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हीरे-पन्ने से बने मुगलकालीन बेशक़ीमती चश्मे लंदन में होंगे नीलाम
दुर्लभ हीरे और पन्ने से बने दो मुगलकालीन चश्मों की नीलामी इस महीने 27 की तारीख़ को लंदन में होगी.
हालांकि अभी तक यह मालूम नहीं चल पाया है कि ये दोनों किस शासक के ख़ज़ाने से मिले हैं.
नीलामी कराने वाले सदबीज़ ऑक्शन हाउस के मुताबिक़ हीरे और पन्ना के इन चश्मों में साल 1890 के आसपास ख़ास फ़्रेम लगाए गए थे.
ऑक्शन हाउस के मुताबिक़ दोनों चश्मों को लगभग 2-3.4 मिलियन डॉलर (15-30 करोड़ रुपये) में नीलाम किया जाएगा.
नीलामी से पहले हॉन्ग कॉन्ग और लंदन में पहली बार इनकी प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी.
असााधारण शुद्धता और गुणवत्ता वाले रत्न
ऑक्शन हाउस सदबीज़ के अध्यक्ष (मध्य पूर्व और भारत) एडवर्ड गिब्स ने कहा, "ये असाधारण चश्मे उत्सुकता के अनगिनत धागों को पिरोते हैं. जैसे-किस रहस्यमयी तकनीक से इन्हें काटकर इस आकार में लाया गया और किस उत्साही कलाकार ने ऐसे चश्मे बनाने के फ़ैशन के बारे में सोचा, जैसा पहले कभी देखा नहीं गया."
यह स्पष्ट नहीं है कि ये चश्मे किसने बनवाए, लेकिन संभव है कि इनका ताल्लुक मुग़ल शासकों से हो.
मुगल शासकों ने भारतीय उप महाद्वीप में कई सौ साल तक तक शासन किया था.
मुगल काल को उसकी समृद्ध कलाकारी और निर्माण शैली के लिए जाना जाता है.
सदबीज़ के एक बयान के अनुसार एक हीरे और एक पन्ने को तराश कर इन चश्मों में लगाया गया है.
बयान में कहा गया है कि इन रत्नों की गुणवत्ता और शुद्धता असाधारण है और इसमें कोई शक़ नहीं है कि इस आकार के रत्नों को बादशाह के लिए ही रखा गया होगा.
माना जा रहा है कि चश्मे का हीरा कर्नाटक में गोलकुंडा की खान से आया होगा. वहीं, बूँदों के आकार वाले चश्मे का पन्ना कोलंबिया से आया माना जा रहा है.
ऑक्शन हाउस के मुताबिक़, "इन साधारण लेंसों से नज़र में सुधार तो बमुश्किल ही होता होगा, लेकिन इनका सम्बन्ध आध्यात्म से भी मालूम पड़ता है. हीरे को सब कुछ प्रकाशित करने वाला और पन्ने को बुरी नज़र से बचाने वाला माना जाता है."
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