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इमरान ख़ान और सेना के बहुत क़रीबी संबंध हैं: मंत्री फ़व्वाद चौधरी- उर्दू प्रेस रिव्यू
- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्री फ़व्वाद चौधरी ने कहा है कि वो बिना किसी लाग लपेट के कहना चाहते हैं कि प्रधानमंत्री इमरान ख़ान और पाकिस्तानी सेना के बहुत क़रीबी रिश्ते हैं.
अख़बार जंग के अनुसार एक समाचार चैनल के प्रोग्राम में सेना और इमरान ख़ान के रिश्तों के बारे में बात करते हुए फ़व्वाद चौधरी ने कहा, "पाकिस्तान की तारीख़ में पहली बार ऐसा हुआ है कि एक ऐसा प्रधानमंत्री आया है, जो सभी संस्थाओं को साथ लेकर चल रहा है. सुप्रीम कोर्ट बुलाता है तो इमरान ख़ान आधे घंटे में वहां पहुँच जाते हैं. कितने प्रधानमंत्री ऐसे गुज़रे हैं, जो सीमा पर जाकर सेना के जवानों के साथ खड़े हो जाते हैं."
फ़व्वाद चौधरी ने कहा कि सेना प्रमुख से लेकर एक आम सैनिक तक सभी इमरान ख़ान के साथ हैं. उन्होंने कहा कि इमरान ख़ान जब मॉस्को जाकर पुतिन से बात करते हैं या चीन में जाकर बात करते हैं तो उनको यह चिंता नहीं होती है कि पीछे पाकिस्तान की सेना क्या कर रही है.
फ़व्वाद चौधरी से जब पूछा गया कि सेना सरकार के साथ है या इमरान ख़ान के साथ व्यक्तिगत तौर पर है तो उनका कहना था, "इमरान ख़ान देश के प्रधानमंत्री हैं और यह एक संवैधानिक सेट-अप है. एक ऐसा सेट-अप जैसा कि पाकिस्तान में होना चाहिए."
नवाज़ शरीफ़ का ज़िक्र करते हुए फ़व्वाद चौधरी ने कहा कि जिस तरह शरीफ़ ने पाकिस्तान को, पाकिस्तान की जनता को, सेना और बाक़ी संस्थाओं को धोखा दिया है, उसी वजह से कोई भी उनके साथ नहीं खड़ा है.
इमरान ख़ान ने कहा, अविश्वास प्रस्ताव के लिए पूरी तरह तैयार हैं
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा है कि वो विपक्षी दलों के जरिए लाए जाने वाले अविश्वास प्रस्ताव के लिए पूरी तरह तैयार हैं.
अख़बार दुनिया के अनुसार इमरान ख़ान ने एक जलसे को संबोधित करते हुए कहा कि अविश्वास प्रस्ताव में न केवल विपक्षी पार्टियों की हार होगी बल्कि वो जेल भी जाएंगे.
विपक्षी पार्टियों ने सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव लाने का फ़ैसला किया है लेकिन अभी उन्होंने न तो संसद में नोटिस दी है और न ही इसकी कोई तारीख़ तय की है.
विपक्ष पर सख़्त हमला करते हुए इमरान ख़ान ने कहा, "विपक्ष चोरों का टोला और डाकुओं का गुलदस्ता है. लूटी हुई दौलत की वापसी तक चोरों का पीछा नहीं छोड़ूंगा. उन सबको इमरान ख़ान का डर है क्योंकि कोई इमरान ख़ान की क़ीमत नहीं लगा सकता."
उधर, विपक्षी दलों का कहना है कि ख़ुद सत्ताधारी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ के सांसद भी अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में वोट देंगे.
अख़बार जंग के अनुसार मुस्लिम लीग (नवाज़ गुट) के वरिष्ठ नेता अहसन इक़बाल ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि अविश्वास प्रस्ताव ज़रूर पास होगा क्योंकि इमरान ख़ान की पार्टी के कई सांसद भी उनके साथ हैं.
