तालिबान का अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान सीमा के अहम रास्ते पर कब्ज़े का दावा

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इमेज कैप्शन, सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो शेयर किए जा रहे हैं. बीबीसी इनकी पुष्टि नहीं करता.

तालिबान लड़ाकों ने पाकिस्तान की सीमा पर स्थित अफ़ग़ान चौकियों को अपने कब्ज़े में लेने का दावा किया है.

बीबीसी पश्तो सेवा के अनुसार, तालिबान ने कहा है कि उसने दक्षिणी कंधार प्रांत में डूरंड लाइन पर स्थित स्पिन बोल्डक ज़िले, स्थानीय व्यापार मार्ग और बाज़ारों पर कब्ज़ा कर लिया है.

सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे वीडियो में कंधार के पास स्पिन बोल्डक क्रॉसिंग के ऊपर सफेद झंडा लहराता दिख रहा है.

अफ़ग़ान अधिकारियों ने इस बात से इनकार किया है कि पोस्ट अब उनके कब्ज़े में नहीं है, हालांकि सोशल मीडिया पर तस्वीरों में चरमपंथी पाकिस्तानी सीमा पर सुरक्षाबलों से बातचीत करते दिख रहे हैं.

बीबीसी को बताया गया है कि तालिबान ने बिना किसी प्रतिरोध के सीमा पर कब्ज़ा कर लिया.

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तालिबान ने "सुरक्षा की गारंटी" दी

बीबीसी स्वतंत्र रूप से रिपोर्टों की पुष्टि नहीं कर पाया है लेकिन क्वेटा में हमारे संवाददाता को बताया गया है कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि तालिबान ने पोस्ट को अपने कब्ज़े में ले लिया है.

पत्रकारों और आम लोगों से कहा गया है कि वे पाकिस्तान की ओर से सीमा पर न आएं, और वहां एक सुरक्षा बैठक बुलाई गई है.

इस क्षेत्र के व्यापारियों का कहना है कि सड़क और बाज़ारों पर अब तालिबान का कब्ज़ा है.

तालिबान के जबीहुल्लाह मुजाहिद ने एक बयान में निवासियों और व्यापारियों को उनकी "सुरक्षा की गारंटी" की बात कही है.

तालिबान के प्रवक्ता क़ारी यूसुफ़ अहमदी ने कहा है कि वो व्यापारियों और स्थानीय लोगों को यह भरोसा दिलाना चाहेंगे कि पाकिस्तानी पक्ष के साथ समझौता होने के बाद, यातायात और माल की आवाजाही सामान्य हो जायेगी.

लेकिन अफ़ग़ान गृह मंत्रालय के प्रवक्ता तारिक एरियन ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि "सीमा के पास कुछ गतिविधियां हुई थीं... सुरक्षा बलों ने हमले को नाकाम कर दिया है"

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इलाका क्यों हैं अहम?

पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान में तोरखम के बाद, स्पिन बोल्डक-चमन रूट पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच व्यापार और परिवहन के लिहाज़ से सबसे व्यस्त मार्गों में से एक रहा है और सीमा पर स्थित इस क्षेत्र के बाज़ारों के आसपास, दोनों ओर हज़ारों लोगों के घर भी हैं.

अफ़ग़ान सरकार के आधिकारिक डेटा के अनुसार, हर रोज़ इस बॉर्डर चौकी से पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच 900 ट्रक गुज़रते हैं जो ईरान समेत मध्य एशिया के अन्य देशों तक जाते हैं.

बीबीसी संवाददाता के अनुसार, यदि तालिबान का कब्ज़ा कायम रहता है तो ये उनके लिए प्रतीकात्मक और रणनीतिक तौर पर बहुत महत्वपूर्ण होगा.

इससे सीमा शुल्क से मिलने वाला राजस्व सीधे उनके हाथ में जाएगा और ये पाकिस्तान में उन क्षेत्रों तक सीधी पहुंच प्रदान करेगा, जो सालों तक तालिबान का बेस माने जाते थे.

वीडियो कैप्शन, तालिबान कौन हैं, उनका इतिहास क्या है और आख़िर वो क्या चाहते हैं?

दूसरी चौकियों पर भी कब्ज़ा

तालिबान सीमा पर स्थित अफ़ग़ान चौकियों को लगातार अपने कब्ज़े में ले रहा है ताकि वो अपनी जेबें भर सकें और अफ़ग़ान सरकार को कमज़ोर कर सकें.

इससे पहले अफ़ग़ानिस्तान के अधिकारियों ने इस्लाम कलां और तोरघुंडी के तालिबान के हाथों में जाने की पुष्टि की थी.

वीडियो कैप्शन, अफ़ग़ानिस्तान: ईरान सीमा पर तालिबान ने किया कब्ज़ा

इस्लाम कलां सीमा चौकी ईरान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच होने वाले व्यापार का केंद्र भी है.

यहाँ से सरकार को हर महीने लगभग 2 करोड़ डॉलर का राजस्व मिलता है. वहीं तोरघुंडी शहर तुर्कमेनिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच व्यापार की अहम कड़ी है.

विदेशी सैनिकों के लौटने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद से, अफ़ग़ानिस्तान में परिस्थितियाँ लगातार बदल रही हैं.

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश, जिन्होंने 2001 में सैनिकों को भेजने का फ़ैसले किया था, समेत कई लोगों को डर है कि अफ़ग़ान सुरक्षा बल तालिबान के सामने नहीं टिक पाएंगे.

इस सप्ताह जर्मन प्रसारक डॉयचे वेले के साथ एक इंटरव्यू में बुश ने कहा कि उनका मानना है कि अफ़ग़ानिस्तान के लोगों को "मरने के लिए पीछे छोड़ दिया गया है".

तालिबान ने दावा किया है कि अगर वो चाहे तो दो हफ्तों में पूरे मुल्क पर कब्ज़ा कर सकता है. फ़िलहाल माना जा रहा है कि अफ़ग़ानिस्तान के एक तिहाई हिस्से पर इस चरमपंथी संगठन का क़ब्ज़ा हो चुका है.

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