तालिबान के विदेश मंत्री अफ़ग़ानिस्तान में अपनी सरकार को मान्यता न दिए जाने पर झुंझलाए - पाकिस्तान उर्दू प्रेस रिव्यू

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- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
अफ़ग़ानिस्तान के अंतरिम विदेश मंत्री अमीर ख़ान मुत्तक़ी ने कहा है कि चरमपंथी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और पाकिस्तानी सरकार के बीच सीज़फ़ायर का समझौता बहुत ख़ुशी की बात है और उन्हें पूरी उम्मीद है कि दोनों के बीच जल्द ही समझौता हो जाएगा.
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ़ अल्वी और विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने इस बात के संकेत दिए थे कि पाकिस्तानी सरकार और टीटीपी के एक गुट से बातचीत हो रही है. उसके कुछ दिनों बाद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने तुर्की के सरकारी न्यूज़ चैनल टीआरटी वर्ल्ड को एक इंटरव्यू में इस बात की पुष्टि की थी कि सरकार और टीटीपी के एक गुट के बीच अफ़ग़ानिस्तान में बातचीत हो रही है.
अब तालिबान की तरफ़ से भी इस बात की आधिकारिक पुष्टि विदेश मंत्री मुत्तक़ी ने कर दी है.
अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक सेमिनार को संबोधित करते हुए अफ़ग़ानिस्तान के विदेश मंत्री ने कहा, "हम दोनों पक्षों के बीच बातचीत में मदद कर रहे हैं. उम्मीद है कि फ़िलहाल जो सीज़फ़ायर हुआ है वो जल्द ही स्थायी शांति समझौते में तब्दील हो जाएगा."
इस दौरान उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि अफ़ग़ानिस्तान में कोई भी पाकिस्तान-विरोधी गुट सक्रिय नहीं है.
'100 फ़ीसद महिलाकर्मी ड्यूटी पर लौट चुकी हैं'

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अमीर ख़ान मुत्तक़ी ने कहा कि उन्हें समझ में नहीं आता कि तालिबान की सरकार ऐसा क्या करे कि अमेरिका और दूसरे देश उनकी सरकार को मान्यता दे दें.
उन्होंने कहा कि 100 फ़ीसद महिलाकर्मी ड्यूटी पर लौट चुकी हैं और शिक्षण संस्थानों में 75 फ़ीसद महिलाकर्मी काम पर वापस आ चुकी हैं. उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में शांति और स्थिरता बहाल कर दी गई है.
इस बीच अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा ने अमेरिका, चीन और रूस के अफ़ग़ानिस्तान के लिए विशेष दूत से अलग-अलग मुलाक़ात की. मुलाक़ात के दौरान जनरल बाजवा ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान को मानवीय संकट से बचाने और उसके आर्थिक विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय एकजुटता की ज़रूरत है.

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टीएलपी से समझौता चंद दिनों में सामने आ जाएगा: शेख़ रशीद अहमद
पाकिस्तान के केंद्रीय गृहमंत्री शेख़ रशीद अहमद ने कहा है कि तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) और सरकार के बीच समझौता हो गया है जो चंद दिनों में सामने आ जाएगा.
अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार शेख़ रशीद ने कहा कि समझौते के लिए होने वाली बातचीत में वो शामिल नहीं थे. उनका कहना था, "मैंने ख़ुद साद रिज़वी (टीएलपी प्रमुख) से कहा कि इसमें मेरा कोई काम नहीं है. यह काम धार्मिक नेताओं और पंजाब सरकार का है. लेकिन साद रिज़वी के कहने पर मैं दो बैठकों में शामिल हुआ. सरकार और टीएलपी के बीच जो भी समझौता हुआ है वो हफ़्ते या 10 दिनों में सामने आ जाएगा."
उन्होंने इस बात को फिर दोहराया कि पंजाब की प्रांतीय सरकार की सिफ़ारिश पर केंद्र सरकार ने टीएलपी पर प्रतिबंध लगाया था और पंजाब सरकार के फ़ैसला बदलने के बाद केंद्र सरकार ने भी क़ानून मंत्रालय से सलाह लेकर टीएलपी पर लगी पाबंदी हटा ली है.

