सोवियत संघ की यादें ताज़ा करती 10 ऐतिहासिक तस्वीरें

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    • पदनाम, बीबीसी मुंडो

कभी विशाल और ताक़तवर देश के रूप में पूरी दुनिया पर अपना प्रभाव छोड़ने वाला सोवियत संघ (USSR) अब से 30 साल पहले 25 दिसंबर, 1991 को बिखर गया था.

सोवियत संघ का दबदबा बीसवीं सदी के क़रीब आधे वक़्त तक रहा और इसने अमेरिका को कड़ी चुनौती दी.

सोवियत युग के प्रभाव को बताने वाली ऐसी 10 यादगार तस्वीरें बीबीसी आपके सामने पेश कर रहा है:

फ़्रेडरिक एंगिल्स (बाएं) और कार्ल मार्क्स

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1. वैज्ञानिक समाजवाद के जनक - 1848 में जर्मन दार्शनिक कार्ल मार्क्स और फ़्रेडरिक एंगेल्स ने "द कम्युनिस्ट मेनिफ़ेस्टो" प्रकाशित किया था. सोवियत संघ के लिहाज़ से ये सबसे अहम दस्तावेज़ साबित हुआ. रूस में 1917 में हुई बोल्शेविक क्रांति और उसके बाद बने शक्तिशाली सोवियत संघ की प्रेरणा इसी किताब से मिली थी.

व्लादिमीर ई लेनिन

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2. लेनिन की यादगार और ऐतिहासिक तस्वीर - बोल्शेविक क्रांति के अगुवाई करने वाले व्लादिमीर ई. लेनिन बाद में सोवियत संघ के पहले राष्ट्रपति बने. यह तस्वीर तब ली गई थी, जब वे 1919 में रेड आर्मी के सदस्यों को संबोधित कर रहे थे.

रेड स्कावयर की मशहूर परेड

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3. रेड स्कावयर की मशहूर परेड - मॉस्को में क्रेमलिन (राष्ट्रपति भवन) के सामने की विशाल खुली जगह पर 1919 से आज तक सोवियत संघ और रूस की सेना का शक्ति प्रदर्शन होता रहा है. यह तस्वीर 9 मई, 1965 की है, जब नई बनी एक मिसाइल का प्रदर्शन हो रहा था.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल और अमेरिका के राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूज़वेल्ट के साथ सोवियत नेता स्टालिन (बाएं से दाएं).

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4. नई विश्व व्यवस्था - दूसरे विश्वयुद्ध के बाद याल्टा के मशहूर सम्मेलन के दौरान उस समय दुनिया के तीन सबसे ताक़तवर नेता एक साथ आए थे. इस तस्वीर में सबसे बाएं ​ब्रिटेन के प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल बैठे हुए हैं. बीच में अमेरिका के राष्ट्रपति फ़्रैंकलिन डी. रूज़वेल्ट हैं तो दायीं तरफ हैं सोवियत संघ के राष्ट्रपति जोसेफ़ स्टालिन.

ये तीनों नेता उन देशों की अगुआई कर रहे थे, जिन्होंने दूसरे विश्वयुद्ध को मिलकर जीता था. कई इतिहासकारों की राय में यही वो पल भी था, जब अगले चार दशक तक चलने वाले शीतयुद्ध की शुरुआत हुई.

दुनिया के पहले अंतरिक्षयात्री यूरी गागरिन
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5. सोवियत संघ की ताक़त का प्रतीक और 'अंतरिक्ष विजय' के नायक - इस तस्वीर में यूरी गागरिन हैं जो दुनिया के पहले अंतरिक्षयात्री हैं. इस तस्वीर पर यूरी गागरिन के आटोग्राफ़ भी हैं. 1961 में उनके अंतरिक्ष जाते ही, ऐसा करने वाले वे पहले दुनिया के इंसान बन गए. साथ ही वो पूरी दुनिया के नायक बनकर इतिहास में अमर हो गए.

फ़िदेल कास्त्रो और निकिता ख्रुश्चेव

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6. शीतयुद्ध के साथी - इस तस्वीर में क्यूबा के नेता और अमेरिका के धुर विरोधी फ़िदेल कास्त्रो सोवियत संघ के अपने समकक्ष निकिता ख़्रुश्चेव के साथ. यह तस्वीर 1963 में तब ली गई थी, जब कास्त्रो एक महीने की आधिकारिक यात्रा पर सोवियत संघ गए थे.

जॉन एफ़. केनेडी बर्लिन में

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7. दुश्मन का दुश्मन दोस्त - 1963 में अमेरिका के राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी ने विभाजित बर्लिन के पश्चिमी हिस्से का दौरा किया. यह इलाक़ा पश्चिमी ताक़तों के प्रभाव में आता था. वहां आकर उन्होंने सोवियत संघ के साथ टकराव के ख़िलाफ़ एक मशहूर भाषण दिया था. उन्होंने उस दौरान जर्मन में कहा था, "मैं बर्लिन का हूं." पूर्वी जर्मनी द्वारा खड़ी की गई बर्लिन की दीवार के बाद उन्होंने पश्चिमी जर्मन की सरकार को अपना समर्थन दिया था.

एरिच होनेकर (बाएं) और लियोनिद ब्रेझनेव.

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8. दो नेताओं का आपसी स्नेह - यह तस्वीर 1979 की है. इसमें सोवियत संघ के प्रभाव वाले पूर्वी जर्मनी के नेता एरिच होन्कर और सोवियत संघ के राष्ट्रपति लियोनेद ब्रेज़नेव के बीच के गहरे संबंध दिखते हैं. तथाकथित "समाजवादी भाइचारे वाले चुंबन" में दो लोग गले मिलकर तीन बार एक दूसरे का चुंबन लेते थे. लेकिन मुंह वाला चुंबन बहुत आम नहीं था. ये तभी होता था जब दो नेता एक-दूसरे के काफ़ी क़रीब होते थे.

जर्मन वॉल तोड़ने की कोशिश करती एक बच्ची

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9. 'लोहे के पर्दे' पर चोट- पूर्वी जर्मनी की एक लड़की बर्लिन की दीवार को तोड़ने की कोशिश करती हुई. यह दीवार पूर्वी-पश्चिमी जर्मनी के बीच के टकराव और शीतयुद्ध का प्रतीक थी. 1989 में इस दीवार को गिरा दिया गया.

मिख़ाइल गोर्बाचोफ़ (बाएं) और बोरिस येल्तसिन.

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10. सोवियत संघ के पतन के ठीक पहले: यह तस्वीर सोवियत संघ के पतन के चार महीने पहले अगस्त 1991 में ली गई थी. इसमें सोवियत संघ के तब के दो सबसे बड़े नेता मिख़ाइल गोर्बाचोफ़ और राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन हाथ मिलाते हुए दिख रहे हैं. गोर्बाचोफ़ को कम्युनिस्ट पार्टी के लिए कठिन माने जाने वाले इलाक़े से चलाए गए तख़्तापलट की कोशिश का सामना करना पड़ा था. उनके विरोधी जनतंत्रीकरण और अर्थव्यवस्था का उदारीकरण करने की उनकी कोशिश का विरोध कर रहे थे.

(यह लेख अब सेपांच साल पहले सोवियत संघ के पतन के 25 साल पूरा होने के मौक़े पर प्रकाशित हुआ था.)

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