भाषण में शुरुआत के 15 मिनट सिर्फ़ यूक्रेन पर रूस के हमले को लेकर बोले.
यह वो घटना है, जिसने उनके घरेलू क़ानूनी एजेंडों की तुलना में दुनिया को बदलकर रख दिया है.
हालांकि, राष्ट्रपति बाइडन का सालाना भाषण संसद को संदेश के तौर पर था लेकिन उनकी यूक्रेन पर टिप्पणियां चार अलग-अलग श्रोताओं के लिए थीं, जिनमें चार अलग-अलग संदेश थे.
आइये नज़र डालते है कि वो किसे और क्या कहना चाह रहे थे.
यूक्रेन के लोगों के लिए
भाषण की शुरुआत में बाइडन ने अमेरिका में यूक्रेनी राजदूत ओकसाना मारकरोवा को पुकारा जो कि उनकी पत्नी जिल बाइडन और अन्य मेहमानों के साथ बालकनी में बैठी थीं.
बाइडन ने कहा, "आपका शुक्रिया, आपका शुक्रिया, आपका शुक्रिया." इस पर सांसदों ने तालियां बजाईं.

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अमेरिका पहले यूक्रेन में सैन्य, आर्थिक और मानवीय सहायता भेज चुका है. मंगलवार की रात बाइडन यह संदेश देना चाहते थे कि अमेरिका यूक्रेन के भविष्य की चिंता करता है और संकटग्रस्त राष्ट्र के साथ खड़ा है.
उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की से लेकर हर यूक्रेनी अपनी निडरता, साहस और दृढ़ संकल्प से दुनिया को प्रेरित कर रहा है."
हालांकि कीएव को रूसी टैंकों ने घेर रखा है लेकिन उनका संदेश था कि अधिकतर अमेरिकी मदद रास्ते में ही है.
रूस के नेता के लिए

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व्लादिमीर पुतिन के लिए बाइडन का संदेश बहुत साधारण था. उन्होंने कहा कि रूसी राष्ट्रपति ने 'बुरी तरह ग़लत आकलन' किया है और हमले के लिए रूस को अमेरिका और यूरोप ने जो आर्थिक पीड़ा दी है वो सिर्फ़ शुरुआत भर है.
रूसी मुद्रा रूबल और रूसी स्टॉक मार्केट लगातार ढह रहा है. ओलिगार्क (रूस के कुलीन तंत्र के सदस्य या समर्थक) की संपत्ति ज़ब्त की जाएगी और रूस प्रमुख तकनीक को खो रहा है.
आर्थिक पीड़ा से अलग रूस के लिए एक दूसरा संदेश भी था. बाइडन ने ज़ोर दिया कि अमेरिका और उसके सहयोगी 'नेटो देशों के क्षेत्र के एक इंच' की रक्षा के लिए लड़ेंगे.
पुतिन ने अपने परमाणु बलों को अलर्ट पर रखा हुआ है और चेतावनी दी है कि अगर कोई भी राष्ट्र यूक्रेन में दख़ल देता है तो उसके विनाशकारी परिणाम होंगे.
बाइडन का संदेश इस शंका को साफ़ करना था कि अमेरिका ख़ुद कब और कहाँ पर लड़ेगा.
यूरोप के लिए

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अमेरिका और उसके सहयोगी यूरोपीय देशों ने रूस पर प्रतिबंध लागू करने और यूक्रेन को सैन्य सहायता देने में उल्लेखनीय क़दम उठाए हैं. भाषण के दौरान बाइडन ने इस तथ्य पर कई बार ख़ुशी जताई.
राष्ट्रपति ने कहा, "उन्होंने सोचा कि पश्चिम और नेटो कोई प्रतिक्रिया नहीं देंगे. पुतिन ग़लत थे. हम तैयार थे."
अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिका की अव्यवस्थित वापसी से पुतिन पर शायद यह प्रभाव गया हो कि बाइडन इस बार भी सहयोगियों से सलाह नहीं करेंगे.
बाइडन की इस बात को लेकर आलोचना हुई थी कि उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान से सेना की वापसी के लिए सहयोगियों से चर्चा नहीं की. लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस मुद्दे को अपने भाषण के दौरान नज़रअंदाज़ किया.
रूस के हमले के जवाब में यूरोप ने जो मुख्य भूमिका निभाई है, उस पर बाइडन ने ख़ासतौर से ज़ोर दिया जो कि उनके प्रशासन के बिगड़े हुए संबंधों को सुधारने के निरंतर प्रयास का हिस्सा हो सकता है.
अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान बाइडन कई बार इस काल को प्रजातंत्र और तानाशाही के बीच वैश्विक संघर्ष के रूप में परिभाषित कर चुके हैं.
उनका मानना है कि इसे कायम रखने के लिए विश्व के लोकतंत्रों के बीच सहयोग की आवश्यकता होगी. यह एक ऐसा विषय था, जिसे उन्होंने मंगलवार को फिर से छुआ.
उन्होंने कहा, "इस समय लोकतंत्र उभर रहा है और दुनिया साफ़तौर पर शांति और सुरक्षा का पक्ष ले रही है."
अमेरिकी लोगों के लिए