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टीएलपी का गठन
तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान की बुनियाद ख़ादिम हुसैन रिज़वी ने साल 2015 में रखी थी. सुन्नी इस्लाम की बरेलवी विचारधारा के समर्थक ख़ादिम हुसैन रिज़वी पंजाब प्रांत के धार्मिक विभाग के कर्मचारी थे और लाहौर की एक मस्जिद के मौलवी थे.
साल 2011 में जब पंजाब पुलिस के गार्ड मुमताज़ क़ादरी ने पंजाब के तत्कालीन गवर्नर सलमान तासीर की हत्या की तो ख़ादिम हुसैन रिज़वी ने मुमताज़ क़ादरी का खुलकर समर्थन किया जिसके नतीजे में पंजाब के धार्मिक विभाग की नौकरी से उन्हें निष्कासित कर दिया गया.
इसके बाद ख़ादिम हुसैन रिज़वी ने मुमताज़ क़ादरी की रिहाई के लिए भी आंदोलन किया था.
मुमताज़ क़ादरी को फांसी दिए जाने के बाद इन्होंने आंदोलन किया लेकिन सरकार से बातचीत के बाद चार दिन के अंदर यह ख़त्म हो गया. इस धरने की समाप्ति पर मौलाना ख़ादिम हुसैन रिज़वी ने ऐलान किया था कि वो 'तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान या रसूल अल्लाह' नाम से धार्मिक पार्टी की बुनियाद रखेंगे. और इस तरह उन्होंने साल 2015 में टीएलपी का गठन किया. ख़ादिम हुसैन रिज़वी की मौत के बाद उनके बेटे साद रिज़वी टीएलपी के नए प्रमुख बनाए गए थे.

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विपक्ष की सरकार विरोधी रैली फिर से शुरू
पाकिस्तान में विपक्षी पार्टियों के समूह पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) ने एक बार फिर सरकार विरोधी रैलियों की शुरुआत की है.
शनिवार को पीडीएम ने कराची में रैली की. डॉन अख़बार के अनुसार रैली को संबोधित करते हुए पीडीएम के प्रमुख मौलाना फ़ज़लुर्रहमान ने कहा, "अगर हमने पाकिस्तान को मौजूदा संकट से नहीं निकाला और 'नापाक और नाजायज़' शासकों को अरब सागर में नहीं फेंका तो पाकिस्तान के अस्तित्व का सवाल पैदा हो जाएगा."
मौलाना ने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों ने जनता के सामने एक फ़र्ज़ी दुनिया पेश की थी. उन्होंने इमरान सरकार पर हमला करते हुए कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को पता ही नहीं है कि सरकार कैसे चलाते हैं. उन्होंने कहा कि मंहगाई इस क़दर बढ़ गई है कि लोग अपने बच्चों तक को बेचने पर मजबूर हो रहे हैं या फिर भूख की वजह से आत्महत्या करने पर मजबूर हैं.
मौलाना ने कहा कि पीडीएम पाकिस्तान के अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है. उन्होंने कहा कि कराची के बाद 17 नवंबर को क्वेटा में, 20 नवंबर को पेशावर में पीडीएम की रैली होगी. मौलाना के अनुसार, आख़िरी रैली लाहौर में होगी जिसके बाद राजधानी इस्लामाबाद के लिए लॉन्ग मार्च किया जाएगा.
कराची रैली से पहले मौलाना फ़ज़लुर्रहमान ने पाकिस्तानी पीपुल्स पार्टी के नेता बिलावल भुट्टो से मुलाक़ात की थी लेकिन बैठक के बाद दोनों ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि पीपीपी के पीडीएम में दोबारा शामिल होने पर कोई बात नहीं हुई.
विपक्ष की रैली पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री फ़व्वाद चौधरी ने कहा कि विरोध प्रदर्शन करने वाले पाकिस्तान के विकास का रास्ता रोकना चाहते हैं.
फ़व्वाद चौधरी ने कहा, "पीडीएम का अब देश की राजनीति में कोई रोल बाक़ी नहीं रहा. पीडीएम सियासी लावारिसों का टोला है जिनका काम सिर्फ़ जनता को धोखा देना है. विरोध प्रदर्शन करने वाले देश की तरक़्क़ी को रोकना चाहते हैं जो नहीं रुकेगा."
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