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पाकिस्तान के मरी में जानलेवा बर्फ़बारी से मरने वाले चार दोस्तों की आख़िरी सेल्फ़ी
- Author, मोहम्मद ज़ुबैर ख़ान
- पदनाम, बीबीसी उर्दू के लिए
"हम लोग भारा काहू पर बड़ी संख्या में खड़े हैं. हमें न तो हमारे अपनों के शव दिए जा रहे हैं और न आगे जाने दिया जा रहा है."
राजधानी इस्लामाबाद के पास पंजाब प्रांत के पर्यटन स्थल मरी में भारी बर्फ़बारी से मारे गए 22 पर्यटकों में मरदान के रहने वाले चार दोस्त भी थे.
उन लड़कों के एक क़रीबी दोस्त फ़ैसल ख़ान ने कहा, कि "हम प्रशासन से गुज़ारिश कर रहे हैं कि उन लोगों को बचाया तो नहीं जा सका, अब उनके शव तो हमें सौंप दो. अधिकारियों का कहना है कि सुबह होने से पहले यह संभव नहीं है."
इस आपदा में मरदान के चार युवकों की मौत हो गई है, जिनमें असद ख़ान, सुहैल ख़ान, बिलाल ख़ान और कराची के रहने वाले इन्हीं के हमनाम बिलाल ख़ान शामिल हैं.
ये चारों मरदान के एक ही इलाक़े के रहने वाले हैं और सभी आपस में कज़िन थे. चारों दोस्तों में सबसे बड़े सुहैल ख़ान थे, जिनकी उम्र 25 साल बताई जा रही है. उनकी शादी हो चुकी थी और दो बच्चे हैं. बाक़ी तीनों की उम्र क़रीब 22 साल है. असद ख़ान की भी शादी हो चुकी थी और उनके भी दो बच्चे हैं.
असद ख़ान मेरे बचपन का दोस्त था
फ़ैसल ख़ान कहते हैं, कि "असद ख़ान न सिर्फ़ मेरा बचपन का दोस्त था बल्कि मेरा बिज़नेस पार्टनर भी था. असद ख़ान और मेरी मरदान में सरिये की दुकान है. जबकि कराची के रहने वाले बिलाल के अलावा बाक़ी दोनों भी सरिये का कारोबार करते हैं. बाकी तीनों उनके रिश्तेदार हैं, इसलिए मेरी उनके साथ दोस्ती थी."
फ़ैसल ख़ान का कहना है कि हमारी बहुत गहरी दोस्ती थी. "हम कपड़े, घड़ियां, जूते, सब कुछ एक जैसा ही पहनते थे."
"हम दोनों हमेशा एक साथ घूमने जाते थे. जब बर्फ़ गिरनी शुरू हुई तो मैंने कहा कि बहरीन स्वात चलते हैं, जबकि कराची के रहने वाले बिलाल ख़ान मरी देखना चाहते थे, इसलिए वो मरी चले गए और मैं बहरीन चला गया."
"उन्होंने कहा कि वो ठीक हैं चिंता की कोई बात नहीं"
फ़ैसल ख़ान कहते हैं, कि मुझे असद ख़ान का एक मैसेज मिला था कि दुकान की चाबी फलां जगह रखी है वह ले लें.
"आज सुबह जब वह समय पर दुकान पर नहीं आया, तो मैंने फ़ोन किया और उसका नंबर किसी और ने उठाया और मुझे बताया कि असद ख़ान और उसके साथ तीनों लोगों की मौत हो गई है."
उनके एक और क़रीबी रिश्तेदार नुसरत ख़ान ने कहा, कि "जब ये लोग बर्फ़ में फंसे तो परेशान नहीं थे."
"मैंने फ़ोन किया तो सुहैल ख़ान ने फ़ोन उठाया. उसने कहा कि बर्फ़ के कारण रोड बंद हो चुका है, लेकिन उम्मीद है कि जल्द ही दोबारा खुल जाएगा और हम लोग मरी का चक्कर लगा कर लौट आएंगे."
नुसरत ख़ान ने कहा, कि ''दो-तीन घंटे बाद दोबारा फ़ोन किया तो उन्होंने बताया कि अभी रोड नहीं खुला है.''
"लेकिन खुल जाएगा. यहां हम अकेले नहीं फंसे हुए हैं, और भी बहुत से लोग गाड़ियों में मौजूद हैं. इनमें बच्चे और महिलाएं भी हैं, चिंता की कोई बात नहीं है."
लेकिन फिर सुबह हमें ख़बर मिली कि चारों की मौत हो गई है.
बिलाल ख़ान की मरी जाने की इच्छा
मरदान में मारे गए चारों दोस्तों के क़रीबी रिश्तेदार बाबर ख़ान ने कहा, कि 'हमारे रिश्तेदार बिलाल ख़ान कुछ दिन पहले कराची से आए थे. वह बर्फ़बारी देखने के लिए मरी जाना चाहते थे. असद ख़ान ने जब बर्फ़बारी की ख़बर सुनी तो उनकी इच्छा पर उन्हें अपनी कार में ले कर गए थे.
उनका कहना है, कि "सवेरे जब वे मरी जा रहे थे, तो उन्होंने कहा था कि वे मरी में रात नहीं बिताएंगे हैं. वहां से हम एबटाबाद जाएंगे. रात को एबटाबाद या गल्यात के किसी होटल में रुकेंगे. उन्होंने ऐबटाबाद या गल्यात में रुकने के लिए किसी जगह की व्यवस्था की थी.
बाबर ख़ान का कहना है कि जब मैंने रात में उनसे संपर्क किया तो उन्होंने कहा, कि ''चिंता की कोई बात नहीं है. हम लोग ठीक हैं अगर रात कार में भी बितानी पड़ी तो ऐसी कोई बात नहीं है. कार में हीटर है हम इससे चालू कर लेंगे."
उन्होंने कहा कि जब उन्होंने आधी रात को फिर से बात की तो सुहैल ख़ान ने कहा, कि ''हम तो ठीक हैं लेकिन कई गाड़ियों में लोगों की हालत ख़राब है.'' हमारे पास खाने पीने की कुछ चीज़ें थी जो हमने लोगों को दे दी हैं.
"समझ नहीं आता कि कैसे इन महिलाओं और बच्चों की मदद करें जो फंसे हुए हैं."
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