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एक जनमत सर्वेक्षण मंगलवार को प्रकाशित हुआ, जिसमें बताया गया था कि अमेरिका की बहुसंख्यक आबादी यूक्रेन के संघर्ष पर बाइडन को सुनने में दिलचस्पी रखती है.
बाइडन का संदेश वैश्विक एकता की प्रतिक्रिया थी, जिसमें एशिया से लेकर लैटिन अमेरिका और यूरोप से लेकर स्विट्ज़रलैंड शामिल था. यह उनके कार्यकाल की कोशिशों का एक वसीयतनामा था.
उन्होंने कहा, "अमेरिका की कूटनीति मायने रखती है, अमेरिका मुद्दों को सुलझाता है."
बाइडन ने चुनाव अभियान के दौरान वादा किया था कि वो दुनिया में अमेरिका के ओहदे को वापस लौटाएंगे और ट्रंप कार्यकाल में सहयोगियों के साथ जो रिश्ते ख़राब हुए हैं, उन्हें बेहतर करेंगे. इस पर उन्होंने संकेत दिए कि उनकी कोशिशों के ठोस परिणाम आए हैं जबकि बहुत कुछ दांव पर लगा है.
बाइडन ने अमेरिकियों को यह भी संदेश दिया कि यूक्रेनी संघर्ष से अमेरिकी जवानों को ख़तरा होने की आशंका है और उसकी उन्हें चिंता है.
उनका कहना था कि नेटो सहयोगी होने के नाते अमेरिका का उनका साथ देना दायित्व है. हालांकि उन्होंने यह भी साफ़ किया कि अमेरिकी सेना यूक्रेन में रूसी सेना के साथ न लड़ी है और न ही लड़ेगी.
आख़िरकार राष्ट्रपति बाइडन उस मुद्दे पर बोले जिसको अधिकतर अमेरिकी सुनने में दिलचस्पी रखते थे कि यूक्रेन संघर्ष के कारण उन पर कितना आर्थिक बोझ पड़ेगा.
कोविड-19 महामारी के कारण आई आर्थिक दिक़्क़तों के बाद इस एक और संकट से राष्ट्रपति के सामने चुनौती खड़ी हो गई है. उनकी छवि पहले ही अमेरिकी जनता में कमज़ोर हुई है.
उन्होंने कहा कि रूस की अर्थव्यवस्था को निशाना बनाने के लिए अमेरिका प्रतिबंध ख़ुद बनाएगा लेकिन दुनिया पर इसके प्रभाव को रोका नहीं जा सकता है. उन्होंने घोषणा की है कि अमेरिका तीन करोड़ बैरल कच्चे तेल को अपने रणनीतिक भंडार से निकालेगा लेकिन यह क़दम अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए गैस की बढ़ती क़ीमत को कम करने की संभावना से कहीं अधिक प्रतीकात्मक है.
बाइडन ने कहा, "मैं जानता हूं कि जो हो रहा है उसकी ख़बरें ख़तरनाक लग सकती हैं लेकिन मैं यह बताना चाहता हूं कि 'सबकुछ ठीक' हो जाएगा."
बाइडन के राजनीतिक भाग्य का यह सबसे महत्वपूर्ण संदेश शायद हो. लेकिन अगर अमेरिकी जनता जल्द ही 'सबकुछ ठीक' महसूस नहीं करेगी तो राष्ट्रपति और उनकी पार्टी इसके परिणामों को नवंबर के मध्यावधि चुनावों में भुगत सकते हैं.
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