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भारत को रूस से मिलने वाले S-400 सिस्टम की क्यों है इतनी चर्चा
रूस ने भारत को एस-400 एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी समय से पहले शुरू कर दी है.
रूस की हथियार निर्माता कंपनी रोसोबोरोन एक्सपोर्ट के प्रमुख अलेक्ज़ेंडर मिखयेव ने सोमवार को ये जानकारी दी.
रूस की न्यूज़ एजेंसी तास के मुताबिक़ मिखयेव ने ये जानकारी दुबई में चल रहे एयर शो 2021 में दी. उन्होंने कहा- ''क्राफ़्ट का शिपमेंट तय समय से पहले शुरू हो गया है."
उन्होंने बताया कि रूस पहले ही भारतीय विशेषज्ञों को एस-400 सिस्टम चलाने के लिए प्रशिक्षित कर चुका है. उन्होंने कहा, "रेजिमेंट सेट का संचालन करने वाले भारतीय विशेषज्ञ अपना प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं."
उन्होंने कहा है कि एस-400 सतह से हवा में मारने वाली मिसाइल प्रणाली है जिसका पहला रेजिमेंट सेट इस साल के अंत तक भारत को दिया जाएगा.
उन्होंने बताया, "पहले रेजिमेंट सेट के सभी उपकरण 2021 के अंत तक भारत पहुंचा दिए जाएंगे. नए साल के तुरंत बाद, हमारे विशेषज्ञ भारत जाएंगे और मिसाइल तैयार कर भारत को ट्रांसफ़र करेंगे."
उन्होंने कहा कि ये डिलीवरी अनुबंध की शर्तों के मुताबिक़ की जा रही है.
एस-400 मिसाइल की इतनी चर्चा क्यों है
साल 2018 में भारत ने रूस से पाँच एस-400 मिसाइल सिस्टम ख़रीदने के सौदे पर हामी भरी थी. एस-400 रूस का बेहद आधुनिक मिसाइल सिस्टम है.
इसकी तुलना अमेरिका के बेहतरीन पैट्रिअट मिसाइल एयर डिफ़ेंस सिस्टम से होती है. भारत और रूस के बीच से सौदा 5.43 अरब डॉलर में हुआ था.
यह वही मिसाइल सिस्टम है, जिसका सौदा करने पर ट्रंप प्रशासन ने दिसंबर, 2020 में तुर्की पर प्रतिबंध लगा दिया था. अमेरिका ने भारत और रूस के बीच हुए सौदे पर भी सवाल उठाए थे.
एस-400 को दुनिया का बेहद प्रभावी एयर डिफेंस सिस्टम माना जाता है. यह दुश्मनों के मिसाइल हमले को रोकने का काम करता है.
एस-400 मोबाइल सिस्टम है यानी रोड के ज़रिए इसे लाया-ले जाया सकता है. इसके बारे में कहा जाता है कि आदेश मिलते ही पांच से 10 मिनट के भीतर इसे तैनात किया जा सकता है.
यही सारी ख़ूबियां एस-400 को पश्चिम में बने उच्चस्तरीय डिफेंस सिस्टम, जैसे- टर्मिनल हाई एल्टिट्यूड एरिया डिफेंस सिस्टम (टीएचएएडी) और पैट्रिअट मिसाइल एयर डिफ़ेंस सिस्टम (एमआईएम-104) से अलग बनाती हैं.
इसे विमान, क्रूज़ और बैलिस्टिक मिसाइलों और हाइपरसोनिक हथियारों को नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है और इसका उपयोग ज़मीन पर बने इन्स्टॉलेशन पर भी किया जा सकता है.
इसमें वर्टिकल लॉन्चिंग सिस्टम होता है जिसे नेवी के मोबाइल प्लेटफॉर्म से भी दागा जा सकता है.
इसमें सिंगल स्टेज एसएएम है जिसका अनुमानित रेंज 150 किलोमीटर है.
कहा जा रहा है कि भारत को बिल्कुल आधुनिक एस-400 मिलेगा जिसमें उच्चस्तरीय एसएएम और 40N6E हैं.
मुख्य रूप से एस-400 में 40N6E एक मजबूत पक्ष है जो इसकी प्रतिष्ठा को और बढ़ाता है.
एस-400 को बनाने वाली कंपनी का कहना है कि 40N6E का अधिकतम रेंज 400 किलोमीटर है और यह 30 किलोमीटर की ऊंचाई पर अपने लक्ष्य को भेद सकता है.
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