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इसराइली से शादी करने वाले फ़लस्तीनियों को अब मिल सकेगी इसराइली नागरिकता
इसराइल की संसद में फलीस्तीनियों को नागरिक अधिकार हासिल करने से रोकने वाले विवादास्पद क़ानून की मियाद को बढ़ाने की मंज़ूरी नहीं मिल पाई है.
ये क़ानून इसराइलियों से शादी करने वाले इसराइल के कब्ज़े वाले वेस्ट बैंक या गज़ा के फलस्तीनियों पर लागू होता है.
बीती रात इसराइल की संसद में इस मुद्दे पर देर तक बहस हुई और वोटिंग में इसके पक्ष और विरोध में बराबर-बराबर 59 वोट पड़े.
जून में सत्ता संभालने के बाद प्रधानमंत्री नेफ़्टाली बेनेट के लिए ये सियासी परीक्षा की घड़ी थी.
इस क़ानून के विरोधियों का कहना है कि ये भेदभावपूर्ण है. अब ये मंगलवार को निष्प्रभावी हो जाएगा.
संसद में वोटिंग
राजनीतिक विचारधारा के मामले में नेफ़्टाली बेनेट की गठबंधन सरकार काफी विविधतापूर्ण है और नागरिकता क़ानून के मुद्दे पर वोटिंग को उन्होंने अपनी सरकार के विश्वास मत के प्रस्ताव के तौर पर पेश किया था.
दक्षिणपंथी यामिना पार्टी के नेता नेफ़्टाली बेनेट की गठबंधन सरकार में वामपंथी, मध्यमार्गी और दक्षिणपंथियों से लेकर अरब पार्टियां तक शामिल हैं.
उन्होंने उम्मीद की थी कि मंगलवार को सदन के पटल पर रखे गए समझौते के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया जाएगा.
लेकिन देर रात तक चले संसद सत्र में इस मुद्दे पर जोरदार बहस हुई. संसद के 59 सदस्यों ने इसके पक्ष में वोट किया और 59 ने विरोध में.
यूनाइटेड अरब लिस्ट पार्टी के दो सदस्यों ने मतदान में भाग नहीं लिया. ये पार्टी इसराइल के अल्पसंख्यक अरब समुदाय की नुमाइंदगी करती है और सत्तारूढ़ गठबंधन में साझीदार भी है.
बिन्यामिन नेतन्याहू का विरोध
विपक्ष के दक्षिणपंथी राजनेताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू की अगुवाई में नेफ़्टाली बेनेट की सरकार को परेशान करने के लिए इस नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ वोट दिया.
इस राजनीतिक समूह ने अतीत में नागरिकता क़ानून का समर्थन किया था.
'द सिटिज़नशिप एंड एंट्री लॉ' साल 2003 में उस वक़्त पारित किया गया था जब वेस्ट बैंक और ग़ज़ा पट्टी में इसराइली क़ब्ज़े के ख़िलाफ़ दूसरा फलस्तीनी विद्रोह शुरू हुआ था और चरमपंथी इसराइल के भीतर हमलों को अंज़ाम दे रहे थे.
इसराइल की सरकार सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इसकी मियाद हर साल बढ़ाती आई थी.
हालांकि आलोचकों का कहना है कि इस क़ानून का मक़सद इसराइल में यहूदियों के बहुमत को बरकरार रखना है.
इसराइली नागरिकों से शादी करने वाले हज़ारों फलस्तीनी इस क़ानून की वजह से नागरिक अधिकारों पर दावा नहीं कर पाते थे, लेकिन अब वे ऐसा कर सकेंगे.
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