अहसन इक़बाल ने कहा, "तमाम सांसदों से जनता यही सवाल पूछ रही है कि यह सरकार कब जाएगी. यह सरकार हर मैदान में नाकाम रही है. अगर यह सरकार अपना और जनता का भला चाहती है तो बेहतर है कि ख़ुद ही इस्तीफ़ा दे दे."
इस बीच, एक सर्वे के अनुसार दावा किया गया है कि पाकिस्तान के 53 फ़ीसद लोग मानते हैं कि इमरान ख़ान अपना कार्यकाल पूरा करेंगे.
अख़बार जंग के अनुसार गैलप पाकिस्तान ने एक सर्वे किया है जिसमें 53 फ़ीसद लोगों को पूरा यक़ीन है कि इमरान ख़ान अपना कार्यकाल पूरा करने वाले पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री बन जाएंगे. सर्वे के अनुसार 30 फ़ीसद लोगों को आशंका है कि इमरान ख़ान अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएंगे.
इसी सर्वे के अनुसार 34 फ़ीसद लोगों ने इमरान सरकार के कामकाज को अच्छा बताया है और 34 फ़ीसद लोगों ने ही सरकार के कामकाज पर अपनी नाराज़गी जताई है.
औरत मार्च को बलपूर्वक रोकने की धमकी
अख़बार डॉन के अनुसार जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (जेयूआई) ने धमकी दी है कि वो पाकिस्तान में होने वाले औरत मार्च को ताक़त के बल पर रोकने की कोशिश करेगी.
मौलाना फ़ज़लुर्रहमान के नेतृत्व वाली जेयूआई के इस्लामाबाद डिवीज़न के अध्यक्ष ने कहा कि उनके कार्यकर्ता औरत मार्च को रोकने के लिए लाठियों का इस्तेमाल करेंगे.
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आठ मार्च को पाकिस्तान में भी कई जगहों पर महिलाएं मार्च निकालती हैं.
जेयूआई के नेता अब्दुल मजीद हज़ारवी ने कहा, "औरत मार्च के दौरान महिलाओं के अधिकारों के नाम पर बेहयाई फैलाई जाती है. हम सरकार को ख़बरदार करते हैं कि अगर औरत मार्च निकालने की इजाज़त दी गई तो हम उसे रोकने के लिए लाठी का इस्तेमाल करेंगे."
औरत मार्च का आयोजन पाकिस्तान में पहली बार साल 2018 में कराची में किया गया था. उसके बाद अब हर साल आठ मार्च को पाकिस्तान के कई शहरों में औरत मार्च निकाला जाता है. इस मार्च के ज़रिये पाकिस्तान में महिलाओं को होने वाली परेशानियों को दर्शाया जाता है.
साल 2019 में राजधानी इस्लामाबाद में जामिया हफ़्सा मदरसे के छात्रों ने औरत मार्च पर पत्थरबाज़ी की थी.
कुछ ही दिन पहले पाकिस्तान में धार्मिक मामलों के मंत्री नुरुल हक़ क़ादरी ने प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को एक ख़त लिखकर कहा था कि औरत मार्च के दौरान इस्लाम विरोधी नारे नहीं लगाए जाने चाहिए.
उन्होंने अपने ख़त में यह भी सुझाव दिया था कि दुनिया भर की मुस्लिम महिलाओं के साथ समर्थन जताने के लिए आठ मार्च को अंतरराष्ट्रीय हिजाब दिवस के तौर पर मनाया जाए.
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री से जब इस बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि लोग क्या सोचते हैं और क्या पहनते हैं, सरकार को इस बारे में हस्तक्षेप करने का कोई हक़ नहीं है.
धार्मिक मामलों के लिखे ख़त के बारे में फ़व्वाद चौधरी ने कहा कि उन्होंने ख़त नहीं पढ़ा है लेकिन ऐसी किसी चीज़ पर पाबंदी नहीं लग सकती जिसमें हिंसा ना हो.
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