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रूस ने एस जयशंकर को अफ़ग़ानिस्तान पर कितना भरोसा दिया?
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि रूसी विदेश मंत्री सर्गेइ लवरोफ़ के साथ उनकी बातचीत सार्थक रही है.
मॉस्को में हुई एस जयशंकर और सर्गेइ लवरोफ़ की बातचीत में दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष, परमाणु क्षेत्र, ऊर्जा और रक्षा मामलों पर जारी सहयोग की समीक्षा की गई है.
दोनों नेताओं ने अफ़ग़ानिस्तान, ईरान और सीरिया जैसे अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की.
एस जयशंकर तीन दिनों की रूस यात्रा पर हैं.
उन्होंने कहा, "दुनिया में कई चीज़ें बदल रही हैं. कुछ पहले से और कुछ कोरोना महामारी के नतीज़े के कारण. लेकिन इसके बावजूद भारत और रूस के संबंध अटल रहे हैं. दोनों देशों ने वैश्विक शांति, सुरक्षा और स्थिरता के लिए योगदान दिया है."
रूसी मदद की सराहना
मॉस्को में सर्गेइ लवरोफ़ के साथ एक संयुक्त प्रेस वार्ता में एस जयशंकर ने कहा, "मुझे लगता है कि जो बात हमारे साथ काम करने को बेहद कुदरती और सहज बना देती है, वो एक बहुध्रुवीय विश्व पर हमारा भरोसा है. 21वीं सदी में दो देशों के रिश्तों के बनने की ये बेहद स्वाभाविक प्रक्रिया है. हम इसे इसी की छवि के तौर पर देखते हैं."
"समय की कसौटी पर परखे हुए और भरोसे पर आधारित हमारे संबंध न केवल सही मुकाम पर हैं बल्कि मज़बूती के साथ बने हुए हैं और आगे बढ़ रहे हैं."
साथ ही उन्होंने कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान भारत को मिली रूसी मदद की सराहना भी की.
एस जयशंकर ने कहा, "स्पूतनिक वी वैक्सीन के इस्तेमाल और उत्पादन में भारत अब रूस का पार्टनर बन गया है. और हम मानते हैं कि ये केवल हमारे दोनों देशों के लिए ही ठीक नहीं है बल्कि इसका बाक़ी दुनिया पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा."
"हमारी ज़्यादातर बातचीत कई क्षेत्रों में चल रहे सहयोग की प्रगति की समीक्षा पर हुई. हमने काफ़ी तरक्की की है."
रक्षा क्षेत्र में सहयोग
उन्होंने कहा, "हमारे संबंधों में जो एक नया आयाम जुड़ा है, वो ये है कि विदेश और रक्षा मंत्रियों की 2+2 वार्ता को लेकर सहमति बन गई है. हमें लगता है कि इस साल के आख़िरी में किसी समय हमें ये करना चाहिए."
विदेश मंत्री ने कहा, "हमारे संबंधों का कुल मिलाकर जो विकास हुआ है, उससे हम संतुष्ट हैं. हमारे बीच अंतरिक्ष, परमाणु क्षेत्र, ऊर्जा और रक्षा मामलों पर काफ़ी सहयोग हो रहा है. कुंडाकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट ट्रैक पर है."
उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में रूस भारत का वास्तविक और सबसे ताक़तवर साझेदार है.
उन्होंने कहा, "पिछले कुछ सालों में ऊर्जा क्षेत्र में हमारा सहयोग महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा है. हम तेल और गैस क्षेत्र में सहयोग के लिए सहमत हुए हैं और ये कुछ नए संभावित निवेश और दीर्घकालिक प्रतिबद्धताओं के ज़रिए दिखाई देता है."
"रक्षा क्षेत्र में सैन्य तकनीक को लेकर सहयोग. मैं ये कहना चाहूंगा कि मेक इन इंडिया प्रोग्राम में रूस की दिलचस्पी से औद्योगिक क्षेत्र में हमारा सहयोग मज़बूत हुआ है."
अफ़ग़ानिस्तान पर चर्चा
दोनों नेताओं के बीच कनेक्टिविटी, ख़ासकर नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर को लेकर चर्चा हुई. एस जयशंकर ने कहा, "कुल मिलाकर आर्थिक सहयोग और विज्ञान एवं तकनीकी के क्षेत्र में साझेदारी को लेकर हमारी भावना बेहद सकारात्मक थी."
दोनों नेताओं के बीच अफ़ग़ानिस्तान को लेकर भी चर्चा हुई.
उन्होंने कहा, "अफ़ग़ानिस्तान पर हमारा बहुत ज़्यादा ध्यान है क्योंकि क्षेत्रीय सुरक्षा पर इसका सीधा असर पड़ता है. अगर आप अफ़ग़ानिस्तान के अंदर और उसके आस-पास देखों तो हमें लगता है कि जो चीज़ सबसे जल्द किए जाने की ज़रूरत है, वो हिंसा में कमी करना है."
"भारत और रूस के लिए ये महत्वपूर्ण है कि अफ़ग़ानिस्तान में आर्थिक, लोकतांत्रिक और सामाजिक क्षेत्र में जो भी तरक्की हुई है, उसे बरकरार रखने के लिए हम साथ काम करें. भारत और रूस दोनों ही एक स्वतंत्र, संप्रभु, एकीकृत और लोकतांत्रिक अफ़ग़ानिस्तान को लेकर प्रतिबद्ध हैं."
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