चीनी मीडिया में जनरल बिपिन रावत की मौत पर तंज़ भरी टिप्पणी

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भारतीय वायुसेना के हेलिकॉप्टर क्रैश में बुधवार को भारत के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत समेत 14 लोगों की मौत पर चीनी मीडिया में तंज़ कसा जा रहा है.
जनरल रावत वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जारी तनाव को लेकर चीन का नाम लेकर बोलते थे जबकि मोदी सरकार तनाव में भी चीन का नाम से लेने से परहेज करती रही है.
हाल ही में जनरल रावत ने कहा था कि भारत के लिए असली ख़तरा चीन है न कि पाकिस्तान.
अब जब जनरल रावत की हेलिकॉप्टर हादसे में मौत हो गई है तो चीन में सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी का मुखपत्र मानेजाने वाला अख़बार ग्लोबल टाइम्स भारत पर तंज कस रहा है.
ग्लोबल टाइम्स को चीनी की सरकार का प्रॉपेगैंडा फैलाने वाला अख़बार भी कहा जाता है. ग्लोबल टाइम्स की टिप्पणियों की भारत में आलोचना हो रही है.

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गुरुवार को ग्लोबल टाइम्स ने एक लेख प्रकाशित किया है और इसमें चीनी विशेषज्ञों के हवाले से बताया गया है कि हेलिकॉप्टर क्रैश में भारत के चीफ़ ऑफ डिफेंस स्टाफ़ की मौत न केवल भारत की सैन्य अनुशासनहीनता और युद्ध की तैयारियों की पोल खोलता है बल्कि भारत के सैन्य आधुनिकीकरण की हक़ीक़त को भी दर्शाता है. ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि भारत में सैन्य आधुनिकीकरण अब भी ठहरा हुआ है और इसमें लंबा वक़्त लगेगा.
ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, ''विश्लेषकों का मानना है कि चीन विरोधी भारत के शीर्ष सेना अधिकारी की मौत के बाद भी चीन को लेकर भारत की आक्रामक छवि में कोई परिवर्तन नहीं आएगा. भारतीय मीडिया में हेलिकॉप्टर क्रैश करने की वजह ख़राब मौसम, ग़लत ऊंचाई और तकनीकी गड़बड़ी बताई जा रही है. इन सब कारणों को मान भी लिया जाए तो इनसे यही पता चलता है कि यह गड़बड़ी मानवीय है न कि रूस में बने हेलिकॉप्टर में कमी होने के कारण. Mi-17 सिरीज़ के हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल दुनिया के कई देशों में होता है.''
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इस लेख को ग्लोबल टाइम्स से आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से भी शेयर किया गया है. इसी ट्वीट पर भारत के कई अहम हस्तियों ने कड़ी आपत्ति जताई है. भारत के पूर्व सेना प्रमुख जनरल वेद मलिक ने ग्लोबल टाइम्स के इस लेख की प्रतिक्रिया में ट्वीट किया है, ''सामाजिक मूल्यों और नैतिकता की घोर कमी है. ऐसे में हम चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी से और क्या उम्मीद कर सकते हैं?''
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शिव सेना की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने ग्लोबल टाइम्स के इस ट्वीट की प्रतिक्रिया में लिखा है, ''अगर शर्मिंदगी का कोई चेहरा होता है तो आपका ट्विटर हैंडल इस मामले में मुफ़ीद है. बीमार.''
पत्रकार अभिजीत मजूमदार ने लिखा है, ''ग्लोबल टाइम्स का यह ट्वीट चीन का दमदार विज्ञापन है कि वो कभी दुनिया का नेतृत्व करने लायक़ नहीं होगा. चीन केवल पाकिस्तान और उत्तर कोरिया जैसे तबाह मुल्कों को ही आकर्षित कर सकता है.''
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ग्लोबल टाइम्स ने इस लेख में बीजिंग के सैन्य विशेषज्ञ वेई डोंगचु की टिप्पणी को भी जगह दी है. वेई डोंगचु ने कहा है, ''Mi-17V5 हेलिकॉप्टर Mi-17 का आधुनिक वर्जन है. इसके इंजन और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस ज़्यादा मज़बूत और सक्षम हैं. इस वजह से ये ज़्यादा विश्वसनीय है. हालाँकि भारतीय सेना कई तरह के हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल करती है. इनमें देश के भीतर विकसित किए गए हेलिकॉप्टर भी शामिल हैं. इन हेलिकॉप्टरों में विदेशी तकनीक का ट्रांसफर किया गया है. इसमें कुछ पार्ट अमेरिका का होता है तो कुछ रूस का. संभव है कि इस वजह से समस्या हुई हो.''
इसी लेख में ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, ''एक चीनी रक्षा विशेषज्ञ ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि भारत ढीली और अनुशासनहीन सैन्य संस्कृति के लिए जाना जाता है. भारत के सैनिक मानकों और नियामकों का पालन नहीं करते हैं. इस वजह से भारत में पहले भी कई हादसे हुए हैं. इनमें 2019 में भारत के एयरक्राफ़्ट में आग लग गई थी और 2013 में धमाका हुआ था. इन सब में मानवीय भूल की पहचान हो सकती है.''
ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, ''हालिया हेलिकॉप्टर हादसे से बचा जा सकता था, अगर मौसम ठीक होने तक उड़ान नहीं भरी जाती, पायलट ध्यान से और स्किल से उड़ाता या फिर हेलिकॉप्टर का मेंटेनेंस समय पर और ठीक से किया गया होता. ऐसे हादसों से भारतीय सेना की युद्ध की तैयारियों की पोल खुल जाती है. यह भारतीय सेना की आम समस्या है. चीन और भारत की सीमा पर तैनात भारतीय सैनिक अक्सर उकसाऊ काम करते रहते हैं लेकिन जब असल में भिड़ना होता है तो टिक नहीं पाते हैं. जनरल रावत की मौत के बाद भारतीय सेना का आधुनिकीकरण और लटक सकता है.''
ग्लोबल टाइम्स से इसी लेख में सिन्हुआ यूनिवर्सिटी के नेशनल स्ट्रैटिजी इंस्टिट्यूट में रिसर्च डिपार्टमेंट के निदेशक किआन फेंग ने कहा है, ''चीन-भारत के बीच का सीमा विवाद अब सैन्य मुद्दा से आगे बढ़कर राजनीतिक मुद्दा हो गया है. भारत सीमा विवाद को लेकर क्या करता है, यह मोदी सरकार की नीति पर निर्भर करेगा. ऐसे में भारत एक हादसे भर से चीन के साथ सीमा विवाद पर अपनी नीति में बदलाव नहीं लाएगा. लेकिन भारत भले अपनी नीति बदले या ना बदले लेकिन सच यह है कि उसका सबसे बड़ा दुश्मन पिछड़ेपन है.''
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जनरल रावत की मौत के मामले में भारत के जाने-माने सामरिक विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी और ग्लोबल टाइम्स में ट्विटर पर कहासुनी हो गई है. ब्रह्मा चेलानी ने आठ दिसंबर को दो ट्वीट किए थे और ये दोनों ट्वीट ग्लोबल टाइम्स को नागावार गुज़रे. ब्रह्मा चेलानी ने अपने ट्वीट में लिखा था, ''जनरल रावत की मौत अद्भुत रूप से 2020 की शुरुआत में ताइवान के चीफ़ ऑफ जनरल स्टाफ़ शेन यी-मिंग और सात अन्य के हेलिकॉप्टर क्रैश में मारे जाने की तरह है. इसमें दो मेजर जनरल भी शामिल थे. दोनों हेलिकॉप्टर क्रैश में उनकी मौत हुई है जो चीनी की आक्रामकता से लड़ रहे थे.''
''इस अद्भुत समानता का मतलब यह नहीं है कि दोनों हेलिकॉप्टर क्रैश में कोई संबंध है या बाहरी हाथ है. अगर इन दुर्घटनाओं से कोई सवाल उठता है तो यह कि शीर्ष के सैन्य अधिकारियों को ले जाने वाले हेलिकॉप्टर का मेंटेनेंस ठीक से हो.''
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ब्रह्मा चेलानी के इस ट्वीट को रीट्वीट करते हुए ग्लोबल टाइम्स ने इस हादसे को अमेरिका से जोड़ दिया. ग्लोबल टाइम्स ने अपने ट्वीट में लिखा है, ''आपकी इस टिप्पणी से अमेरिका पर शक जाता है क्योंकि भारत और रूस एस-400 मिसाइल डिफेंस डील कर चुके हैं और इसकी डिलिवरी होने जा रही है. अमेरिका ने इस सौदे का मज़बूती से विरोध किया है.''
ग्लोबल टाइम्स के इस ट्वीट के जवाब में ब्रह्मा चेलानी लिखा है, ''देखिए कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ चाइना का मुखपत्र मेरे ट्वीट का कैसे दुरुपयोग कर रहा है. बता रहा है कि हेलिकॉप्टर क्रैश के पीछे अमेरिका है क्योंकि वो भारत और रूस के एस-400 सौदे से नाराज़ है. इस ट्वीट से इनकी बीमार मानसिकता समझ में आती है.''
ग्लोबल टाइम्स ने अपने लेख में भी चेलानी की इस टिप्पणी पर सिन्हुआ यूनिवर्सिटी के नेशनल स्ट्रैटिजी इंस्टिट्यूट में रिसर्च डिपार्टमेंट के निदेशक किआन फेंग से प्रतिक्रिया मांगी तो उन्होंने कहा, ''चेलानी की तरह चीन विरोधी ताक़तें झूठी कहानियां गढ़ने में लगी हैं. इस तरह की ताक़तें भारत की सभी घरेलू समस्याओं के लिए चीन को ज़िम्मेदार ठहराती हैं.''
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दुनिया भर के देशों से जनरल रावत की मौत के बाद शोक में संदेश भेजे गए हैं. कई देशों के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति तक ने संवेदना जताई है. यहाँ तक की पाकिस्तान की ओर से भी दुख जताया गया है लेकिन चीन के शीर्ष नेतृत्व या विदेश मंत्रालय से ऐसी कोई संवेदना नहीं जताई गई है.
भारत में चीन के राजदूत सुन वेईदोंग ने भले एक ट्वीट कर संवेदना जताई थी. उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा था, ''हेलिकॉप्टर क्रैश में भारत के सीडीएस, उनकी पत्नी और अन्य लोगों की मौत बहुत ही दुखद है. सभी मृतकों के प्रति मेरी सहानुभूति है.''
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